अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने के लिए 400 साल तक जीवित रहना होगा.

अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने के लिए 400 साल तक जीवित रहना होगा.

अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता!

2022 के H-1B वीजा लॉटरी में भारतीयों को न किया जाए शामिल, नाराज ‘इमिग्रेशन वॉयस’ ने अपनाया कड़ा रुख

अमेरिका के पुराने और भेदभाव से बनाए गए कानून को कारण, हर साल भारतीय (Indian) उपलब्ध कुल 120,000 रोजगार आधारित ग्रीन कार्डों में से केवल 8,400 प्राप्त कर पाते हैं.

-BY Rohit Sharma-

To get a green card in America, one has to live for 400 years.

Forced to leave America!

Indians should not be included in 2022 H-1B visa lottery, angry immigration voice adopts tough stand

Due to the old and discriminatory law of America, every year Indians are able to get only 8,400 out of the total 120,000 employment based green cards available.

इमिग्रेशन वॉयस (Immigration Voice) के अध्यक्ष अमन कपूर (Aman Kapoor) ने जो बिडेन प्रशासन (Joe Biden Administration) के H-1B की बहाली वाले फैसले के जवाब में बयान जारी किया है. उन्होंने एक कड़ा रुख अख्तियार करते हुए भारतीयों को 2022 के H-1B वीजा लॉटरी में शामिल नहीं करने को कहा. हर साल, अमेरिका लगभग 85,000 नए H-1B वीजा श्रमिकों को स्वीकार करने के लिए एक लॉटरी आयोजित करता है, जिन्हें दोहरे इरादे वाले काम वीजा के रूप में जाना जाता है. हर साल नए H-1B वीजा का लगभग 70% (60,000 वीजा) भारत से श्रमिकों को जारी किया जाता है, जिनमें से कई अपने जीवनसाथी और नाबालिग बच्चों के साथ अमेरिका में प्रवेश करते हैं.

इस वीजा के चलते ही अमेरिका में भारतीय अपने परिवार के लिए बेहतर जीवन जीने का सपने देखते हैं. कड़ी मेहनत और नियमों का पालन करन के बाद, उन्हें ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने का मौका मिलता है. लेकिन उसी समय अमेरिका के पुराने और भेदभाव से बनाए गए कानून को कारण, हर साल भारतीय उपलब्ध कुल 120,000 रोजगार आधारित ग्रीन कार्डों में से केवल 8,400 प्राप्त कर पाते हैं. गैर-पक्षपातपूर्ण कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस हमें बताती है कि इस भेदभावपूर्ण नियम के कारण आज भारतीयों की ये संख्या 1 मिलियन से अधिक लोगों की है जिससे एक बैकलॉग बनाया है. 2020 में ग्रीन कार्ड अप्लीकेशन मंजूर होने वाले भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिलने में कम से कम अगले 195 वर्षों से अधिक समय का इंतजार करना पड़ेगा. वित्तीय वर्ष 2030 में ये लाइन 436 साल तक बढ़ जाएगी.
रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड पर एक वास्तविक प्रतिबंध
ग्रीन कार्ड बैकलॉग में अधिकांश महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जो अंततः इन बैकलॉग में मर जाएंगे. कहने की जरूरत नहीं है कि रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रणाली पर प्रति-देश की सीमा वास्तव में, 100%, एक “भारतीय बहिष्करण” है. वास्तविक जीवन में, यह H-1B वीजा पर अमेरिका में प्रवेश करने वाले किसी भी नए भारतीय नागरिक के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड पर एक वास्तविक प्रतिबंध है.

इसका मतलब है कि अगर उपराष्ट्रपति कमला हैरिस की मां आज इस तरह की व्यवस्था के तहत अमेरिका आतीं, तो वे अपने जीवनकाल में कभी ग्रीन कार्ड प्राप्त नहीं करतीं. श्यामल गोपालन की बेटी के जीवन का पाठ्यक्रम पूरी तरह से अलग होता. अमन कपूर का कहना है कि ‘लगभग हर दिन, हम ऐसी रिपोर्ट सुनते हैं कि हमारे बैकलॉक में फंसे एक सदस्य की मृत्यु हो गई है, जबकि बैकलॉग में, अपने पति या पत्नी और बच्चों को असमंजस की स्थिति में छोड़ दिया जाता है. जिनके पास कोई लीगल स्टेटस नहीं रह पाता और उन्हें तुरंत भारत जाना पड़ता है.’
अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता!
अमेरिका में बसे भारतीय हर दिन अपने दोस्तों से सुनते हैं, जो भारत में फंसे हुए हैं क्योंकि उन्होंने अपनी मृत मां/पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए यात्रा की थी, और अब उन्हें वीजा नियुक्ति नहीं मिल सकती है, या उनका वीजा स्टैम्प मनमाने ढंग से किया और अमेरिकी दूतावास द्वारा वीजा देने से इनकार कर दिया गया. बैकलॉग में फंसे लोग कहते हैं कि उन्होंने 15 साल से एक ही नौकरी की है और यूएससीआईएस ने अचानक घोषित किया है कि उनके पास वही काम करने के लिए सही शिक्षा नहीं है जो वे 15 वर्षों से सफलतापूर्वक कर रहे हैं. इसलिए, उन्हें तुरंत अपने पति या पत्नी और बच्चों के साथ अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, या वे सभी अवैध स्थिति में होंगे.

‘रोजगार कर रहा शोषण’
कई भारतीय ये कहते हैं कि उनका रोजगार उनका शोषण कर रहा है और वे इस डर से कुछ भी नहीं कर सकते कि वे अपने रोजगार आधारित वीजा से मंजूर हुई ग्रीन कार्ड की अप्लीकेशन खो देंगे, और उनके बच्चे भारत वापस आ जाएंगे. अमन कहते हैं कि सबसे आम तौर पर, हर दिन हम ऐसे लोगों से सुनते हैं, जो उन नौकरियों से इस्तीफा नहीं दे सकते हैं जहां उनके नियोक्ताओं द्वारा शोषण किया जाता है. जो अपनी योग्यता के बावजूद नौकरियों में पदोन्नति नहीं पा सकते हैं. अपने अभिनव विचारों के आधार पर कंपनियां शुरू नहीं कर सकते हैं और अपना खुद का विकास नहीं कर सकते हैं. दुनिया बदलने वाले पेटेंट, रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड पर प्रति-देश की सीमा के कारण, वर्तमान प्रणाली बंधवा मजदूर का वैध रूप है जो मुट्ठी भर नियोक्ताओं के हित को बढ़ावा देती है.
H-1B वीजा पर बंधवा मजदूर बुलाता रहेगा US
इसीलिए इमिग्रेशन वॉयस अब भारत में जन्म लेने वाले किसी भी नए व्यक्ति को बाहर करने के लिए आईएनए धारा 212 (एफ) के तहत बाइडेन को अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए गुहार लगा रही है. इमिग्रेशन वॉयस का कहना का है कि जब तक भारतियों का ग्रीन कार्ड बैकलॉग को क्लियर नहीं किया जाता, तब तक अमेरिका मौके की आड़ में H-1B वीजा पर बंधवा मजदूर बुलाता रहेगा, जो गलत है. भारत से अमेरिका आने वाले छात्रों को भी सोचते रहना चाहिए, अमेरिका में उनके पास स्टूडेंट वीजा खत्म होने के बाद H-1B वीजा के अलावा कोई भी विकल्प मौजूद नहीं है. ऐसे में उन्हें ग्रीन कार्ड पाने के लिए 400 साल तक जीवित रहना होगा.

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