अमिताभ बच्चन तो कोरोना की जंग जीते लेंगे,

अमिताभ बच्चन तो कोरोना की जंग जीते लेंगे, लेकिन धार्मिक स्थलों पर दुआ प्रार्थना करने वाले थोड़ा कष्ट अपने माता-पिता की सेवा करने में भी उठा लें।

====अटल हिन्द ब्यूरो =========
12 जुलाई को टीवी न्यूज चैनलों पर फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन के स्वास्थ्य से जुड़ी खबरें ही छाई रहीं। 11 जुलाई की रात को अमिताभ ने स्वयं बताया कि वे कोरोना संक्रमित हो गए हैं। अमिताभ के इस ट्वीट के बाद मुम्बई के नानावटी अस्पताल से लेकर निवास स्थान जलसा तक पर मीडिया वालों का लाइव कवरेज शुरू हो गया। चैनलों के कैमरों की चमक देखते हुए देशभर के धार्मिक स्थलों पर लोग अमिताभ के फोटो रख कर स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना कर रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि अमिताभ ने मनोरंजन जगत में ही नहीं बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमिताभ बच्चन सरकार के जनजागरण वाले विज्ञापनों का कोई मेहनताना भी नहीं लेते हैं। पोलिया की दवा पिलाने से लेकर शौचालय के प्रति जागरुक करने वाले सभी विज्ञापन फ्री किए जाते है। भले ही अमिताभ की उम्र 78 के पार हो गई हो, लेकिन अभी भी देश को अमिताभ की जरुरत है। अमिताभ हर दृष्टि से समर्थ है, इसलिए कोरोना की जंग जीत ही लेंगे, लेकिन जो लोग अमिताभ के लिए धार्मिक स्थलों पर दुआ और प्रार्थना कर रहे हैं वे थोड़ी सेवा अपने बुजुर्ग माता पिता की भी कर लें, तो बड़ा पुण्य का काम होगा। अस्पताल से स्वास्थ्य होकर घर लौटने पर अमिताभ तो ट्वीटर पर सबका शुक्रिया अदा कर देंगे, लेकिन सेवा के बाद माता पिता का अशीर्वाद तो तत्काल मिल जाएगा। यही आशीर्वाद सभी कष्टों से मुक्ति दिलवाएगा। यदि घर पर माता-पिता या अन्य कोई बुजुर्ग रिश्तेदार बीमार पड़ा हो ओर फिर अमिताभ बच्चन के लिए धार्मिक स्थलों पर पूजा पाठ की जा रही हो तो ऐसे लोगों को ईश्वर भी देख रहा है। सभी धर्मों में परिवार के बुजुर्ग खासकर माता-पिता की सेवा के बाद अमिताभ के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की गई तो ज्यादा सार्थक होगी। एकल परिवर की धारणा के चलते परिवार के बुजुर्गों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। यदि परिवार के बुजुर्गों को किसी आश्रय स्थल में शरण लेनी पड़े तो यह किसी भी धर्म के अनुकूल नहीं है। कोरोनाकाल में ऐसे अनेक बुजुर्ग होंगे, जिनको वाकई सेवा की जरुरत है। जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वह घर स्वर्ग जन्नत से कम नहीं होता। वैसे मेरा मानना है कि संस्कारवान लोग बुजुर्गों की सेवा करते ही हैं, लेकिन फिर भी लोगों को अपनी सेवाभावना को बढ़ाना होगा। जहां तक न्यूज चैनल वालों का सवाल हैतो उन्हें अमिताभ के कोरोना की वजह कई दिनों का काम मिल गया है। अब वैश्विक महामारी कोरोना से बड़ी खबर अमिताभ बच्चन के संक्रमण की हो गई है। यदि अमिताभ को भी अपनी पुरानी फिल्मों का रिव्यू देखना हो तो नानावटी अस्पताल में ही न्यूज चैनल पर देख सकते हैं। जीवन के जो किस्से कहानियां स्वयं अमिताभ भूल गए होंगे, वो भी चैनलों पर ब्रेकिंग न्यूज के तौर पर प्रसारित हो रहे हैं। चैनलों के लिए सबसे बड़ी खबर अब अमिताभ बच्चन का कोरोना हो गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
error: Content is protected !!
Open chat
%d bloggers like this: