Tuesday, March 19, 2019
BREAKING NEWS
व्हाट्स योर मोबाइल नंबर ? बता रहे है मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्,छतरपुर आरटीओ ने मिश्रा बस को किया जप्तइनेलो और आप के सपने हुए तार -तार चुनावी गठबंधन नहीं होने का भुगतना पड़ेगा बड़ा खामियाजाप्रदेश में हुड्डा ही पार्टी का बड़ा चेहरा होंगे , कांग्रेस ने हुड्डा की कप्‍तानी में बनाई हरियाणा की खास टीम 15 भृष्ट संकुल प्राचार्य पर लगे शिक्षक व शिक्षिकाओं से को परेशान करने के आरोपभारतीय पत्रकार कल्याण मंच ने मनाया होली मिलन समारोह, प्रदेश भर से शामिल हुए पत्रकार*कर्मगढ़ गांव में शहीद रमेश कुमार लाइब्रेरी का उद्घाटन शिक्षा ही सबसे बड़ा धन-रामनिवास सुरजाखेड़ा हरियाणा में 10 लोकसभा सीटों पर खिलेगा कमल-कृष्ण बेदीकाग्रेस नेत्री विद्या रानी दनोदा ने किए गांवों के दौरे ेदेश व प्रदेश में काग्रेस लहराएगी परचम-विद्या रानी दनोदा क्षमता से अधिक भंडारण पाए जाने पर राजस्व बिभाग की टीम ने की कार्यवाही

Entertainment

महिला लेखन एवं सामाजिक सरोकार पर जीवीएम में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

March 06, 2019 04:57 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

महिला लेखन एवं सामाजिक सरोकार पर जीवीएम में राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
वक्ताओं ने स्त्री संघर्ष व समय के साथ आये बदलाव पर की चर्चा


रणबीर सिंह रोहिल्ला, सोनीपत।

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक की प्रोफेसर डा. रोहिणी अग्रवाल ने पुरुष प्रधान समाज की अवधारणा पर तीखा प्रहार करते हुए पुरातन काल में महिलाओं की स्थिति पर गंभीरता से चर्चा की। स्त्री विमर्श की चर्चा करते हुए बचपन में सुनी जाने वाली कहानी सूरज और हवा का झगड़ा तथा पंचतंत्र की कहानियों का स्मरण करते हुए पितृसत्ता के षडयंत्रों को उद्घाटित किया। मीराबाई की बात करते हुए उन्होंने कहा कि उसमें प्रताडि़त कुलवधु का हाहाकार दिखाई देता है और वह प्रतिरोध का एक आख्यान रचती है।

 


डा. रोहिणी अग्रवाल जीवीएम गल्र्ज कालेज के हिंदी विभाग के संयोजन में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन दे रही थी। उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा प्रायोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय-महिला लेखन एवं सामाजिक सरोकार रहा। राष्ट्रीय संगोष्ठी के सफल आयोजन पर संस्था के प्रधान डा. ओपी परूथी व प्राचार्या डा. ज्योति जुनेजा ने आमंत्रित वक्ताओं व प्रतिभागियों का अभिनंदन किया। संगोष्ठी की संयोजक डा. रेनु भाटिया ने संगोष्ठी की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए महिला कथाकारों की उपयोगिता का भी विस्तार से वर्णन किया।

 


अंबेदकर विश्वविद्यालय दिल्ली के प्रोफेसर डा. सत्यकेतु सांकृत ने अपने संबोधन में स्त्री संघर्ष पर विस्तार से चर्चा की। प्रवासी कलाकारों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि स्त्री आज पुरुष से आगे बढ़ गई है। विशिष्ट कहानीकार डा. प्रज्ञा के अनुसार हिंदी कहानी पितृ सत्तात्मक सत्ता की दुर्गंध को हटाने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि रूदन का स्थान अब तर्क ने ले लिया है।

 

 

स्त्री शोषण का प्रतिकार करना सीखे। प्रतिकार न करना शोषण को बढ़ावा देना है। राष्ट्रीय संगोष्ठी के मंच का संचालन डा. विजय कुमार वेदालंकार ने किया। अंत में जीवीएम के हिंदी विभाग की अध्यक्ष डा. रेनु भाटिया ने सभी वक्ताओं व प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर प्राध्यापिका डा. वंदना मलिक, प्रो. रीता सचदेवा तथा पूजा आदि उपस्थित रही।

Have something to say? Post your comment

More in Entertainment

युवा बोले : जोर जबरदस्ती नही बल्कि प्यार और शालीनता का त्यौहार है होली

देवर-भाभी के रिश्तो की मिठास का प्रतीक होली,

जीवीएम में बरसे होली के रंग, छात्राओं संग शिक्षिकाएं हुई रंगों से सराबोर

कवि कुमार विश्वास ने खूब कसे नेताओं पर व्यंग

रोहतक में चल रहा था सैक्स रकेट,विदेशी युवती सहित 5 गिरफ्तार

गुमशुदा किशोरी नवजात के साथ लौटी, दुष्कर्म का केस दर्ज

13 वर्षीय किशोरी मिली 21 हफ्ते की गर्भवती ,

सोशल मीडिया से दुष्परिणाम को दिखाया प्ले और शार्ट माध्यम से डी ए वी के छात्रों ने

अग्रणी भारतीय डिजिटल वीडियो नेटवर्क, निर्वाण डिजिटल 2019 में मूल प्रोडक्शंस और ओटीटी ऐपलॉन्च करने की योजना

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अधिकारियों ने किया स्वर्णप्रस्थ म्यूजियम का दौरा