गुजरात में नया कारनामा- मास्क बेचकर मुनाफ़ा और नकली वेंटिलेटर लगाकर वाहवाही

गुजरात में नया कारनामा-

मास्क बेचकर मुनाफ़ा और नकली वेंटिलेटर लगाकर वाहवाही,मरीज़ को राम बचाएं

BY रोहिणी सिंह

 

New act in Gujarat-
Profit by selling masks and accolades by installing fake ventilators

अहमदाबाद मिरर की एक और रिपोर्ट शर्मसार करती है। सरकार ने अमूल पार्लर के ज़रिए N-95 मास्क बेचने का फैसला किया। अखबार ने अपनी जांच में पाया है कि सरकार जिस दाम पर खरीद रही है, उस पर 31 प्रतिशत मुनाफा लेकर बेच रही है। दयावान सरकार की जनता पर मेहरबानी हुई है.

गुजरात में कोविड-19 से जितने लोगों की मौत हुई है, उस संख्या का आधा अकेले अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में हुई है। पी टी आई से आई इस ख़बर को मीडिया ने चौकी के नीचे सरका दिया। आप गुजरात के मुख्य अखबारों को देखें। दिव्य भास्कर, संदेश और अहमदाबाद मिरर। किसी और चीज़ को वेंटिलेटर बनाने का मामला चौंकाने वाला है। इस भयंकर महामारी के बीच राजनीतिक रिश्तेदारी और झांसेबाज़ी का खेल चल रहा है।

रोहिणी सिंह ने वेंटिलेटर मामले में एक और नया खुलासा किया है। इस नकली वेंटिलेटर को बेचने वाली कंपनी के प्रमोटर परिवारों में से एक का संबंध बीजेपी के चोटी के नेताओं से है। इस प्रमोटर के वैवाहिक कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री भी जाते हैं।

इस खबर का हिन्दी अनुवाद यहां है। कमेंट में आई टी सेल हमला बोलेगा। इसी तरह से ऐसी खबरों को रोका जाता है। अब तो आई टी सेल वाले लिखना भी भूल गए हैं। उन्हें फोटो मीम बना कर दे दिया जाता है और पोस्ट कर देते हैं।

ख़ैर हो सके तो हिन्दी के लाखों पाठकों तक पहुंचा दें। हिन्दी मीडिया जानबूझ कर ऐसी खबरों को गांवों में नहीं पहुंचने देता है.

 

क्या है एचएलएल टेंडर की कहानी?
20 मई को ही गुजरात की स्वास्थ्य सचिव जयंती रवि ने इन मशीनों की पैरवी करते हुए कहा कि इन्हें गुजरात सरकार की प्रयोगशाला से प्रमाणित किया गया है और यह केंद्र की उच्चाधिकार प्राप्त प्रोक्योरमेंट (खरीद) कमेटी के सभी मानकों को पूरा करती हैं.

रवि ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार के उपक्रम एचएलएल लाइफकेयर द्वारा ज्योति सीएनसी को पांच हजार मशीनों का ऑर्डर दिया गया है.

यह ऑर्डर संभवतया उस टेंडर प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, जो मार्च 2020 के आखिर में एचएलएल द्वारा शुरू की गई थी और इसका आर्थिक स्रोत पीएम केयर्स फंड हो सकता है, जिसने ने मई 2020 में 50 हजार वेंटिलेटर खरीदने के लिए दो हजार करोड़ रुपये अलग रखने की बात कही गई थी.

द वायर इस फंड से संबंधित किसी भी व्यक्ति से संपर्क करने में असफल रहा है. प्रधानमंत्री कार्यालय से इस बारे में सवाल करने के प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकला.

कंपनी का राजनीतिक कनेक्शन
अहमदाबाद के सबसे बड़े अस्पताल के डॉक्टरों के ज्योति सीएनसी की इस मशीन के बारे में आई नकारात्मक प्रतिक्रियाओं के बावजूद गुजरात सरकार क्यों इन विवादित मशीनों के साथ खड़ी है?

इसका जवाब है इस कंपनी के वर्तमान और पूर्व प्रमोटरों की मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नजदीकियां, जिनका प्रमाण सार्वजनिक रूप से भी उपलब्ध है.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रूपाणी द्वारा इस मशीन की काफी तारीफ करते हुए बताया गया था कि कैसे राजकोट के एक उद्योगपति द्वारा महज दस दिनों में सफलतापूर्वक वेंटिलेटर्स बना लिए गए हैं.

अहमदाबाद मिरर के अनुसार कंपनी के प्रमुख और सीएमडी पराक्रमसिंह जडेजा ने बताया था कि गुजरात के मुख्यमंत्री उन्हें रोज कॉल करके प्रोत्साहित किया करते थे.

ज्योति सीएनसी कंपनी से जुड़े उद्योगपति परिवारों में से एक विरानी परिवार है, जिसने साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्हीं का नाम छपा महंगा सूट तोहफे में दिया था.

यह उपहार देने वाले व्यवसायी रमेशकुमार भीखाभाई विरानी सूरत के विरानी परिवार का हिस्सा हैं, जिसकी कई सालों से ज्योति सीएनसी में महत्वपूर्ण वित्तीय हिस्सेदारी है. कंपनी की 2003-04 की फाइलिंग के अनुसार भीखाभाई विरानी के दोनों बेटे- अनिल और किशोर इस कंपनी के बड़े शेयरहोल्डर थे.

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