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बरकत" गाने के माध्यम से युवाओं ने दिखाई किसान की पीड़ा

प्रदीप दलाल | July 12, 2017 06:16 PM
प्रदीप दलाल

बरकत" गाने के माध्यम से युवाओं ने दिखाई किसान की पीड़ा

बरकत गाने को यू ट्यूब पर बरकत गाने को लाखों लोगों ने देखा

युवाओं ने कहा हरियाणवी कल्चर को जिंदा करना है उनका उद्देश्य

 

कैथल(प्रदीप दलाल) पूरे विश्व के लिए अन्न पैदा वाले किसान के हाथ हमेशा खाली के खाली रह जाते हैं। धरतीपुत्र किसानों की पीड़ा से हमारे देश में हर कोई वाकिफ है, इसी पीड़ा को समझते हुए कुछ युवाओं ने इसे हरियाणवी गाने का रुप दिया है। जिसमें किसानो के जमीनी हालात को दिखाया गया है। उन्होंने इस गाने को बरकत नाम दिया है, क्योंकि किसान की जिंदगी में कभी बरकत नहीं होती। उसी बरकत के लिए वह ना जाने कितनी मेहनत करता है लेकिन उसके बाद भी सरकार की अनदेखी और प्रकृति की मार से हमेशा उसे जूझना पड़ता है और अंत में वह हारकर अपनी जिंदगी को ही खत्म कर लेता है। इसी असलियत को इन युवाओं ने एक गाने के माध्यम से प्रस्तुत किया है। बरकत गाने कि इस वीडियो को यूट्यूब पर लाखों लोग देख चुके हैं और शेयर कर चुके हैं। युवाओं ने गाने की धुन को हरियाणवी ट्रेडिशन राग में बनाया है और वीडियो को सिनेमेटिक लुक दिया है। सोशल मीडिया पर लोग युवाओं द्वारा बनाए गए गाने बरकत की खूब तारीफ कर रहे हैं। सभी युवाओं ने इस गाने के लिए खास मेहनत की थी जो युवाओं द्वारा बनाए गए वीडियो सॉन्ग में दिखाई भी देती है। इन युवाओं का यही कहना है कि वर्तमान समय में हरियाणवी गानों में अश्लीलता और फूहड़ता को परोसा जाता है लेकिन उन्होंने अपने गाने के माध्यम से कोशिश की है कि वह किसान की जमीनी हकीकत को दिखा सकें। इस गाने का निर्देशन आदित्य रोहिला ने किया है और गाने को अपनी आवाज दी है विक्रम मलिक और आदित्य रोहिला ने, गाने का यूजिक आदित्य और रविंद्र सिंह रवि ने दिया है। इसके बोल और डायरेक्शन मोहन बेताब ने की है। जबकि गाने की एडिटिंग एमपी सेगा, पंकज शाह और अमन गिल ने की है। डीओपी कहर रंधावा और भूपिंदर सिंह की है। गाने के प्रोड्यूसर दिनेश जांगड़ा और गुरमीत चौधरी हैं।

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