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Literature

एक पर्व के लिए दो-दो तिथियां भविष्य नहीं आएगी सामने

January 31, 2018 05:04 PM
अटल हिन्द ब्यूरो

एक पर्व के लिए दो-दो तिथियां भविष्य नहीं आएगी सामने
संस्कृत विद्वानों ने बनाया एक पंचाग
प्रचार -प्रसार के लिए सभी शहरों में ईकाई होगी गठित : शास्त्री
जींद(सन्नी मग्गू):एक पर्व को दो तिथियों में मनाने की खामिया भविष्य में सामने ना आएं। इसके लिए संस्कृत भारती संगठन ईकाई व पुजारी मंडल ने बुधवार को सोमनाथ संस्कृत महाविद्यालय जींद में एक बैठक कर चिंतन मनन किया। फूल कुमार शास्त्री और सत्यनारायण शास्त्री की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में निर्णय लिया गया कि भविष्य में कोई भी त्यौहार दो-दो तिथियों में नहीं मनाएं जाएंगे। इसके लिए एक पंचाग तैयार किया गया, जिस पर सभी ने स्वीकृति की मोहर लगाई। बैठक को संबोधित करते हुए आचार्य देवीदयाल शास्त्री ने कहा कि संस्कृत संस्कारों की भाषा है। यह सभी भाषाओं की जननी है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विभाग प्रमुख सुशील शास्त्री ने कहा कि संस्कृत को जीवित रखने के लिए इसे जनभाषा के रूप में अपनाना होगा। संस्कृत भाषा के विकास के बिना संस्कारित समाज का निर्माण नहीं किया जा सकता। इस मौके पर संस्कृत भारती की जिला ईकाई का सर्वसम्मति से गठन किया गया। इसमें सत्यानारायण शास्त्री को अध्यक्ष, राजेंद्र शास्त्री तथा गौरव शास्त्री को उपाध्यक्ष, रमेश आचार्य सचिव, मनोज शास्त्री, कुरडिय़ा राम शास्त्री को सहसचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसमें फूल कुमार शास्त्री, वेदपाल शास्त्री, देवीदयाल शास्त्री को मार्गदर्शक की जिम्मेदारी देने के साथ-साथ सुशील शास्त्री, शिवकुमार शास्त्री, दिनेश शास्त्री, योगराज शास्त्री, धर्मपाल शास्त्री, श्रीभगवान शास्त्री, शुभम शास्त्री, जगदीश शास्त्री को कार्यकारिणी सदस्य के तौर पर शामिल किया गया। इस मौके पर उपस्थित ज्योतषियों और विद्वानों ने कहा कि भविष्य में ऐसी कोई भी भ्रांति सामने नहीं आएगी, जिसमें एक पर्व के लिए दो-दो तिथियां निर्धारित हो। इसके अलावा संस्कृत को जनभाषा बनाने के लिए सभी शहरों में ईकाई का गठन किया जाएगा।

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