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बुढ़ापा अनुभवों का वो पीटारा है जो बहुत चोटें खाने के बाद ही मिलता है: अचल मुनि 2

अटल हिन्द ब्यूरो | October 28, 2018 04:17 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

बुढ़ापा अनुभवों का वो पीटारा है जो बहुत चोटें खाने के बाद ही मिलता है: अचल मुनि 2
कहा: बीते हुए कल की ज्यादा चर्चा न करें बुजुर्ग तो रहेंगे सुखी


उचाना।


एसएस जैन द्वारा स्थानक में बुजुर्ग दिवस मनाया गया। गुरू अचल ने श्रद्धालुओं को फरमाते हुए कहा कि जिसमें धैर्य, स्थैर्य, सत्य, वैराग्य ही औरों को भी जो स्थिर कर सकें उसे वृद्ध कहते है। एक वृद्ध भगवान के चरणों में गया बोला कि क्या मेरा भी कल्याण हो सकता? तब भगवान ने कहा हॉं पर चार चीजें हो। खाने में तप हो, संयम हो, बोलने में तप हो, विवेक हो, सहनशीलता व क्षमा भाव हो, ब्रह्मचार्य भाव हो। वृद्ध कौन होता है ? जो भूतकाल में जीता है। हम ये थे, हम वो थे, वो वृद्ध होते है। बुढ़ापे में हममें रस आना चाहिए। जीवन में मिठास हो, कड़वाहट ना हो। अफसोस जैसे-जैसे अवस्था बढ़ रही है मानसिक व शारीरिक दुख भी बढ़ रहा है। बुजुर्ग आज अकेलापन महसूस कर रहे है तनाव ग्रस्त हो रहे है। बुजुर्ग का शाब्दिक अर्थ है बु-अहं की गंध न हो, जु- जुबान गंदी न हो, र-मण करे आत्मा में, ग- गंदा व्यवहार न हो। बुढ़ापा सुखमय किसका होता है ? जिन्होंने जवानी के जोश में होश नहीं खोया, आजादी की उमंग में मर्यादा को नहीं तोड़ा, जिन्होंने जवानी को अच्छे ढंग से जीया उनका बुढ़ापा पके हुए आम की तरह मीठा होता है।
जैन संत ने कहा कि बुढ़ापा अनुभवों का वो पीटारा है जो बहुत चोटें खाने के बाद ही मिलता है। जो जवानी में अंधे होकर दौड़ते रहे उनका बुढ़ापा बूढ़े बैल की तरह पीड़ाओं से भरा होता है। हमारे बुजुर्गों को भी कुछ बातों को ध्यान रखना चाहिए। यदि कोई मिलने के लिए आए तो उनकी मर्जी के विरोध अधिक बैठने को मजबूर न करें, फालतू की बातों में दिलचस्पी न रखे, कोई फालतू ढींग न हांके, बीते समय की अधिक चर्चा न करें, एक ही बात बार-बार न रटे, जबान पर नियंत्रण रखे खाने में भी बोलने में भी, ज्यादा न बोले व अशब्द न बोले, घर की बातें इधर-उधर न कहें, घर के सदस्य की बुराई न करें जो बुजुर्ग इन बातों को का ध्यान नहीं रखते उन्हें रोना ही पड़ता है।
उन्होंने कहा कि कुछ इंसान ऐसे भी होते है जिन्हें रोना नहीं पड़ता। कौन नहीं रोता ? जिसकी आत्मा जागृत होती है। महापुरूष कभी रोते नहीं है। प्रभु राम, भगवान महावीर, श्रीकृष्ण पर कितने ही कष्ट आये हो पर वो कभी रोये नहीं। विचार पूर्वक कार्य करने वाले को कभी रोना नहीं पड़ता। अल्प इच्छा रखने वाले को भी कभी रोना नहीं पड़ता। जो अपने आपने को बुराई से रोकता है, जो बड़ों को सम्मान करता है, जो वक्त पडऩे पर सहयोग देता है, जो भगवान पर भरोसा व दृढ़ विश्वास रखता है, जिसे कर्म सिद्धांत पर विश्वास है व उसका ज्ञान है वो भी कभी रोता नहीं है। शीतल मुनि महाराज, अतिशत मुनि ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया।

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