ज्योति(Jyoti’) की हिम्मत के आगे वक्त भी हार गया 

ज्योति की हिम्मत के आगे वक्त भी हार गया
15 वर्षीय ज्योति, जिंदगी बदलने का मिला प्रस्ताव

गुरुग्राम से पिता को साइकिल पर बैठकर दरभंगा पहुंचीं
15 साल की बच्ची के लिए रोजाना 100-150 किमी साइकिल चलाना आसान नहीं

नई दिल्ली (अटल हिन्द ब्यूरो )।

 

Time lost even before Jyoti’s courage
15-year-old Jyoti got a proposal to change her life

From Gurugram, father reached Darbhanga on a bicycle
Cycling 100-150 km a day is not easy for a 15-year-old girl

 

विश्व में कोरोना माहामारी के चलते भारत की जनता को बहुत कुछ सहन करना पड़ा जिसमे बच्चो से लेकर बुजुर्ग तक शामिल है वैसे तो पूरी दुनिया इस कोरोना सकंट को झेल रही है लेकिन कोरोना माहामारी के चलते कई लोगो जिंदगी में बदलाव भी आएंगे।इसी  संकट के समय को अवसर में बदलने का अप्रत्यशित मौका जब 15 वर्षीय किशोरी ज्योति को मिला को वह हैरान रह गई।

 

 

भारतीय साइकिलिंग महासंघ (सीएफआई) के निदेशक वीएन सिंह ने कोरोना वायरस के कारण राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बीच अपने पिता को साइकिल पर बैठाकर गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा पहुंची ज्योति को बड़ा प्रस्ताव दिया है। एसोसिएशन ने उन्हें ‘क्षमतावान करार देते हुए कहा कि हम ज्योति को ट्रायल का मौका देंगे और अगर वह सीएफआई के मानकों पर थोड़ी भी खरी उतरती हैं तो उन्हें विशेष ट्रेनिंग और कोचिंग मुहैया कराई जाएगी।

 

मीडिया में आई खबरों के अनुसार ज्योति लॉकडाउन में अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बिठाकर एक हजार किमी से ज्यादा की दूरी आठ दिन में तय करके गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा पहुंच गई थीं। ज्योति ने रोजाना 100 से 150 किमी साइकिल चलाई। वीएन सिंह ने कहा कि महासंघ हमेशा प्रतिभावान खिलाड़ियों की तलाश में रहता है और अगर ज्योति में क्षमता है तो उसकी पूरी मदद की जाएगी।

 

 

ज्योति की इस कार्यशैली को आज पूरी दुनिया सराह रही है लेकिन एक समय वह भी था जब ज्योति और उसके बीमार पिता को यह चिंता सत्ता रही  थी की वो अब जिन्दा भी रह पाएंगे या नहीं ,कभी अपने घर पहुंच भी पाएंगे या नहीं लेकिन वक्त के आगे किसी की नहीं चलती गुरुग्राम में भूखो मरने से अच्छा तो यही उनकी समझ में आया क्यों न अपने घर जाया जाये और वही हुआ ज्योति की हिम्मत के आगे वक्त भी हार गया।

 

 

यही से ज्योति की किस्मत बदलने का सिलसिला शुरू हुआ जब वीएन सिंह ने स्वीकार किया कि 14-15 साल की बच्ची के लिए रोजाना 100-150 किमी साइकिल चलाना आसान नहीं है। मैं मीडिया में आई खबरों के आधार पर ही बोल रहा हूं लेकिन अगर उन्होंने सचमुच में ऐसा किया है तो वह काफी सक्षम हैं। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने अपने पिता को भी साइकिल पर बैठा रखा था और उसके पास छोटा-मोटा सामना भी रहा होगा इसलिए जो किया वह काबिलेतारीफ है। खेल की जरूरत के अनुसार वह सक्षम हैं या नहीं, इसका फैसला हम टेस्ट के बाद ही कर पाएंगे। उस टेस्ट में अगर हमारे मापदंड पर वह थोड़ी सी भी खरी उतरती हैं तो हम उसकी पूरी सहायता करेंगे और विशेष कोचिंग दी जाएगी।

 

वीएन सिंह ने कहा, ‘हम तो ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों की तलाश में लगे रहते हैं और अगर लड़की में इस तरह की क्षमता है तो हम उसे जरूर मौका देंगे। आगे उन्हें ट्रेनिंग और कोचिंग शिविर में डाल सकते हैं। उससे पहले हालांकि हम उनको परखेंगे। अगर वह हमारे मापदंड पर खरी उतरती हैं तो उनकी पूरी सहायता करेंगे। विदेशों से आयात की गई साइकिल पर उन्हें ट्रेनिंग कराएंगे।

 

 

लॉकडाउन के बाद ज्योति को ट्रायल का मौका देने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे बात की थी और उन्हें बता दिया है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद जब भी मौका मिलेगा वह दिल्ली आएं और उनका इंदिरा गांधी स्टेडियम में हम उनका छोटा सा टेस्ट लेंगे।

 

 

हमारे पास वाटबाइक होती है जो स्थिर बाइक है। इस पर बच्चे को बैठाकर चार-पांच मिनट का टेस्ट किया जाता है। इससे पता चल जाता है कि खिलाड़ी और उसके पैरों में कितनी क्षमता है। वह अगर इतनी दूर साइकिल चलाकर गई है तो निश्चित तौर पर उनमें क्षमता है।

ज्योति के पिता गुरुग्राम में रिक्शा चलाते थे और उनके दुर्घटना का शिकार होने के बाद वह अपनी मां और जीजा के साथ गुरुग्राम आई थी और फिर पिता की देखभाल के लिए वहीं रुक गईं। इसी बीच कोविड-19 के कारण लॉकडाउन की घोषणा हो गई और ज्योति के पिता का काम ठप्प पड़ गया। ऐसे में ज्योति ने पिता के साथ साइकिल पर वापस गांव का सफर तय करने का फैसला किया।

 

 

अपने घर में ही क्वॉरंटीन का समय काट रही ज्योति ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिलता है तो वह ट्रायल के लिए तैयार हैं। पंद्रह साल की ज्योति ने बताया, ‘साइकिलिंग महासंघ वालों का मेरे पास फोन आया था और उन्होंने ट्रायल के बारे में बताया। अभी मैं बहुत थकी हुई हूं लेकिन लॉकडाउन के बाद अगर मुझे मौका मिलेगा तो मैं जरूर ट्रायल में हिस्सा लेना चाहूंगी।

 

अगर मैं सफल रहती हूं तो मैं भी साइकिलिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं। तीन बहन और दो भाइयों के बीच दूसरे नंबर की संतान ज्योति ने कहा कि वह पढ़ाई छोड़ चुकी हैं लेकिन अगर मौका मिलता है तो दोबारा पढ़ाई करना चाहती हैं।

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