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जीरकपुर की अवैध मंडी में आग से दिनभर राख में उम्मीद ढूंढते रहे सभी दुकानदार

अटल हिन्द ब्यूरो | December 18, 2018 10:00 PM
अटल हिन्द ब्यूरो
जीरकपुर की अवैध मंडी में आग से दिनभर राख में उम्मीद ढूंढते रहे सभी दुकानदार
जीरकपुर, जे एस कलेर:
जीरकपुर अंबाला रोड़ पर फ्लाईओवर के नीचे स्थित अवैध मंडी में जूतों, कपड़ों, मनियारी, खान-पान और सब्जी व फ्रूट की
दुकानों में सोमवार रात 10 बजे लगी आग का असर मंगलवार को भी रहा। कबाड़ के ढेर में से दिनभर धुआं उठता रहा और सुबह एक-दो बार हल्की आग भी लगी। इसके लिए दमकलें बुलानी पड़ी।
मंगलवार को भी दिनभर वहां भीड़ जमा रही। कुछ दुकानदार जो बियाज पर पैसे लेकर अपनी दो वक्त की रोटी चला रहे थे आगजनी के सदमे के कारण रातभर से घर ही नहीं गए। आग बुझने के बाद नगर कौंसिल ने जेसीबी से सारे कबाड़ को एकत्र करके बड़ा ढेर कर दिया था। दुकानदार सुबह से राख में सामान के रूप में उम्मीद ढूंढते रहे। वह इसी उहापोह में लगे रहे कि इस मुसीबत से कैसे निपटा जाए? बिजली विभाग के कर्मचारी दिनभर वहां तारों को सुधारने और नई लाइनें डालने में व्यस्त दिखे तो अग्निशमन विभाग का अमला भी मुस्तैद नजर आया।   
दिनभर रुक रुक कर चला ट्रैफिक
सोमवार रात के बाद ही पुलिस ने गली के मुहाने पर बैरिकेड्स लगाकर रास्ता बंद कर दिया ताकि वहां कोई वाहन प्रवेश नहीं कर सके। अवैध मंडी की दुकानों में सोमवार रात अचानक आग लग गई थी। सिलेंडर और हवा भरने के कंप्रेशर फटने से 3 से ज्यादा धमाके हुए थे, हालांकि आग में किसी के हताहत होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन मंगलवार को भी घटना स्थल पर लोगों का तांता लगा रहने से दिनभर ट्रैफिक रुक रुक कर चला। 
दीपिन्दर ढिल्लों व विधायक एन के शर्मा ने किया दुख व्यक्त
पीपीसीसी सचिव दीपिन्दर ढिल्लों व हल्का विधायक एन के शर्मा ने पीड़ित लोगों से मिलकर आगजनी की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को प्रभावितों  की हर संभव मदद के निर्देश दिए हैं। इधर, मंगलवार को तहसीलदार परमजीत सिंह ने प्रभावित लोगों के मुआवजे लिए एक पांच सदस्यों की समिति का गठन कर दिया है।    
आंखों देखी :   
लापरवाही प्रशासन की, क्योंकि अवैध मंडी जिसे जीरकपुर नगर कौंसिल नजरअंदाज करती रही में बिजली के तार टूटकर गिर गए थे, समय पर बिजली बंद नहीं हुई और मंडी में आग फैल गई थी। जीरकपुर इस मंडी के साथ साथ कई अन्य इलाकों में भी अवैध मंडियां है जो हाईटेंशन तारों के नीचे बसाई गई है जिसे कौंसिल प्रशासन आँखे बंद रखकर नजरअंदाज करता आ रहा है जहाँ कभी भी कोई भी दुर्घटना घटी सकती है।
मैं सोमवार रात दुकानों के बाहर ही था। रात करीब 9 बजे  दुकान पर आग दिखी। जब मैं पास गया तो पता चला कि दुकान पर बिजली के तार गिरे हुए हैं और उनसे चिंगारी निकल रही है। मैने दुकानदारों को बताकर तुरंत  अग्निशमन विभाग को फोन पर पूरी बात बताई। इसके बाद मैंने बिजली विभाग को जानकारी दी और तुरंत बिजली काटने को कहा, लेकिन बिजली तुरंत नहीं काटी गई। कुछ देर में एक दमकल विभाग की एक गाड़ी मौके पर आ गई, लेकिन उन्होंने आग बुझाने के लिए पानी डालने से मना कर दिया। उन्होंने बोला कि जब तक पूरी बिजली सप्लाई नहीं काटी जाती, हम पानी नहीं डाल सकते क्योंकि पानी से पूरे मार्केट में करंट फैल जाएगा। 25 मिनट तक रोड लाइटें बंद नहीं हुई, इसलिए आग ने विकराल रूप लिया। (असलम खान)   
जांच नहीं की दुकानों की, अधिकतर में ज्वलनशील पदार्थ : - 
अवैध मंडी की जिन दुकानों में आग लगी, उनमें अधिकतर में सिलेंडर, स्टोव, डीजल जैसे ज्वलनशील पदार्थ रखे थे। मौके पर मौजूद रहे लोगों का कहना है कि इन दुकानों में पुलिस, कौंसिल प्रशासन और अग्निशमन विभाग के अधिकारी कभी कोई जांच नहीं करते। यहां आग बुझाने के उपकरण भी नहीं होते, लेकिन अग्निशमन विभाग इससे जानबूझकर अनजान बना हुआ है। खानेपीने की दुकानों में घरेलू सिलेंडर हमेशा रखे रहते हैं, जिसमें कई बार छोटी-मोटी आग लग चुकी है। दुकानदारों का कहना है कि हर दुकान में था 50 हजार से लेकर 10 लाख रु. तक का माल आग में 70 दुकानें राख हो गईं। व्यापारियों का दावा है कि नुकसान का आंकड़ा करोडों में है। 
दुकानदारों फैजान, असलम, हयात, असलम खान, फ़ज़ल, कलाम खान, सतवीर वर्मा, राकेश कुमार, संजय शर्मा, पप्पू, रेखा, राम, संगीता, अमर, पाली, राजेश बंसल ने बातचीत में दावा किया कि यहां हर दुकान में औसतन 50 हजार से 1 लाख रुपए का माल भरा था। 
जीरकपुर के पास खुद की फायर ब्रिगेड नहीं 
जीरकपुर शहर में एक के बाद एक साल दर साल से घटती आग की घटनाओं में बचाव के लिए खुद की फायर ब्रिगेड नहीं है। अगर कहीं कुछ हादसा हो जाता है तो डेराबस्सी, मोहाली या पंचकूला की फायर ब्रिगेड से मदद ली जाती है। फेस्टिवल सीजन में इसकी ज्यादा जरूरत पड़ती है। खासकर दीवाली से लेकर नए साल तक के दौरान यहां अागजनी की घटनाएं होती हैं। ऐसे में आग से बचाव के लिए अब इस शहर को दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। जिस तरह से जीरकपुर में होटल, मॉल्स, हाइराइज्ड बिल्डिंग्स के साथ साथ अवैध मंडियों के साथ संकरी गलियों वाली कालोनियां बन रही हैं। उससे तो यहां न सिर्फ फायर ब्रिगेड बल्डि हाइड्रोलिक लेडर भी होना चाहिए। 
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