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फेसबुक ने मिलवाया-दो दशक से लापता बेटे की राह देख रही थी मां,

December 21, 2018 06:04 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

 

 
 
फेसबुक ने मिलवाया-दो दशक से लापता बेटे की राह देख रही थी मां,  
 
हांसी(अटल हिन्द न्यूज )
atalhind@gmail.com  
पढ़ाई-लिखाई व अपने-पराये की परवाह किये बगैर जो बच्चे मोबाइल फोन पर फेसबुक चलाकर घंटों बर्बाद कर देते हैं, उसी फेसबुक का 20 साल पहले अपने परिजनों से जुदा हुए हिसार के सिसाय गांव के लाल को मिलाने में अहम रोल अदा किया है। 20 साल से लापता हुए अपने जिगर के टुकड़े से बिछुडऩे के बाद सदमे में जी रही जिस मां की आंखें पूरी तरह से पथरा चुकी थी, उसके लिए फेसबुक ऐसा जरिया बना जिसने सालों से बिछुड़े लाल को परिजनों से मिलवा दिया। दो दशक से जिस मां की आंखों के आंसू भी सूख चुके थे, उसी पुत्र को 20 साल बाद अपने सामने खड़ा देकर वो मां फफक कर रो पड़ी। 16 साल की उम्र में लापता होने के बाद अपने परिवार से जुदा हुआ सिसाय गांव निवासी अनिल कुमार अब 36 साल की उम्र में अपने परिजनों व मित्रों के साथ समय व्यतीत कर बचपन की यादें ताजा करने में व्यस्त हैं, वहीं 20 साल बाद मिले अनिल कुमार को देखने के लिए ग्रामीण भी उत्साहित हैं और पिछले तीन दिनों से अनिल कुमार के घर उससे मिलने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। सिसाय गांव निवासी सुनील कुमार ने बताया कि 20 साल पहले वर्ष 1998 में उसका बड़ा भाई अनिल कुमार महम के निकट भराण गांव में अपने मामा के यहां रहता था और वहीं से एक दिन लापता हो गया। अनिल के परिजनों ने कई महीनों तक अपने स्तर पर व पुलिस की मदद से उसकी खूब तलाश की लेकिन उसका कहीं पता नहीं चलने पर थक-हार कर वो घर बैठ गए।
सुनील कुमार ने बताया कि 20 सालों से मुम्बई में रह रहे अनिल कुमार ने एक दिन अपनी फेसबुक आइडी से सिसाय गांव के एक व्यक्ति भिवानी पुलिस में तैनात विजेंद्र का नंबर ढूंढ निकाला और उससे बात की जिस पर विजेंद्र ने कहा कि उसने कई साल पहले गांव छोड़ दिया है लेकिन विजेंद्र ने युवा जाट सम्मेलन नामक एक फेसबुक आइडी से सिसाय गांव के एक युवक संदीप का नंबर प्राप्त कर अनिल कुमार को दे दिया। इसके बाद अनिल कुमार व संदीप के बीच बातचीत कर सिलसिला शुरू हुआ और अनिल ने संदीप को 20 साल पहले गांव छोड़कर मुम्बई तक पहुंचने की सारी बातें बताई। संदीप ने गांव में कई जगह पूछ कर पता किया कि 20 साल पहले अनिल नाम का युवक किस घर से लापता हुआ था। धीरे-धीरे संदीप अनिल के घर तक जा पहुंचा और पूरी घटना विस्तार से बताई। अनिल के मुम्बई में सलामत होने की खबर मिलते ही परिजनों में खुशी के आंसू छलक पड़े और 20 साल पहले लापता हुए अपने पुत्र से बात कर परिजन अपने लाडले को लाने के लिए मुम्बई के लिए रवाना हो गए। तीन दिन पहले परिजन अनिल कुमार को वापिस सिसाय गांव में लेकर पहुंचे तो अनिल से मिलने के लिए उत्साहित ग्रामीणों का तांता लग गया। फिलहाल अनिल अपने परिजनों के पास बैठकर पिछले 20 सालों में उसके जीवन में हुई सभी घटनाओं को धीरे-धीरे बता रहा है। वहीं परिजन भी अपने लाडले को वापिस पाकर फेसबुक व गांव के युवक संदीप व विजेंद्र का आभार व्यक्त करते नहीं थक रहे हैं।
 
कई कंपनियों में की मजदूरी, नहीं कर पाया परिजनों से सम्पर्क 
20 सालों बाद वापिस गांव लौटे अनिल कुमार का कहना है कि महम के भराण गांव से अपने मामा के यहां से भागकर वो किसी गाड़ी में बैठा और सीधा मुम्बई चला गया। उस समय गांव में फोन की सुविधा नहीं थी जिस कारण वो अपने परिजनों से सम्पर्क नहीं कर सका। मुम्बई में उसने अपने कंपनियों में मजदूरी की और अब वो मुम्बई के बांद्रा में कपड़े पर कढ़ाई करने वाली एक फैक्टरी में काम कर रहा था। अनिल कुमार ने बताया कि उसे अपने परिजनों की बहुत याद आती थी और अब अपने परिजनों से मिलकर वो बेहद खुश है।
 
भाई की तलाश में छोटा भाई अभी तक रहा कुंवारा
अनिल कुमार के भाई सुनील कुमार ने बताया कि उन दोनों भाईयों के अलावा उसकी एक बहन भी है जो अब शादीशुदा है। अनिल कुमार ने गांव से सातवीं कक्षा पास की थी और उसके बाद वो हमें छोड़कर चला गया था। सुनील ने बताया कि उसके पिता कपूर सिंह गांव में ही खेती का काम करते हैं और माता बिमला देवी गृहिणी है तथा उसकी दादी भी अनिल को वापिस पाकर बेहद खुश है। अनिल ने 20 साल मुम्बई रहने के दौरान शादी नहीं की, वहीं उसके छोटे भाई सुनील ने भी अपने भाई के मिलने उम्मीद में अभी तक शादी करने का फैसला नहीं किया।
 
तलाशने के लिए सुनील ने चुन लिया गाड़ी चलाने का व्यवसाय 
20 साल पहले लापता हुए अपने बड़े भाई को ढूंढने के लिए छोटे भाई सुनील ने गाड़ी चलाने का व्यवसाय अपना लिया और गाड़ी पर माल लेकर देश के किसी भी शहर में जाता था, वहीं उसकी निगाहें अपने बड़े भाई को ढूंढती थी। सालों तक अनिल का कहीं पता नहीं चलने पर भी सुनील ने उम्मीद नहीं छोड़ी और अपने भाई का हुलिया बताकर वो अब भी अनेक शहरों में जाकर लोगों से पूछताछ का सिलसिला जारी रखे हुए था।

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