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Haryana

जींद उप चुनाव-भाजपा का कांग्रेस से रहेगा मुकाबला, उप चुनाव में जाट मतदाता होंगे निर्णायक

ईश्वर धामू | January 10, 2019 11:02 PM
ईश्वर धामू
कांग्रेस द्वारा सुरजेवाला को प्रत्याशी बनाने के बाद जींद उप चुनाव का बदला गणित
 
जींद उप चुनाव-भाजपा का कांग्रेस से रहेगा मुकाबला, उप चुनाव में जाट मतदाता होंगे निर्णायक, भाजपा को गैर-जाट राजनीति और सहानुभूति लहर पर भरोसा
 
ईश्वर धामु
 
चंडीगढ।  जींद के उप चुनाव की आज गुरूवार को पहली प्रक्रिया नामांकन करने के साथ पूरी हो गई। कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला को चुनावी मैदान में उतार कर पूरे चुनावी परिदृश्य को बदल दिया। बीते कल शाम तक माना जा रहा था कि कांग्रेस कलायत से विधायक जयप्रकाश उर्फ जेपी के बेटे विकास को अपना उम्मीदवार बनायेगी। दिल्ली दरबार से भी ऐसे ही संकेत आ रहे थे। परन्तु कांग्रेस की रात को हुई दूसरी बैठक में रणदीप सुरजेवाला को नाम फाइनल कर दिया और घोषणा भी कर दी। सुरजेवाला का नाम आते ही चुनाव का गणित ही बदल गया। अब भाजपा से कृष्ण मिढ़ा, इनेलो से उमेद सिंह रेढू और जन नायक जनता पार्टी से दिज्विजय चौटाला मैदान में हैं। सभी पार्टियों ने श्रेष्ठ विकल्प को रखा है। भाजपा की टिकट के लिए करीब एक दर्जन नेता दौड़ में शामिल थे। प्रारम्भ में भाजपा पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता पर दांव खेलना चाहती थी। परन्तु बात बनती न देख कर पूर्व विधायक स्वर्गीय हरिचंद मिढ़ा के बेटे कृष्ण मिढ़ा को ही मैदान में उतारा। अपने पिता की मौत के बाद कृष्ण मिढ़ा दो महीने पहले ही इनेलो छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए थे। उनको टिकट दिए जाने पर भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपना एतराज भी दर्ज किया था। परन्तु सभी एतराजों को दरकिनार कर मिढ़ा को ही पार्टी ने अपना प्रत्याशी बनाया। इनेलो के पास कोई बड़ा चेहरा न होने के कारण अभय चौटाला के बेटे को प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चाएं चली। परन्तु आखिर में उमेद सिंह रेढू को अपना प्रत्याशी बना दिया। हालांकि उमेद सिंह ने अपना परचा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दााखिल किया था। नव गठित जन नायक जनता पार्टी ने इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिज्विजय चौटाला को अपना प्रत्याशी बना दिया। पार्टी और प्रत्याशी दोनों के लिए यह पहला चुनाव है। करीब एक लाख 70 हजार वोटों वाले जींद विधानसभा क्षेत्र में 30 साल तक पंजाबी और वैश्य विधायक रहे हैं। फिर भी 50 हजार से अधिक जाट मतदाता यंहा निर्णायक भूमिका निभाते हैं। भाजपा ने गैर-जाट प्रत्याशी को इसी सैमीकरण को लेकर अपना प्रत्याशी बनाया। क्योकि पांच नगर निगम के चुनाव में जो सैमीकरण बने और पार्टी ने अपनी जीत दर्ज की, अब भाजपा वहीं फार्मूला आजमा रही है। लेकिन सामने तीन बड़ी पार्टियों के प्रत्याशी जाट होने से यंहा नगर निगम चुनाव का फार्मूला सही नहीं बैठता लग रहा है। भाजपा के कृष्ण मिढ़ा को सहानुभूति लहर का भी लाभ मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। लेकिन सुरजेवाला के मैदान में आ जाने के बाद अब भाजपा का सीधा मुकाबला कांग्रेस से बन गया है। अब राजनैतिक रूप से देखा जाए तो जींद उप चुनाव की हार-जीत हर पार्टी के लिए बड़ी मायने रखती है। क्योकि अभी तीन महीने बाद ही लोकसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में जो जींद उप चुनाव के परिणामों का असर लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा।
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