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अपने ही बिछाए “जाल” में “फंसे” भूपेंद्र हुड्डा,हाईकमान से विधायकों का ख्याल रखने की लगाई गुहार

अपने ही बिछाए “जाल” में “फंसे” हुड्डा
पार्टी संगठन की जल्द होने वाली घोषणा में विरोधियों के भारी पड़ने के आसार से भूपेंद्र हुड्डा खेमे में मची खलबली
संगठन को लेकर हाईकमान द्वारा भेजी गई टीमों का बहिष्कार करना पड़ रहा भारी
पहले भूपेंद्र हुड्डा के आदेश पर बैठकों में शामिल नहीं हुए, अब हाईकमान से विधायकों का ख्याल रखने की लगाई गुहार
पार्टी संगठन में समर्थकों को जगह नहीं मिलने के कारण भूपेंद्र हुड्डा की भारी फजीहत होने का खतरा

अटल हिन्द/राजकुमार अग्रवाल –

 नई दिल्ली। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस में मचे घमासान के बीच पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा “खुद” के बिछाए “जाल” में “फंस” गए हैं। अपने पक्ष में फैसला नहीं होने के कारण उन्हें 4 दिन में दूसरी बार समर्थक विधायकों को इकट्ठा करके हाईकमान के पास “गुहार” लगाने को “मजबूर” होना पड़ा है।
4 दिन पहले जहां हुड्डा समर्थकों ने प्रदेश प्रभारी विवेक बंसल से मिलकर प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा को हटाने की मांग की थी वहीं आज 22 विधायकों ने पार्टी के राष्ट्रीय संगठन सचिव केसी वेणुगोपाल से मिलकर पार्टी के संगठन की होने वाली घोषणा में विधायकों का ख्याल रखने की गुहार लगाई।


प्रभारी विवेक बंसल से मिलते समय हुड्डा समर्थक विधायकों का अंदाज “प्रेशर” डालने का था लेकिन आज विधायकों के “सुर” पूरी तरह से बदले हुए नजर आए और उन्होंने पार्टी के संगठन में विधायकों का ख्याल रखने की प्रार्थना की।
कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के संगठन की घोषणा अगले कुछ ही दिनों में होने के प्रबल आसार हैं। भूपेंद्र हुड्डा ने पहले संगठन के विस्तार की घोषणा को रोकने के लिए पूरी कोशिश की लेकिन पार्टी हाईकमान द्वारा इस बारे में कोई आश्वासन नहीं दिए जाने के चलते भूपेंद्र हुड्डा का दांव खाली चला गया। इसके विपरीत हरियाणा प्रदेश कांग्रेस संगठन की घोषणा जल्दी होने की सूचना ने भूपेंद्र हुड्डा और उनके खेमे के विधायकों को भारी परेशानी में डाल दिया।
भूपेंद्र हुड्डा के आदेश पर 3 महीने पहले पार्टी हाईकमान द्वारा संगठन को लेकर बुलाई गई बैठकों का हुड्डा समर्थक विधायकों और दूसरे बड़े नेताओं ने बहिष्कार किया था।
उस समय उन्होंने इन बैठकों को “हल्के” में लेने की भारी “गलती” की थी। भूपेंद्र हुड्डा और उनके समर्थकों ने अशोक तंवर के समय की गई “फील्डिंग” को ही दोहराने की गलती की।
उन्होंने यह नहीं सोचा कि अशोक तंवर और कुमारी शैलजा के बीच “बदलाव” के दौरान हाईकमान में भी काफी कुछ “बदल” चुका है। पहले हाईकमान में भूपेंद्र हुड्डा समर्थकों की “भरमार” थी लेकिन वर्तमान हालात में प्रदेश प्रभारी और दिल्ली दरबार के दूसरे महत्वपूर्ण पदों पर शैलजा और रणदीप सुरजेवाला समर्थकों का “प्रभुत्व” हो चुका है।
ऐसे में भूपेंद्र हुड्डा की कुमारी शैलजा को हटाने की सारी कोशिशें फेल हो गई। कुमारी शैलजा और सुरजेवाला ने भूपेंद्र हुड्डा के साथ आमने-सामने की “लड़ाई” लड़ने की बजाय पार्टी संगठन के जरिए खुद को “मजबूत” करने की रणनीति पर सफलता से काम किया।
पार्टी हाईकमान को विश्वास में लेकर पार्टी के संगठन के लिए बुलाई गई बैठक के जरिए पूरे प्रदेश के सभी 90 हलकों का फीडबैक लेकर पार्टी संगठन की सूची कुमारी शैलजा फाइनल कर चुकी हैं।
हुड्डा और उनके समर्थकों द्वारा इन बैठकों का बहिष्कार करने के चलते हुड्डा समर्थकों को इस सूची में उम्मीद से काफी कम जगह मिलने के आसार नजर आ रहे हैं।
अगर पार्टी संगठन में हुड्डा समर्थकों की संख्या काफी कम रही तो भूपेंद्र हुड्डा का रसूख और प्रभाव दोनों एक ही झटके में “अर्श से फर्श” पर आ जाएंगे।
इसी “खतरे” को भांपते हुए भूपेंद्र हुड्डा ने संगठन के विस्तार की घोषणा को रोकने के लिए पूरी ताकत लगाई लेकिन हाईकमान ने यह साफ-साफ कह दिया गया कि पहले ही पार्टी संगठन को 7 साल से लटकाया जा रहा है इसे और नहीं लटकाया जाएगा और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी।
इस बात की पुख्ता जानकारी मिलते ही हुड्डा भारी परेशानी में पड़ गए और इसलिए आज 4 दिन के अंतराल पर दोबारा सभी समर्थक विधायकों को इकट्ठा करके भूपेंद्र हुड्डा ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव केसी वेणुगोपाल के पास भेजा।
समर्थक विधायकों ने आज अपनी मांगों पर जोर देने की बजाय वेणुगोपाल से संगठन के विस्तार में विधायकों का ख्याल रखने की रिक्वेस्ट की।
चार ही दिन में प्रेशर पॉलिटिक्स खत्म होना और हाईकमान द्वारा भूपेंद्र हुड्डा की मांगों पर गौर नहीं करना भूपेंद्र हुड्डा खेमे के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि वेणुगोपाल ने आज हुड्डा समर्थक विधायकों को यह भी कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों और घोषणाओं को लेकर तो आप लोग सक्रिय नहीं होते हैं और न ही पार्टी की मजबूती के लिए वर्किंग करते हैं और सिर्फ अपने हितों के लिए सक्रिय हो गए हैं।
वेणुगोपाल ने हुड्डा समर्थक विधायकों को पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों में पूरी गंभीरता के साथ शामिल होने का सुझाव दिया।
बात यह है कि चार ही दिन में भूपेंद्र हुड्डा खेमे के सुर बदल गए हैं। विवेक बंसल से मिलते समय हुड्डा समर्थक विधायकों ने “धमकी” के लहजे में बात की थी लेकिन आज वही विधायक केसी वेणुगोपाल से मिलते समय हाथ “जोड़ने” की पोजीशन में थे।
हुड्डा समर्थक विधायकों को बखूबी पता है कि अगर पार्टी संगठन में विरोधियों को चौधर मिल गई तो उनके लिए अपने इलाकों में रसुख को बचाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
विपक्ष में रहते समय पार्टी संगठन के जिला अध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्षों का ही सबसे बड़ा रुतबा होता है।
ऐसे में हुड्डा समर्थक विधायकों द्वारा संगठन को लेकर बुलाई गई बैठकों का बहिष्कार करना “आत्मघाती” साबित हुआ है और ऐसे में खुद भूपेंद्र हुड्डा के लिए भी अपना रसूख बचाए रखना टेढ़ी खीर हो गया है।
इसीलिए भूपेंद्र हुड्डा ने अपने समर्थक विधायकों को एकजुट करके दोबारा से हाईकमान के सामने हाथ जोड़ने में देरी नहीं की।

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