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आखिर क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी

सतनाली से प्रिंस लांबा की रिपोर्ट | August 14, 2017 07:46 AM
सतनाली से प्रिंस लांबा की रिपोर्ट

आखिर क्यों मनाई जाती है जन्माष्टमी
इस दिन व्रत रखने से बनते हैं बिगड़े काम और घर में रहती है खुशहाली: वास्तुशास्त्री धनंजय कौशिक
सतनाली मंडी (मुन्ना लांबा) । इस बार पूरे देश में जन्माष्टमी का त्यौहार 15 अगस्त से ठीक एक दिन पहले यानी 14 अगस्त को मनाया जाएगा। इस त्यौहार को लेकर जब जाने-माने वास्तु शास्त्री आचार्य धनंजय कौशिक सतनाली से बात की तो उन्होंने कहा कि यह त्यौहार भगवान कृष्ण के जन्म लेने की खुशी में मनाया जाता है। पुराणों की मानें तो कहा जाता है की कृष्ण भगवान ने भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अवतार लिया था। इसके बाद से ही इस दिन लोग कृष्ण जन्माष्टमी के तौर पर मानाने लगे। कृष्ण भगवान और राधा को प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस त्यौहार को देश-विदेश के लोग बहुत ही धूमधाम और पूरी आस्था के साथ मनाते हैं।
क्यों मनाया जाता है जन्माष्टमी का पर्व:
इस बारे में धनंजय कौशिक बताते हैं कि मामा कंस के अत्याचारों से परेशान होकर, उनके विनाश व बुराईयों का नाश करने के लिए भगवान कृष्ण ने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जन्म लिया था। कृष्ण भगवान का जन्म मथुरा में आधी रात को हुआ था। मथुरा भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है, इसलिए इस त्यौहार को खासकर मथुरा में बहुत ही ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक 5 हजार 243 साल पहले भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की भूमि पर हुआ था।
व्रत रखने का भी है महत्त्व:
इस बारे में शास्त्री धनंजय का कहना है कि जन्माष्टमी के दिन बहुत सारे लोग व्रत भी रखते हैं। हिन्दू धर्म में इस दिन व्रत रखने का बहुत महत्व है। इस दिन अगर आप व्रत रखते हैं तो घर में सुख-समृद्धि आएगी और शांति बनी रहेगी। पुराणों की माने तो जो व्यक्ति सब जानते हुए भी इस दिन व्रत नहीं रखता, उसका जन्म जंगल में सांप के रूप में होता है। इसके विपरीत जो इस व्रत को पूरे विधि-विधान और आस्था के साथ रखता है, उसके घर में लक्ष्मी बनी रहती है और सारे बिगड़े काम बन जाते हैं।
जन्माष्टमी के दिन व्रत के दौरान क्यों जरूरी है दान, अगर यह नहीं करेंगे तो व्रत रहेगा अधूरा:
इस बारे में वास्तुआचार्य धनंजय ने कहा कि जन्माष्टमी व्रत के दौरान सुबह उठकर माता-पिता, सास-ससुर का आशीर्वाद और गाय को अपने वजन के अनुसार हरा चारा, गुड़ एंव चने की दाल इत्यादि खिलानी चाहिए तथा जरूरतमंदों व भूखों को भोजन कराना चाहिए। इससे भूखों का पेट भरेगा तो वे आपको आशीष देंगे और भगवान श्री कृष्ण भी आपसे बहुत प्रसन्न होंगे।

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