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मनोवैज्ञानिक परामर्श की सहायता से इंसान के जीवन में बड़े से बड़े सकारात्मक परिवर्तन सम्भव है -अनिल मलिक

February 11, 2019 06:29 PM
मनोवैज्ञानिक परामर्श की सहायता से इंसान के जीवन में बड़े से बड़े सकारात्मक परिवर्तन सम्भव है -अनिल मलिक
नरवाना, 11 फरवरी (नरेन्द्र जेठी)  मनोवैज्ञानिक परामर्श की सहायता से इंसान के जीवन में बड़े से बड़े सकारात्मक परिवर्तन सम्भव है और ऐसी व्यवस्था बाल्यकाल से ही माता-पिता अपने जीवन अनुभव से बच्चों को सीख देने में कर सकते हैं। हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की महत्वाकांक्षी परियोजना बाल सलाह, परामर्श एवं कल्याण केन्द्रों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य यह है कि बच्चों की विकास की उम्र में विशेष तौर से किशोरावस्था के दौरान उन्हें बातचीत और खेल के माध्यम से उम्र से पहले परिपक्वता के दौर में जब मनोभाव पैदा होता है कि अब वह बड़े होने लगे हैं, उन्हें अपनी भी पहचान चाहिए। माता-पिता उनकी जरूरतों को समझें और अब हर काम करने में वह सक्षम हैं किशोर मन ऐसी सोच रखता है क्योंकि किशोरावस्था संघर्ष तनाव तथा विरोध की अवस्था भी कहलाती है इस दौरान शारीरिक व मानसिक परिवर्तन एकदम उभरकर सामने आते हैं। उलझनों को दूर करने के लिए राज्य परिषद द्वारा हरियाणा भर के किशोरावस्था के बच्चों को स्कूली स्तर पर पहुंचकर लाभ पहुंचाने हेतु राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है राज्य परिषद द्वारा। इसी कड़ी में जिला जीन्द के उचाना उपमण्डल के शिवानिया पब्लिक स्कूल के बच्चों को लाभ देने हेतु हरियाणा राज्य का 39वां केन्द्र स्थापित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल प्राचार्या प्रमिला मलिक द्वारा की गई, उनके साथ स्कूल निदेशक नफे सिंह खटकड़, हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के आजीवन सदस्यों नीरज कुमार, जसवीर चहल, विमल राय, अमरजीत सिंह हिमानी  व अंकित देसवाल के साथ-साथ विशेष तौर से चाइल्ड लाइन संयोजिका सन्तोष देवी, बाल भवन नरवाना से नरेन्द्र कुमार भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर शिवानिया पब्लिक स्कूल के किशोरावस्था के बच्चों, उनके अभिभावकों व् शिक्षकों को बाल सुरक्षा एवं संरक्षण में मनोवैज्ञानिक परामर्श सहायक विषय पर आयोजित सेमिनार में सम्बोन्धित करते हुए राज्य नोडल अधिकारी अनिल मलिक ने कहा कि हमें मिलजुल कर बच्चों को पाठयक्रम के साथ-साथ व्यवहारिक जीवन से सम्बन्धित शिक्षा देनी चाहिए। बच्चों में आत्मसंयम, स्वाबलंबन, आज्ञाकारिता, अनुशासन, विनयशीलता आदि गुणों को उत्पन्न करने के लिए सीखाना चाहिए। बच्चों को प्रेम व सहानुभूति से पढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। विशेष तौर से किशोरावस्था में कठोर दण्ड से अक्सर बच्चे विषय-विशेष में अरुचि विकसित करने लगते हैं, अच्छे-अच्छे सामूहिक खेलों के नमूने से सीखाने का प्रयास सफल रहता है। बच्चों को घर-परिवार और शिक्षण संस्थानों में तकनीक विज्ञान के प्रभाव और दुष्प्रभाव को सही तरीके से बताने के लिए अभिभावकों और शिक्षकों को तरीके तैयार करने चाहिए। उन्हें चाहिए कि बच्चे अंधविश्वास, दूषित प्रथाओं एवं छल-कपट की बातों से दूर रहे। माता-पिता का मित्रवत व्यवहार समय-समय पर बच्चों के किशोर मन में संघर्षपूर्ण परिस्थितियों व हमसमूह के दोस्तों के साथ तादात्म्य स्थापित करने की प्रवृत्ति को भी जन्म देता हैं। ऐसे में कौन अच्छा है, कौन बुरा है, कैसी सीख मिल रही है, माता-पिता के लिए यह जानकारी रखना आवश्यक है। इसी सोच से राज्य बाल कल्याण परिषद स्कूली स्तर पर बाल सलाह, परामर्श व् कल्याण केन्द्र की स्थापना कर रही है।

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