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अभय चौटाला इनेलो के अकेले विधायक , अफसरशाही उनके फोन पर “तुरंत” कार्रवाई करती है।

अभय चौटाला इनेलो के अकेले विधायक , अफसरशाही उनके फोन पर “तुरंत” कार्रवाई करती है।

====अटल हिन्द ब्यूरो ===
चंडीगढ़।

गठबंधन सरकार के हिस्सेदार जेजेपी के नेताओं और वर्करों में 4 महीने की सरकार में ही “निराशा” छाने लगी है। जेजेपी नेताओं और वर्करों की यह सबसे बड़ी “नाराजगी” है कि अफसरशाही उन्हें ज्यादा महत्व नहीं दे रही है और उनके बताए कामों पर गंभीरता से कार्यवाही “नहीं” करती है।जेजेपी नेताओं को अफसरशाही द्वारा अनदेखा करने की भी खूब सारी शिकायतें सामने आ रही हैं।हालात यह है कि आम वर्करों के तो दूर जेजेपी के अलका अध्यक्ष और जिला अध्यक्षों की भी जिलों की अफसरशाही कोई “सुनवाई” नहीं कर रही है।जेजेपी के विधायकों को भी एसपी और डीसी से अपने काम को हराने के लिए भारी मशक्कत से गुजरना पड़ रहा है। टोहाना के विधायक देवेंद्र बबली इस बारे में सर्वजनिक तौर पर मंत्री अनिल विज के सामने अफसरों की शिकायत भी कर चुके हैं।जेजेपी वर्करों में यह चर्चा फैल गई है कि अफसरशाही जेजेपी और दुष्यंत चौटाला दोनों को ही “हल्के” में ले रही है और उनके बजाय बीजेपी के नेताओं और विधायकों के काम “धड़ाधड़” हो रहे हैं।

दुष्यंत की “नरमाई” का उठा रहे फायदा

जेजेपी नेताओं का कहना है कि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की नरमाई के चलते अफसरशाही जेजेपी नेताओं और वर्करों के कामों को गंभीरता से “नहीं” ले रही है। जेजेपी नेताओं के यह भी आरोप है कि दुष्यंत चौटाला के कार्यालय से गए फोन को भी अफसरशाही गंभीरता से नहीं ले रही है और फोन आने के बाद उनके काम करने की बजाय “लटकाने” की मानसिकता पर काम चल रहा है।जेजेपी नेताओं का यह भी कहना है कि खुद दुष्यंत चौटाला के फोनों को भी बड़े अफसर गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और उनके कामों को तुरंत “नहीं” कर रहे हैं।

अभय चौटाला की आ रही “याद”

जेजेपी नेताओं और वर्करों का कहना है कि अगर दुष्यंत चौटाला की जगह अभय चौटाला उपमुख्यमंत्री “होते” तो अफसरशाही उनके आदेशों की अवहेलना करने की “हिम्मत” नहीं जुटा पाती। अभय चौटाला का अफसरशाही को हैंडल करने का “दबंग” तरीका जेजेपी वर्करों को याद आ रहा है। जेजेपी नेताओं और वर्करों का कहना है कि अभय चौटाला इनेलो के अकेले विधायक होने के बावजूद उनके नेताओं से “ज्यादा” काम करवा रहे हैं और अफसरशाही उनके फोन पर “तुरंत” कार्रवाई करती है। इसलिए जेजेपी नेताओं और वर्करों में यह निराशा फैल रही है कि सरकार का हिस्सेदार होने के बावजूद उनके काम नहीं हो रहे हैं।
उनका मानना है कि अगर दुष्यंत चौटाला की बजाय अभय चौटाला उपमुख्यमंत्री “होते” तो उनके साथ इस तरह का “दोयम दर्जे” का व्यवहार करने की अफसरशाही में “हिम्मत” नहीं होती।

जेजेपी के नेताओं और वर्करों को यह उम्मीद थी कि उनके काम सरकार में उसी तरह से “धड़ल्ले” से होंगे जिस तरह से इनेलो सरकार में हुआ करते थे।जेजेपी के 95 फ़ीसदी नेता और वर्कर इनेलो से ही आए हैं। इन नेताओं और वर्करों को अपने काम फटाफट कराने की आदत रही है लेकिन गठबंधन सरकार में उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।छोटे नेताओं की तो दूर विधायकों और जिला अध्यक्षों को भी प्रशासनिक अधिकारियों से अपने काम कराने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपमुख्यमंत्री चौटाला के “सॉफ्ट” नेचर के कारण अफसरशाही उनका खौफ नहीं मानती है और उनके कामों को एक ही झटके में नहीं कर रही है।इस कारण जेजेपी नेता और वर्करों को यह महसूस हो रहा है कि अगर दुष्यंत चौटाला की जगह अभय चौटाला उपमुख्यमंत्री होते तो भाजपा नेताओं की तरह उनके काम भी धड़ल्ले से होते और अफसरशाही उन्हें नजरअंदाज नहीं कर पाती।जेजेपी नेताओं और वर्करों की “अभय प्रेम” की चर्चा दुष्यंत चौटाला को आगाह करने का काम कर रही है।
अगर दुष्यंत चौटाला अपने नेताओं और वर्करों के काम सरकार का हिस्सेदार होते हुए भी नहीं करा पाए तो उन्हें इसका भारी सियासी खामियाजा भुगतना पड़ेगा क्योंकि काम नहीं होने पर निराशा में जेजेपी के नेता और वर्कर भविष्य में उनको “तलाक” दे सकते हैं। सरकार की सांझेदारी होने के बावजूद जेजेपी वर्करों के साथ “बेगाना” व्यवहार भविष्य में जेजेपी के समीकरणों को बिगाड़ सकता है और दुष्यंत चौटाला की राह में कांटे बिछा सकता है।

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