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भारत में हैं सर्वाधिक रक्त कैंसर रोगी, अमेरिका व चीन के बाद

अटल हिन्द ब्यूरो | December 14, 2018 07:26 PM
अटल हिन्द ब्यूरो
 भारत में हैं सर्वाधिक रक्त कैंसर रोगी, अमेरिका व चीन के बाद
 
भिवानी (अटल हिन्द न्यूज )। तेजी से बदल रही जीवनशैली, खानपान में अनियमितताओं व धूम्रपान समेत कई कारणों के चलते भारत में रक्त कैंसर तेजी से फैल रहा है। विश्व में अमेरिका व चीन के बाद भारत तीसरा ऐसा देश है जहां रक्त कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। नई दिल्ली के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शालीमार बाग के हीमैटोलॉजी एवं अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण के कंसल्टेंट डाक्टर गौरव दीक्षित और मेडिकल ओंकोलॉजी के एसोसिएट कंसल्टेंट डाक्टर विनीत गोविंद गुप्ता ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत में बताया कि अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण एक गैर शल्य प्रक्रिया है जिसमें क्षतिग्रस्त या रोगग्रस्त अस्थि मज्जा के स्थान पर स्वास्थ्य अस्थि मज्जा स्टेम कोशिकाओं को प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। यह जटिल प्रक्रिया भारत के कुछ ही अस्पतालों में की जाती है, लेकिन भारत में अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की सफलता दर अंतरराष्ट्रीय सफलता दर के बराबर है। उन्होंने कहा कि भारत अमरीका और चीन के बाद दुनिया में रक्त कैंसर के सबसे अधिक रोगियों वाला तीसरा देश है और भारत में 2018 में रक्त कैंसर के 1.17 लाख नए मामले सामने आने की संभावना है। अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण आमतौर रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को प्रभावित करने वाले कुछ प्रकार के कैंसर और कुछ प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। डाक्टर गौरव दीक्षित ने कहा कि अमेरिका में हर बड़े शहर में 2-3 बीएमटी केंद्र हैं और इस प्रकार देश भर में लगभग 150-200 केन्द्र हैं। इसके विपरीत, भारत में अमरीका की तुलना में पांच गुना जनसंख्या होने के बावजूद अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की सुविधा वाले कुछ ही अस्पताल हैं। और इस तरह से भारत में ज्यादातर मरीजों की मौत रक्त कैंसर से नहीं होती बल्कि उपचार के इंतजार करने के कारण होती है। एक और विडंबना यह है कि भारत की 125 करोड़ की आबादी पर 100 से भी कम ऐसे कैंसर विषेशज्ञ है जो बीएमटी के लिए प्रशिक्षित हैं। इस अवसर पर डाक्टर गुप्ता ने कहा कि अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण रिफैक्टरी रक्त कैंसर के रोगियों में लंबे समय तक जीवित रहने के लिए एकमात्र इलाज है। क्योंकि इन रोगियों को कीमोथेरेपी दवाओं से कोई फायदा नहीं होता है। भारत में थैलेसीमिया से गंभीर रूप से प्रभावित 65000-67000 रोगी हैं और हर साल थैलेसीमिया के 9000-10000 नए मामलों का पता चल रहा है और थैलेसीमिया के इलाज के लिए बीटीएम सबसे उपयुक्त इलाज है।
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