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सांई के जीवन से साधारण इंसान को अच्छा मनुष्य बनने में प्रेरणा मिलती है : सुमित पोंदा

December 24, 2018 06:21 PM
राजकुमार अग्रवाल

सांई के जीवन से साधारण इंसान को अच्छा मनुष्य बनने में प्रेरणा मिलती है : सुमित पोंदा
बाबा मन की मुराद को पूरा करते हुए असंभव को संभव कर देते हैं
कैथल, 24 दिसंबर (राजकुमार अग्रवाल )
सांई सच्चरित्र से हमें बाबा के जीवन के बारे में पता चलता है कि बाबा ने किस तरह लोगों के दुख दर्द एवं पीढ़ा को दूर किया। बाबा हमारी तरह एक साधारण इंसान की तरह थे लेकिन उन्होंने अपने जीवन में यहीं सिखाया कि एक बेहतर मनुष्य कैसे बना जाए। यह विचार भोपाल के विश्वविक्चयात कथा वाचक सुमित भाई पोंदा ने कैथल के सांई मंदिर में पत्रकारों से बातचीत में व्यञ्चत किए। उन्होंने सांई मंदिर में स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित पूजा पाठ में भाग लिया। यहां बातचीत में सुमित पोंदा ने कहा कि सांई बाबा की खासियत यह है कि वह हमारी तरह के कपड़े ही पहनते थे। उनके जीवन से हमें पता चलता है कि मनुष्यता को कैसे हासिल किया जा सकता है। सुमित पोंदा ने बताया कि वर्ष 1858 में बाबा दूसरी बार शिरडी में आए। यह उनका दूसरा प्रवास था। उससे पहले बाबा 8 माह शिरड़ी में रहे। साई सच्चरित्र 1910 से 1918 तक की 261 लीलाओं पर आधारित है। इसमें स्पष्टï होता है कि 1858 से 1910 की ऐसी बाबा की बहुत लीलाएं होंगी, जिन्हें रिकार्ड में नहीं किया जा सके। सांई सच्चरित्र से उनके जीवन के मुक्चय अंश के बारे में पता चल पाता है। सांई के जीवन से साधारण इंसान को अच्छा मनुष्य बनने में प्रेरणा मिलती है। सुमित पोंदा ने बताया कि 1886 में बाबा ने 72 घंटे की समाधि ली थी। महालसापति की गोद में सिर रखकर उन्होंने तीन दिन की समाधि ली थी। बाबा अपने वचन निभाते हुए वापिस शरीर में उनके प्राण लौटे और 31 वर्षों तक वह और शिरडी में रहे और उनकी लीलाओं को जानने में हमें उपलद्ब्रिध मिली। उन्होंने कहा कि बाबा सांई देने के लिए बैठे है। वह अकसर इस बात का दुख मनाते थे कि लोग उनसे नाश्वार वस्तुएं मांगते थे। बाबा उन्हें वह देना चाहते हैं जिससे वह संस्कारवान हों जो कभी नश्वर न हो। समाधि लेने से पहले बाबा ने कहा भी था कि मेरी अस्थ्यिां तुममें आशा और संचार का विश्वास करेंगी। उन्होंने अपने वचनों को आज तक निभाया है। बाबा मन की मुराद को पूरा करते हुए असंभव को संभव कर देते हैं। इस अवसर पर साई मंदिर के मुक्चय पुजारी आचार्य विकास लेखवार, पंडित राजीव शर्मा करेंगे, साई मंदिर के प्रमुख सदस्य समाजसेवी कैलाश भगत, अनिल तिवारी, नवीन मल्होत्रा, भारत खुराना , बक्चशीश गिरधर, नवीनपाल, जतिन गांधी, नीतिन गुगलानी, लाजपत गुप्ता, रामनारायण शर्मा, मनोहर विरमानी, अनिल गिरधर, डा. राकेश चावला, सुशील रहेजा, पवन भारती, कृष्ण सलूजा, सुरेन्द्र छाबड़ा, मनोज खुराना, अनिल सलूजा, महेन्द्र कामरा, जगदीश पवार, धर्मवीर भोला , मनोज आनंद, राजेश शर्मा, यशपाल, अनिल सैनी, हरिचंद जांगड़ा, सीपी अरोड़ा , मुकेश धीमान, अनीश गुप्ता, आत्म मिड्डा , प्रवीन बिंदलिश, ललित ठकराल , गौरव छाबड़ा , नीरज ढींगरा , कर्ण कुमार, अंकुश कुमार, गुरमीत सैनी और अक्षय मेहता आदि मौजूद थे।

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