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अवतार भड़ाना न घर के रहे, न घाट के टिकट कटने से कांग्रेस में वापसी हो गई बेकार

April 14, 2019 02:05 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

अवतार भड़ाना न घर के रहे, न घाट के

टिकट कटने से कांग्रेस में वापसी हो गई बेकार

सियासी कैरियर में दूसरी बार उल्टा पड़ा पासा

कुलदीप श्योराण
फरीदाबाद। क्या यह सही है कि फरीदाबाद लोकसभा सीट पर पूर्व सांसद अवतार भड़ाना को करारा सियासी झटका लगा है?

- क्या यह सही है कि अवतार भड़ाना ने कांग्रेस में वापसी फरीदाबाद लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने के लिए की थी?

- क्या यह सही है कि अवतार भड़ाना को प्रियंका गांधी के जरिए टिकट मिलने की पूरी उम्मीद थी?

- क्या यह सही है कि टिकट कटने से अवतार भड़ाना की भारी फजीहत हुई है?

- क्या यह सही है कि भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आना अवतार भड़ाना को उल्टा पड़ गया है?

- क्या यह सही है कि भूपेंद्र हुड्डा खेमे के भारी विरोध के चलते अवतार भड़ाना को टिकट नहीं मिली?

- क्या यह सही है कि प्रियंका गांधी परिवार से ललित नागर की ज्यादा नजदीकी टिकट वितरण में डिसाइडिंग फैक्टर साबित हुई?

क्या यह सही है कि अवतार भड़ाना का सियासी कैरियर खतरे में पड़ गया है?

उपरोक्त सभी सवालों का जवाब हां में है।

फरीदाबाद लोकसभा सीट के लिए कांग्रेसी नेताओं में मची मारामारी के बीच जहां तिगांव के विधायक ललित नागर टिकट हासिल करके बाग- बाग हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व सांसद अवतार भड़ाना हिट विकेट हो गए हैं।
अवतार भड़ाना को पूरी उम्मीद थी कि टिकट उनको ही मिलेगी लेकिन पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा खेमे की मजबूत खेमेबंदी ने उनके अरमान तार-तार कर दिए और उनको सियासी चौराहे पर पटक दिया।

भड़ाना का क्या था अरमान?
उत्तर प्रदेश में भाजपा की विधायकी छोड़कर अवतार भड़ाना प्रियंका गांधी की अगुवाई में कांग्रेस मैं फरीदाबाद सीट पर लोकसभा चुनाव लड़ने के मकसद से आए थे। अवतार भड़ाना का यह आकलन था कि प्रियंका गांधी के जरिए कांग्रेस में घर वापसी करने के कारण उनको टिकट आसानी से मिल जाएगी लेकिन उनका यह दांव पूरी तरह से फेल हो गया और उनकी टिकट कट गई। सांसद बनने के चक्कर में अवतार भड़ाना विधायकी से भी हाथ धो बैठे।

पासा पड़ा क्यों उल्टा?

2014 में अवतार भड़ाना ने पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़ी थी। उसी समय से हुड्डा और भड़ाना में 36 का आंकड़ा चल रहा है। कांग्रेस में वापसी के बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के सभी नेताओं ने भड़ाना को टिकट देने का विरोध किया। उनको टिकट देने का हिमायती फरीदाबाद का एक भी कांग्रेसी नेता नहीं था। इसलिए कांग्रेस में शामिल होने और टिकट हासिल करने का उनका पासा उल्टा पड़ गया।

 

 

 

 

न घर के रहे, न घाट के!

टिकट कटने के चलते अवतार भड़ाना का सियासी कैरियर खतरे में पड़ गया है। उनके पास बेहद कम विकल्प रह गए हैं।कांग्रेस काटिकट हासिल करने के चक्कर में वह न घर के रहे हैं और नए घाट के। उन्होंने हर हाल में चुनाव लड़ने की घोषणा जरूर की है लेकिन बड़ी पार्टी के प्लेटफार्म के बगैर उनके लिए जमानत बचाने लायक वोट हासिल करना भी बहुत मुश्किल होगा।

बात यह है कि अवतार भड़ाना के लिए भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आने का सियासी फैसला पूरी तरह गलत साबित हुआ है। अवतार भड़ाना सियासी गणित लगाने में पूरी तरह से फेल रहे। उनको यह समझ नहीं आया कि फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र में इस समय पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के खेमे की तूती बोल रही है और उनके सहयोग के बिना उनको टिकट नहीं मिलेगी।
भड़ाना प्रियंका गांधी के बलबूते पर टिकट हासिल करने की तिगड़ी भिड़ाई थी लेकिन ललित नागर परिवार के प्रियंका गांधी परिवार के साथ पर गहरे संबंधों के चलते ललित नागर भड़ाना पर भारी पड़ गए जिसके चलते टिकट हासिल करने के मामले में उनके हाथ सिर्फ ठेंगा ही लगा।

 

 

 


अवतार बढ़ाना अब तक अपने हिसाब से मनचाहे सियासी खेल खेलते आए थे लेकिन इस बार उनका हिसाब किताब पूरी तरह से गड़बड़ा गया जिसके चलते उनके लिए अपना सियासी रसूख बचाना बेहद मुश्किल हो गया है।
असली बात यह है कि अवतार भड़ाना पेट वाली सांसदी के चक्कर में गोद वाली विधायकी से भी हाथ धो बैठे हैं।
।उन पर यूपी की वह कहावत पूरी तरह से लागू हो गई है कि
चौबे जी छब्बे जी बनने चले थे लेकिन दुबे जी रह गए।

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