भारत को कमजोर बताने वाले नेता और पत्रकार अब क्या कहेंगे।

बीस सैनिकों की शहादत का बदला भारतीय सेना ने 45 चीनी जवानों को मौत के घाट उतार कर लिया।
कश्मीर में दो एनकाउंटरों में चार आतंकी ढेर। चार दिन में 10 आतंकी मारे गए।
24 जून को रूस में आयोजित विक्ट्री परेड में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल होंगे। यहां चीन भी आएगा।
भारत को कमजोर बताने वाले नेता और पत्रकार अब क्या कहेंगे।
====राजकुमार अग्रवाल =======
कश्मीर में दो एनकाउंटरों में सुरक्षा बलों ने चार आतंकियों को ढेर कर दिया। श्रीनगर के एनकाउंटर में तीन तथा शोपिया के एनकाउंटर में एक आतंकी मारा गया है। पिछले चार दिनों में कश्मीर में 10 आतंकी मारे गए हैं। अनुच्छेद 370 के हटने के बाद कश्मीर के आतंकियों को पाकिस्तान से मदद नहीं मिल पा रही है, इसलिए कश्मीर में आतंकी घटनाएं कमजोर हो रही है। भारत के सुरक्षा बल लगातार कश्मीर घाटी को आतंकमुक्त बनाने में लगे हुए हैं। इसी प्रकार गत 15 जून की रात को लद्दाख में गलवान घाटी में सिर्फ भारत के बीस जवान शहीद नहीं हुए बल्कि चीन के 45 से 50 सैनिकों को भी भारतीय सेना ने मौत के घाट उतार दिया। चीनी सैनिकों ने जो बर्बरता की उसका बदला भारतीय सैनिकों ने चीन के दस सैनिकों की गर्दन तोड़ कर लिया। चीन ने जब कुछ भारतीय सैनिकों को बंधक बनाया तब चीन का एक कर्नल भी हमारी सेना के कब्जे में था। अपने कर्नल को छुड़ाने के लिए चीन को भारतीय सैनिकों को छोडऩा पड़ा। धोखेबाज चीन ने हमारे सैनिकों पर कंटीली लोहे की रॉड से हमला किया। लेकिन हमारे सैनिकों ने हाथों से ही चीन के सैनिकों की गर्दन मरोड़ दी। भारत के कुछ नेता और पत्रकार लगातार भारत की सेना को कमजोर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सेना ने 15 जून की रात को गलवान घाटी में जो पराक्रम दिखाया उससे चीन सेना अब घबराई हुई है। ताजा हालातों पर चर्चा करने के लिए 21 जून को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल विपिन रावत के साथ बैठक की। सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस की राजधानी मास्को में 24 जून को होने वाली विक्ट्री परेड के समारोह में भाग लेंगे। इस समारोह में चीन के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। लेकिन भारत की ओर से चीन के किसी प्रतिनिधि से मुलाकात की कोई योजना नहीं है। अलबत्ता इस परेड में चीन के सैनिकों के साथ साथ भारत के सैनिक भी भाग लेंगे। यह परेड द्वितीय विश्वयुद्ध में रूस समूह की जीत को लेकर की जाती है। तब रूस का साथ चीन और भारत ने भी दिया था। यह बात अलग है कि मौजूदा हालातों में भारत और चीन की सेना आमने सामने खड़ी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
error: Content is protected !!
%d bloggers like this:
Breaking News