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निजी शिक्षा माफिया ने शिक्षा को बनाया व्यवसायिक वेश्यालय- हुड्डा

February 10, 2019 02:05 PM

निजी शिक्षा माफिया ने शिक्षा को बनाया व्यवसायिक वेश्यालय- हुड्डा
संविधान की धज्जियां उड़ा रहा है निजाम !
नेताओं के स्कूल डॉक्टर सुभाष चंद्रा ,गौरव संपत सिंह,( कांग्रेस )दिनेश कौशिक (निर्दलीय)केवी सिंह अमित,( कांग्रेस) गणेशीलाल( भाजपा )भारत भूषण मिढा,(भाजपा) कैप्टन अभिमन्यू (भाजपा) सुभाष बराला (भाजपा)

कुलदीप खंडेलवाल
अपने लिए तो जमाना जीता है मजा तो जब है जो समाज व देश के लिए जिए समाज के लिए जीने वाले बिरले ही मिलेंगे ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी जिन्होंने समाज का अहम मुद्दा जो गरीब व्यक्ति के लिए संजीवनी से कम नहीं था। जिसमें उनके बच्चों का भविष्य संवारकर उनके परिवार के सपनों को पंख दिए दिन रात एक करके शिक्षा माफिया और सरकार से लड़कर निजी स्कूलों में 25% निशुल्क शिक्षा का प्रवाधान 134ए के तहत करवाया वह एक अलग बात है कि सरकार की चतुराई के कारण यह आज 10% बच गया है। शिक्षा निशुल्क के साथ-साथ अन्य विषयों पर भी काम करने वाले दो जमा पांच मुद्दा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्यवीर हुड्डा के साथ विश्वप्रेम समाचार पत्र की बातचीत के कुछ अंशः
खंडेलवाल-सत्यवीर जी,आप जो गरीब परिवारों के लिए जो लड़ाई लड़कर उनका हक दिलवाया उनके लिए बधाई के पात्र हैं?
सत्यवीर-गरीब परिवारों के बच्चों को आईएएस, आईपीएस और एचसीएस बनते देखा है।पर आज के समय में वह सब टूटता नजर आ रहा था ।शिक्षा माफिया दिन-प्रतिदिन सक्रिय होता जा रहा था। सरकार उनका साथ दे रही थी तब मैंने अपने मन ही मन विचार बनाया और साथ ही गरीबों की दुआएं फली जिसमें हम कुछ हद तक विजय हुए ।
खंडेलवाल-आपने ऊपर जिक्र किया कि सरकार भी शिक्षा माफिया का साथ दे रही है थी वह कैसे ?
सत्यवीर-जब अप्रैल 2015 में माननीय हाईकोर्ट ने 134ए के तहत 25% निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा के हक में फैसला सुनाया तो हरियाणा सरकार ने निजी स्कूलों के साथ मिलकर माननीय सुप्रीम कोर्ट में अपील डलवाई जिससे आप खुद सरकार का रुख समझ सकते हैं।माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट का फैसला सुरक्षित रखा और खूब खरी-खोटी निजी स्कूलों की सुनाई की शिक्षा एक उत्कृष्ट कार्य है पर आप लोगों ने इसका धंधा बना दिया है ।हर दुकानदारी अंदर चलाऐ हुए है ।वर्दी किताब और स्टेशनरी का सामान बेचने लगे हैं 500रुपए प्राइमरी में पर कक्षा आठवीं में ₹800 प्रति बच्चा से ऊपर लेते हो और माननीय हाईकोर्ट के आदेश की 1 अप्रैल से आए हैं कि सरकारी स्कूल की दर के अनुसार फीस लेंगे ऐसा जिला शिक्षा अधिकारी के पास आदेश आए हुए हैं। खंडेलवाल-संविधान ने हमें शिक्षा का अधिकार दिया हुआ है तो उसमें जो 134ए में जब कंडीशन 55% मेरिट की लगाई है यह हमारे संविधान का अपमान और जनता के हाथों पर तलवार तो नहीं ?
सत्यवीर-सरकार साहब पहले वाली हो या फिर अब वाली दोनों की नियत में 134 ए को लेकर खोट है। पहले जब 25% पर सुप्रीम कोर्ट ने सहमति दे दी थी जिन्होंने पहले तो 10% किए इसके बाद मेरिट वाला चक्कर डाल दिया और फिर भी स्कूल वाले रोने लगे हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक विधेयक पास किया था कि सरकारी स्कूल के शिक्षकों के बच्चों की शिक्षा के लिए ₹15000 बता मिलेगा ओर जो भत्ता दिया जाता है। वह निजी स्कूल की फीस के हिसाब से दिया जाता है। अब सरकारी शिक्षक के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने का प्रोत्साहन मिलेगा तो निजी स्कूल प्रणाली तो फले-फूलेगी ही।
खंडेलवाल-सरकार क्यों नहीं 134 पर अपनी मंशा ठीक दिखाती है उनका क्या कुछ लालच है सत्यवीर जी?
सत्यवीर-सरकार को जो चला रहे हैं उनके अपने स्कूल हैं जिस कारण से उनकी मंशा में खोट है। जो सरकार में बैठे हैं उनके अपने बड़े स्तर पर स्कूल में दाखिला फीस बहुत ज्यादा है कैप्टन अभिमन्यु को ही देख लीजिए रोहतक और जींद के अलावा कितने और शहरों में उनकी संस्था के स्कूल हैं ।
खंडेलवाल-जब स्कूल मान्यता के फार्म भरता है तो उसमें साफ शब्दों में विभाग के आदेश मानने और गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने पर हां करते हैं। फिर चिल्लाते हैं ।हमें घाटा हो रहा है ।जब वह मान्यता ले रहे थे तब लिखा हुआ नजर नहीं आया। जब इंसान को पता है कुएं में गिरने से मौत होगी और कूदता है तो उसका अपना कसूर है ।तभी मना कर दें की हम नही निशुल्क पढाऐगें?
सत्यवीर-खंडेलवाल जी,बहुत बढ़िया प्रश्न किया ।स्कूल कोई व्यवसाय नहीं है पहले के जमाने में तो स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता था और यह तो नॉलोस नो प्रोफिक्ट वाली बात भीलिखी हुई है।जो स्कूल संचालक से 134 पर बच्चों को दाखिले पर घाटे की बात करता है मैं तो यह कहता हूं कि इस फार्म के अनुसार बात ना मानने पर ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द कर देनी चाहिए।नियम 134 के तहत पढ़ाने वाले बच्चों के रुपए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आ चुके हैं वह ड्रामा कर रहे हैं ।
खंडेलवाल-निजी स्कूल सरकार की बात नहीं मानते फिर भी जिस पार्टी की सरकार बनती है वही शिक्षा प्रकोष्ठ बनाती है इस पर आपकी प्रतिक्रिया ?
सत्यवीर-शिक्षा प्रकोष्ठ में जिला स्तर पर संयोजक बनाए हुए हैं उन संयोजकों के स्कूल में व्यापक स्तर पर कमियां के साथ दाखिला और फीस के साथ लूट मची होती है ।यह कहे की सबसे बड़ा शिक्षा माफिया उस जिला स्तर का संयोजक ही अधिकतर मिलता है। अब उनको विभाग कुछ कह नहीं सकता क्योंकि वह पार्टी के पदाधिकारी हैं। जनता को इन पार्टियों का खेल समझना होगा और जागरूक होना होगा तभी जाकर अभिभावक इस से बच पाएंगे ।
खंडेलवाल-क्या आज तक किसी भी पक्ष,विपक्ष या निर्दलीय विधायक ने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया हो ?
सत्यवीर-अपने पैर पर कभी भी किसी को कुल्हाडी मारते हुए देखा है तो यह क्यों मारेंगे पुडंरी से निर्दलीय विधायक दिनेश कैशिक का अपना निजी स्कूल है। गौरव संपत सिंह (कांग्रेस) ,के वी सिंह अमित (कांग्रेस), गणेशीलाल( भाजपा ),भारत भूषण मीढा (भाजपा) सुभाष बराला ओर डॉक्टर सुभाष चंद्रा के अपने स्कूल हैं क्या जरूरत है इन्हे प्रश्न करने की। ठीक इसी प्रकार और भी विधायक हैं जिनको अपने या फिर उनके रिश्तेदारों के स्कूल हैं। आज तक किसी भी विधायक ने मुद्दा नहीं उठाया है ।
खंडेलवाल-134 के नियम व इसकी पालना न करने वालों पर कुछ कार्यवाही हो सकती है ?
सत्यवीर -134 नियमित जिन बच्चों की मेरिट है उनको दाखिला मिलता है जिसमें अभिभावक को कोई फंड देने की जरूरत नहीं है अगर वह बच्चा स्कूल के वाहन का इस्तेमाल करेगा उसका खर्चा देना पड़ेगा अगर कोई स्कूल 134ए के बच्चों से किसी भी प्रकार की प्रताड़ना देता है तो उसकी शिकायत संबंधित अधिकारी से करें यदि वहां भी सुनवाई नहीं होती है तो फिर आपका और हमारा सहारा ले सकते हैं।

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