अरविंद केजरीवाल की जीत से बदलेगी फिजा

अरविंद केजरीवाल की जीत से बदलेगी फिजा

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है वह समय आने पर जो निर्णय लेती है उससे बड़े-बड़े दिग्गजों के अहंकार टूट जाते हैंं। ऐसे लोग जो आमजनों के आत्म सम्मान और उनके हितों की रक्षा नहीं करते हैं उन्हें समय आने पर आम निरीह जनता शांति के साथ-साथ ताकतवर सत्ता को जमीन पर लाकर खड़ा कर देती है। दिल्ली विधानसभा के चुनाव में सारे देश एवं दुनिया की निगाहें लगी हुई थी। पिछले 5 वर्षों में केंद्र शासित दिल्ली प्रदेश में भाजपा के हाथों में केंद्र की कमान थी। उपराज्यपाल के माध्यम से शुरू दिन से केजरीवाल सरकार को गिराने की साजिश हो रही थी। उपराज्यपाल नजीब जंग को केंद्र सरकार ने सारे अधिकार दे दिए थे। मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल जो निर्णय लेते थे। वह उपराज्यपाल के जरिए संसद नहीं आते थे। वह फाइलें रोककर बैठ जाते थे। हर काम की जांच करते थे। मुख्यमंत्री एवं विधायकों के खिलाफ जांच झूठी शिकायतों पर गिरफ्तारी इत्यादि करके विधायकों को दल-बदल के लिए प्रोत्साहित किया। भाजपा के प्रयासों से कुमार विश्वास, प्रशांत भूषण जैसे लोग पार्टी छोड़कर चले गए। वहीं कपिल मिश्रा जैसे नेता आम आदमी पार्टी के विधायकों को तोड?े का हर संभव प्रयास किया किंतु सरकार गिराने में सफल नहीं हुए। नगर पालिक निगम के सफाई कर्मियों तक को केजरीवाल सरकार को गिराने के काम पर लगा दिया। इससे केजरीवाल सरकार के मंत्रियों और विधायकों पर दबाब बढ़ा। सरकार के मंत्री एवं विधायक इस विषम परिस्थिति में ना केवल काम करने मजबूर हुए वहीं केंद्र सरकार की तिरछी निगाहें होने से ईमानदारी से काम करने विवश हुए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से दिल्ली सरकार को स्वयं निर्णय लेने के अधिकार मिले। दो वर्ष के अंतराल में दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक, स्मार्ट स्कूल, 20 हजार लीटर मुफ्त जल, 200 युनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई। महिलाओं के लिए डीटीसी की बसों में नि:शुल्क यात्रा की सुविधा दी। दिल्ली में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगे। दिल्ली के मतदाताओं को पहली बार केंंद्र सरकार के कामकाज, दिल्ली नगर निगम के कामकाज की तुलना का अवसर मिला। इसमें केजरीवाल सरकार को दिल्ली के मतदाताओं ने पसंद किया। तीसरी बार दिल्ली के मतदाताओं ने कजरीवाल के प्रति विश्वास जताया है। यह निश्चित रूप से उनके काम को दिल्ली की जनता ने सम्मानित किया है। इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से काम के आधार पर वोट मांगा था। यदि उनकी सरकार ने काम किया है तो ही वोट दें। चुनाव के समय किसी भी नेता ने आज तक इस तरह से चुनाव प्रचार करते वक्त वोट नहीं मांगा।
अहंकार झूठ-हिंदू-मुस्लिम
दिल्ली के मतदाताओं ने इस बार अहंकार, नेताओं के झूठ, हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण को बुरी तरह नकार दिया है। हिंदुओं और राष्ट्रीयता के नाम पर भाजपा ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ जो माहौल बनाया। दिल्ली के विकास को नकारते हुए झूठ का जो बवंडर बनाया था। उसे दिल्ली के मतदाताओं ने स्वीकार नहीं किया। शाहीन बाग टुकड़े-टुकड़े गैंग, पाकिस्तानी समर्थक, आतंकवादी इत्यादि कहकर चुनाव को हिन्दू-मुस्लिम के बीच ध्रुवीकरण कराने तथा चुनाव प्रचार के दौरान राम मंदिर निर्माण ट्रस्ट की घोषणा चुनाव आयोग, दिल्ली पुलिस, ईडी, सीबीआई जैसी संस्थाओं को उपयोग केजरीवाल सरकार के खिलाफ किया गया। दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेश में भाजपा के 260 से ज्यादा सांसद, 2 दर्जन से अधिक केंद्रीय मंत्री कई राज्यों के मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्रियों को चुनाव मैदान में उत्तर दिया। स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार में गाली-गली घूमे। चुनाव प्रचार के दौरान धन-और बल का पूरी ताकत से उपयोग और प्रदर्शन लिया गया। इसका कोई लाभ नहीं मिला। उल्टे जो मतदाता इस चुनाव में केजरीवाल को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। वह भी केजरीवाल के काम और उनकी ताकत से प्रभावित हो गया।
चुनाव के लिए भाजपा ने जो जो हथकंडे अपनाये। चुनाव मैदान में वह फुस्सी बम साबित हुए। इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि भाजपा नेताओं की कथनी-करनी में विश्वास नहीं किया। जो भाजपा के लिए काफी नुकसानदेह है। बहरहाल अंत भला तो सब भला। दिल्ली चुनाव के परिणाम आ गए हैं। आम आदमी पार्टी सरकार के कामकाज को दिल्ली के मतदाताओं ने सराहा है। तीसरी बार दिल्ली में केजरीवाल के नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है। दिल्ली चुनाव के जो परिणाम सामने आए हैं। वह भाजपा तथा अन्य प्रदेशों की सरकारों के लिए एक सबक भी है।

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