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राजस्थान विधानसभा चुनाव -भाजपा सांसद व विधायक चुनावी टिकट नहीं मिलने से हुए बागी

November 15, 2018 05:29 PM
धनेश विधार्थी

राजस्थान विधानसभा चुनाव
भाजपा सांसद व विधायक चुनावी टिकट नहीं मिलने से हुए बागी
कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की आज जारी करेगी सूची
17-18 को नामांकन दाखिल करेंगे घोषित उम्मीदवार
धनेष विद्यार्थी, अलवर।
राजस्थान में विधानसभा के आम चुनाव को लेकर 7 दिसंबर को होने वाले मतदान
के लिए सरकारी तंत्र, जनता और राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। भाजपा ने
अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची दाखिल करने के साथ अपने बागी विधायकों
एवं सांसदों को साधने में जुट गई है।
उधर कांग्रेस राजस्थान चुनाव की पहली लड़ाई (उम्मीदवारों की सूची जारी
करने का मामला) हार गई है। भाजपा ने पहली और दूसरी सूची जारी करने के साथ
ही अपने उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए पार्टी संगठन को
निर्देष दे दिए हैं। आरएसएस, विहिप और अन्य सहयोगी संगठन भी भाजपा
उम्मीदवारों की हरसंभव मदद करने के लिए अन्दरखाने जनता में संपर्क साध
रहे हैं। राजस्थान में काफी समय से पांच साल बाद सरकार बदलने की परम्परा
चल रही है जो इस बार टूटेगी या नहीं, यह 11 दिसंबर को मतगणना के बाद साफ
हो जाएगा मगर मोदी सरकार के कुछ निर्णयों के खिलाफ लोगों की नाराजगी इस
बार राजस्थान के विधानसभा चुनाव में भी झेलनी पड़ेगी। कुछ विधायकों का
बड़बोलापन भी भाजपा की जीत को बुरी तरह प्रभावित करेगा। मेव, माली, वैष्य
तथा अनुसूचित जाति के लोगों का विरोध भाजपा को झेलने की तैयारी कर लेनी
चाहिए। मेव समुदाय का झुकाव भाजपा की ओर कम नजर आ रहा है क्योंकि बहरोड़
के रकबर मामले के बाद दो बार जीत दर्ज करने वाले रामगढ़ के विधायक रहे
ज्ञानदेव आहुजा की टिकट कटना भी भाजपा के वोट बैंक को प्रभावित करेगा।
अलवर षहर में पुरूषार्थी समाज और वैष्य समुदाय रामगढ से आहुजा और बनवारी
लाल सिंघल का टिकट काटे जाने के बाद से नाराज है। राजपूत समाज का वोट
बैंक भी इस बार एकमुष्त कांग्रेस अथवा भाजपा को मिलने की संभावना नहीं
है। ब्राहमण समाज को अलवर षहर से भाजपा ने जिलाध्यक्ष संजय षर्मा को
चुनावी टिकट थमाकर खुष तो कर दिया मगर संजय की खिलाफत भाजपा उम्मीदवार
बनाए जाने के साथ ही षुरू हो गई।
लोगों की नजरें कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची पर लगी हुई है। कांग्रेस
हाईकमान ने अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है। विष्वस्त
सूत्रों के अनुसार गुरूवार देर षाम करीब पौने दो सौ उम्मीदवारों की सूची
जारी होने वाली है। इसके लिए अंतिम मंत्रणा हेतु पार्टी अध्यक्ष राहुल
गांधी की अध्यक्षता में दिल्ली व राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की
एक अहम बैठक होने वाली है। संकेत यहां तक है कि देर षाम 5 बजे के बाद यह
सूची जारी हो सकती है।
बता दें कि अलवर जिले में 11 में से 9 सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा है।
भाजपा 11 में से 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। भाजपा ने
अपने 5 में से 3 विधायकों के टिकट काटकर उन्हें आईना दिखा दिया है। अभी
भाजपा के तीन मंत्रियों और दो विधायकों को चुनावी टिकट मिलेगा या नहीं,
इसको लेकर संषय बरकरार है। इनमें दो कैबिनेट मंत्री जबकि एक राज्य मंत्री
षामिल हैं। बहरोड से विधायक डाॅ जसवंत सिंह यादव, थानागाजी से विधायक
हेमसिंह भडाना जबकि तिजारा से विधायक मामन सिंह यादव और अलवर ग्रामीण सीट
से जयराम जाटव को टिकट भाजपा देगी या नहीं, यह तीसरी सूची आने के बाद साफ
होगा। मेव समुदाय के किसी भी उम्मीदवार की घोषणा नहीं होने की वजह से मेव
मतदाताओं के भाजपा से छिटककर कांग्रेस की झोली में जाने की संभावना है।
रामगढ से सुखवंत सिंह और कठूमर से बाबू लाल मैनेजर को उतारकर भाजपा ने
साफ कर दिया है कि उसके पास चुनावी खेल में अभी और भी पत्ते बाकी हैं।
बता दें कि भाजपा को लोकसभा उप चुनाव में अलवर जिले के 9 विधानसभा
क्षेत्रों में से 8 में मतों के आधार पर पिछड़ना पड़ा था और अब इसका असर
विधानसभा चुनाव के टिकट आवंटन पर नजर आ रहा है। आरएसएस, सीएम वसुंधरा
राजे और ओम माथुर जैसे बड़े नेताओं का भाजपा उम्मीदवारों की सूची पर
प्रभाव साफ नजर आ रहा है।
19 नवंबर को नामांकन का आखिरी दिन है, इसलिए भाजपा और कांग्रेस के
उम्मीदवार 17 से 19 नवंबर तक अपने नामांकन दाखिल करेंगे। फिलहाल भाजपा
जहां नए, सीट जीताउ और अनुभवी चेहरों को चुनावी मैदान में उतार रही है
जबकि कांग्रेस की मंषा भाजपा के उम्मीदवारों का चेहरा और उनकी सियासी
ताकत देखकर अपने उम्मीदवार उतारने की नजर आ रही है। वह राजस्थान की जनता
की हर पांच साल बाद सरकार बदलने की परिपाटी में विष्वास रखते हुए सावधानी
के साथ अपने पत्ते खोलने के मूड में है।

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