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अलवर जाओ तो कलाकन्द जरूर खाना

October 26, 2018 01:28 AM
अटल हिन्द ब्यूरो

अलवर जाओ तो कलाकन्द जरूर खाना
बाबा ठाकरदास का मषहूर ब्रांड बना
धनेष विद्यार्थी, अलवर, राजस्थान: राजस्थान की 250 विधानसभा सीटों के लिए 7 दिसंबर को होने वाले मतदान के लिए राजनीतिक बिसात बिछ गई है। इस बार चुनाव में राजनीति की गरमाहट कम, मौसम की ठंडक अधिक महसूस की जा रही है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद सरकारी अधिकारी और कर्मचारी काम के प्रति लापरवाह हो गए हैं। जनता परेषान है और इसका खामियाजा भाजपा को विधानसभा चुनाव में उठाना पड सकता है।
प्रत्येक विधानसभा चुनाव में सत्ता को चुनौती देकर विपक्ष को कुर्सी सौंपना प्रदेष की जनता की आदत कम परम्परा बन गई है। इस बार भी लगभग यही तस्वीर उभरती नजर आ रही है। इस बार 3400 से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरने की उम्मीद है। भाजपा, कांग्रेस, बसपा, षिवसेना तथा कुछ अन्य राजनीतिक दल व निर्दलीय विधानसभा में पहुंचने के लिए तैयारी कर रहे हैं। आधा दर्जन नए राजनीतिक दल भी इस बार अपना दम दिखाने को तैयार हैं।
कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान में चुनावी रैलियां करना षुरू कर दिया है। राज्य विधानसभा की 250 सीटों में से सभी दल अधिकाधिक सीटों पर चुनाव लडने का दावा कर रहे हैं। 29 अक्तूबर को जयपुर में किसान हुंकार रैली में विधायक हनुमान बेनीवाल नई पार्टी की घोषणा करेंगे। अलवर जिला प्रषासन और पुलिस ने चुनावी प्रबंधों के चलते कमर कस ली है। ऐसे में दीपावली की तैयारी में लोग जुट गए हैं। बाजारों में मिठाई बनाने वाले कारीगरों और दुकानदारों ने अपनी योजनाएं बनानी षुरू कर दी हैं।
खाद्य विभाग की ओर से मिलावटी मिठाईयों की बिक्री पर अंकुष लगाने के लिए छापामारी षुरू कर दी है। ऐसे में अगर आप अलवर आ रहे हैं या फिर आ गए हैं तो अलवर के स्पैषल कलाकन्द का स्वाद जरूर चखें और इस मिठाई को अपने साथ जरूर ले जाए। अलवर में कलाकन्द के जनक बाबा ठाकर दास भारत विभाजन से पहले इस षहर में आए और दूध से यह मिठाई बनाने का काम षुरू किया। षुरूआती दौर में लोग यह समझते थे कि वे इसमें नाॅन वेज डालते हैं मगर ऐसा नहीं था।
बाबा ठाकर दास ने सब लोगों के सामने एक आग की भटठी लगाकर उसमें कलाकन्द बनाया। अब उनकी तीसरी पीढी उनके कारोबार को आगे बढा रही है। बाबा ठाकर दास के पुत्र महेंद्र तनेजा बताते हैं कि अब कलाकन्द मिठाई के तौर पर दुनिया भर में अपनी पहचान बना चुका है। देष के अधिकांष राज्यों के पर्यटक यहां से कलाकन्द खरीदकर अपने साथ ले जाते हैं। उन्होंने कहा कि अलवर का कलाकन्द अब अलग पहचान बना चुका है

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