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राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों का आह्वान किया कि सभी किसान प्रकृति से जुड़े और प्राकृतिक खेती को अपनाएं

March 04, 2019 07:08 PM
राजकुमार अग्रवाल
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों का आह्वान किया कि सभी किसान प्रकृति से जुड़े और प्राकृतिक खेती को अपनाएं
 
राजौंद, 4 मार्च ( राजकुमार अग्रवाल  )
 
हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने किसानों का आह्वान किया कि सभी किसान प्रकृति से जुड़े और प्राकृतिक खेती को अपनाएं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी, पर्यावरण शुद्ध होगा, जल संरक्षित होगा, गाय का संरक्षण होगा, हमारा स्वास्थ्य अच्छा होगा तथा किसान की आमदनी दोगुणा होगी। किसान जहर मुक्त खाद्यान्न उत्पन्न करें तथा फैमिली किसान बनें। गुरूकुल कुरूक्षेत्र में कृषि विज्ञान केंद्र का निर्माण किया गया है, जहां पर हर रोज 100 किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देने की सुविधा होगी।
 


        महामहिम राज्यपाल आचार्य देवव्रत सेरधा गांव स्थित सामान्य चौपाल चौक में आयोजित जीरो बजट प्राकृतिक खेती एवं नशा मुक्ति अभियान कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि उपस्थिगण को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में 40 लाख किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया है। आंध्र प्रदेश में 5 लाख किसान तथा हिमाचल प्रदेश में हजारों किसान आज प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। भारतीय नस्ल की एक देशी गाय से 30 एकड़ की प्राकृतिक खेती कर सकता है।
 
 
 
 
गाय को वास्तव में गऊमाता इसलिए कहा जाता है कि यह गुणों का भंडार है तथा हमें गाय से बहुत फायदा मिलता है। उन्होंने किसानों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि लगभग 30 वर्ष पूर्व भूमिगत जल स्तर ऊंचा था, जो आज निरंतर नीचे जा रहा है। हर वर्ष भूमिगत जल स्तर में 4 फुट की गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज हम रासायनिक खादों व कीटनाशकों की मात्रा बढ़ा रहे हैं और हमारा उत्पादन लगातार कम होता जा रहा है। भूमि भी बंजर होने की कगार पर है। अनेक गंभीर बीमारियों फैली हुई हैं, जो केवल रासायनिक खादों व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग का परिणाम है।
 


        उन्होंने बताया किएक देसी गाय से किसान 30 एकड़ भूमि में शून्य लागत प्राकृतिक खेती करके अपनी आमदनी को बढ़ाने के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य को भी सही रख सकता है। उन्होंने कहा कि गुरूकुल कुरूक्षेत्र द्वारा गाय के गोबर व गो-मूत्र से जीवामृत व घनजीवामृत रसायन तैयार किए जाते हैं, जिनके प्रयोग से फसलों में कोई रासायनिक खाद या कीटनाशक डालने की आवश्यकता नही होती।
 
 
 
उन्होंने यह रसायन तैयार करने की विधि के संदर्भ में कहा कि प्लास्टिक के 200 लीटर के ड्रम में 180-185 लीटर पानी भरकर इसमें देसी गाय का 8 से 10 किलोग्राम गोबर व इतनी ही मात्रा में गो-मूत्र, डेढ़ से 2 किलोग्राम गुड़ व डेढ़ से 2 किलोग्राम किसी भी दाल का बेसन तथा बड़े पेड़ के नीचे से एक मुट्ठी मिट्टी लेकर इनका घोल तैयार करें। इस ड्राम को छाया में रखें तथा चार दिन सुबह-शाम केवल 5-5 मिनट इसे घड़ी की सुई की दिशा में लकड़ी के डंडे से घुमाएं। ऐसा करने से इस घोल में जीवाणुओं का भंडार तैयार होगा। इस घोल को फसल में पानी देते समय पानी के नाके में छोड़ दें, जिससे सारे खेत में यह घोल फैल जाए। इससे खेती में चमत्कार होगा। इस प्रकार हम एक देसी गाय से एक माह में 30 एकड़ भूमि के लिए ऐसा घोल तैयार कर सकेंगे। इसके प्रयोग से भूमि में मित्र कीटों की संख्या बढ़ेगी व मित्र कीट गाय के गोबर की गंध से भूमि के ऊपर आकर अपना कार्य कर सकेंगे।
 
 


        उन्होंने कहा कि केंचुआ किसान का सबसे बड़ा मित्र है। रासायनिक खाद के प्रयोग से यह केंचुआ भूमि में 15 फुट नीचे रह रहा है। एक केंचुआ अपने जीवन काल में 50 हजार अंडे / बच्चे पैदा करता है। भारतीय केंचुआ मिट्टी खाता है तथा भूमि में 12 से 15 फुट तक छेद बनाता है। इन छेदों से आक्सीजन भूमि में जाती है, जिससे वर्षा का जल भूमि में चला जाता है और भूमिगत जल स्तर बढ़ता है। केंचुआ अकाल व बाढ़ को भी रोकने में सहायक है।
 
 
 
हिसार व लुधियाना के कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अनुसंधान के अनुसार हर वर्ष भूमिगत जल का स्तर 4 फुट नीचे जा रहा है, यदि ऐसा आगे भी जारी रहा तो भविष्य में हमें पीने का पानी भी उपलब्ध नही होगा। उन्होंने कहा कि कुरूक्षेत्र गुरूकुल में 200 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती की जा रही है। इस खेती से मोटे धान की 32 क्विंटल प्रति एकड़ पैदावार तथा बासमती धान की 12 क्विंटल प्रति एकड़ की पैदावार हुई है। एक एकड़ में 500 क्विंटल तक  गन्ने का उत्पादन भी हो रहा है। यह खेती अपनाने से किसान वास्तव में अपनी आमदनी को दोगुणा करने में सफल होंगे। गुरूकुल कुरूक्षेत्र में प्राकृतिक खेती का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है।
 
 


        महामहिम राज्यपाल ने कहा कि बच्चे हमारी वास्तविक पूंजी हैं, जो आज नशे की गिरफ्त में फंस चुके हैं। नशा एक बार खून में मिलने से इसकी आदत आसानी से नही छुट पाती। सभी माता-पिता अपने बच्चों पर पूरी निगरानी रखें तथा उनकी संगत के बारे में भी जरूर ध्यान दें। सभी मिलकर हर प्रकार के नशे की बीमारी को समाज से जड़ से खत्म करने के लिए इस अभियान को जन अभियान बनाएं। उन्होंने कहा कि इन नशों की शुरूआत मुस्लिम शासन काल के दौरान हुई थी। इससे पूर्व देश में देशभक्ति व कार्य के प्रति जज्बे का हर नागरिक में नशा था और हमारा देश बुलंदियों को छू रहा था ।
 


        उन्होंने कहा कि समाज में पुरूष एवं नारी को समान अधिकार मिलने चाहिए। महिलाएं घर व खेत का ज्यादा कार्य करती हैं। प्राचीन काल में देश में महिलाओं की पूजा की जाती रही है। उन्होंने कहा कि सभी पुरूष महिलाओं से सीख लेकर अपने बच्चों को हर प्रकार के नशे से दूर रखें। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत हरियाणा प्रदेश से की थी। वर्तमान में बेटियों को गर्भ में ही जन्म लेने से पूर्व कत्ल करवाया जा रहा है, जो महापाप है। बेटियां गुणों का भंडार है। शिक्षा के क्षेत्र में लगभग 80 प्रतिशत मैरिट में लड़कियां ही होती हैं। अब तो सीमा पर भी लड़कियां अपने देश की सरहदों पर रक्षा के लिए मुस्तैद खड़ी हैं। आज सभी यह संकल्प लें कि वे समाज से बेटा-बेटी के भेदभाव को समाप्त करेंगे तथा बेटियों को भी पढ़ने का पूरा अवसर देंगे। फाउंडेशन द्वारा महामहिम राज्यपाल का  पगड़ी पहनाकर नागरिक अभिनंदन किया गया तथा आचार्य देवव्रत द्वारा समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
 
 
 


        इस मौके पर पूर्व विधायक मास्टर जोगी राम, दीन बंधु फाउंडेशन के प्रधान सुरेंद्र ढुल, महामहिम राज्यपाल के एडीसी मेजर रोहन मुंशी, प्रेस सचिव जयंत शर्मा, राधा कृष्ण आर्य, राजौंद नगर पालिका की चेयरपर्सन गुड्डी राणा, सरदार गज्जन सिंह, परमवीर, बंसीलाल, वीरेंद्र छौत, नरेंद्र जुलानी खेड़ा, दिलबाग सिंह, अधिवक्ता राजेश, बलजीत ढुल, सरपंच प्रतिनिधि फूल कुमार ढुल, रामभज बालू, राजेंद्र बाखली, सुखबीर, नीरज कुंडु, नरेश ढुल, सुभाष ढांडा, ज्ञानी, धर्मपाल मलिक, रोहताश, चांदी राम, अरूण राणा, गुरनाम, राजेश बिढ़ान, बलकेश, कृष्ण सिसला, साहब सिंह, रमेश सरपंच, जगबीर चौपड़ा, दीपक कथुरिया सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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