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क्या भ्रष्टाचार एक चुनावी जुमला है..............

राकेश शर्मा | April 10, 2018 12:36 PM
राकेश शर्मा

क्या भ्रष्टाचार एक चुनावी जुमला है..............
कुरूक्षेत्रः- राकेश शर्मा
सरकारे आती है ओर चली जाती है ओर सबका मुददा एक जैसा ही होता है ओर वह है देश प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त करने का ओर नेता चाहे भ्रष्ट ही क्यों ना हो वो भी पूरी जोर शोर से जनता केे बीच इस मुददे काे भुनाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते है ओर शायद जनता के दिलों में ये बात कही ना कही घर कर जाती है कि शायद ये सरकार अब की बार भ्रष्टचारीयों या फिर भ्रष्टचार को खत्म करके ही दम लेगी ? लेकिन जब कोई भ्रष्टाचार जनता की पससंदीदा सरकार के राज में होता है तो जनता का मन टुट जाता है ओर कही ना कही उसकों भी लगने लगता है कि भ्रष्टाचार की जडे आज इतनी फैल गई है कि जो नेता बडे बडे मचों से भ्रष्टाचार काे उखाड फेकने की बातें करते है वह उतना आसान नही हैै जितना जनता काे दिखाया जा रहा है शायद नेताआें काे नही पता या पता हाेने के बाबजूद भी वाे इसे समझना चाहते कि धरातल पर आज आमजन इस भ्रष्टाचार रूपी कोढ़ से केे
कितना त्रस्त ओर दुखी है।
आज देश प्रदेश में ना जाने कितने मामले हर रोज रिशवत ओर भ्रष्ट के हर रोज मीडिया में छाये रहते है और हमसब तक परोसे जाते है लेकिन जो मामले नेताओं ओर बाबुओं के ईद गिर्द हो रहे है वो शायद कभी उजागर नही होते यदि होते भी है तो उनको दबाने के लिए सरकार का पूरा अमला जमला लग जाता है उसको सच साबित करने के लिए हाल ही के दिनों में हरियाणा की राजनीति भी इनी मुददों पर छाई हुई है ओर भ्रष्टाचार की आग से सुलग रही है विपक्ष जहां इस मुददे को बुनाने की कोई कोर कसर नही छोड रही वही पक्ष भी बीच बचाव करता हुआ नजर आ रहा है हरियाणा आज कब सुर्खिया बटोर ले कोई नही जानता पहला मामला कुछ समय पहले का जब हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के सदस्य का नाम पूरी तरह से उछला ओर दुसरा उसी विभाग में कार्यरत कर्मचारीयों द्वारा युवाओं के भविष्य की बोली लगाकर उन्हें नौकरी दिलवाने का है वैसे तो कर्मचारी चयन आयोंग को देसी भाषा में कहे तो ये विभाग है जहां से बेराजगार युवाओं के सपने पूरे होते है ओर इस विभाग पर मुख्यमंत्री तक की पूरी नजर रहती है लेकिन फिर भी इस विभाग में इतनी बडी चूक सरकार की है या फिर बाबुओं की जिन्होने हर पदों के रेट फिक्स किये हुए थे एक नजर डाले तो क्लर्क 4 से 5 लाख रूप्ये, क्लर्क जनरल 10 लाख रूप्ये, ब्रिग आपरेटर 6 लाख, टाईपिंग टेस्ट 7 लाख, कंडक्डर भर्तो 3 लाख, ओर सनेटरी इंस्पेक्टर 5 लाख रूप्ये देकर कोई भी अपनी युवा नौकरी पा सकता ह ैअब सवाल ये उठता है ये सब उस विभाग में चल रहा था जिसकी कमान मुख्यंमत्री के हाथों मे होती है ओर नजर भी अब इन नौकरीयों के नाम पर हुए घोटले से जहां प्रदेश सरकार की किरकरी हो रही है वही मुख्यमंत्री ने भी विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि यदि मै दोषी पाया गया तो कार्रवाई मुझ पर भी बनती है आज युवा से लेकर प्रदेश का हर नागरिक ये जानना चाहता है कि क्या अब भी जो सपने युवाओं के दिखाये गये थे वे सब एक चुनावी जुमला था ओर जो कुछ हो रहा है उसमे प्रदेश के नेताओं का कोई हाथ नही ये क्या ये सब बाबुआें के कारण हो रहा है यदि ये सब हो रहा था तो आलाधिकारीयों के इसकी भनक क्यों नही लगी क्या भ्रष्टाचार एक चुनावी मुददा बन कर रहा गया है ओर इसके आगे सब कुछ झुक जाता है चाहे सरकार हो या फिर प्रसाशन । क्या देश में ईमानदार लोगो या फिर आधिकारीयों की कोई जरूरत नही ओर सरकार

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