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अरविंद केजरीवाल बड़ा लड़ाका,दिल्ली में आप ही बाप ,

दिल्ली में आप ही बाप ,अरविंद बड़ा लड़ाका

-राजकुमार अग्रवाल –

नई दिल्ली l दिल्ली में चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री केजरीवाल खुद को परिवार के बड़े लड़के के रूप में प्रस्तुत कर यह दर्शाने की कोशिश करते थे कि घर की सारी जिम्मेदारी उनके सिर पर हैं और वह उसे बड़ी खूबी से निभा रहे हैं l अब चुनाव में हम उन्हें बड़ा लड़का नहीं बड़े लड़ाके के रूप में देख सकते हैं l
दिल्ली में इस बार का चुनाव एक बार फिर आम आदमी पार्टी को फेवर करता दिख रहा है l यह चुनाव कई ऐसे संकेत दे रहा है कि केंद्र में सत्ता में बैठे भाजपा के नेताओं को अब खुद की समीक्षा करने की जरूरत पड़ने वाली है lयद्यपि हर चुनाव मतदान से एक-दो दिन पहले तय होता है परंतु सर्वेक्षण बता रहा है कि दिल्ली के प्रबुद्ध लोग भाजपा को आप का विकल्प मानने को तैयार नहीं हुए हैं और शायद भाजपा ने इस विचार को भाप भी लिया है l उसके नेताओं में आई हीन भावना और फ्रस्ट्रेशन यह सिद्ध कर रही है कि भाजपा को हार सामने नजर आने लगी है l

बौखलाहट होती है हार की पहचान
जब आदमी को हार नजर आती है तो उसकी भाषा बदल जाती है l बॉडी लैंग्वेज बदल जाती है lभारतीय जनता पार्टी के दो नेताओं ने जिस तरह मंच से भड़काऊ और आपत्तिजनक बातें की, वह बौखलाहट हैl दिल्ली से सांसद प्रवेश वर्मा और केंद्र में मंत्री अनुराग ठाकुर ने जिस तरह मस्जिद तोड़ने और गोली मारने की बातें की नारे लगवाए उसे यह समझो कि इन नेताओं ने दिल्ली के तासीर को समझ लिया है lयह दर्शाता है कि भाजपाई हार सामने देखकर कच्चे में उतर रहे हैं lउन्हें समझ आ गया है कि दिल्ली के मतदाता यूपी गुजरात की तरह नहीं सोचते l वह जाति और धर्म को आधार मानकर नहीं बल्कि काम के दम पर वोट देते हैं और भाजपा काम को मुद्दा ही नहीं बना रही है l
भाजपा ने दोनों नेताओं पर कार्यवाही इसलिए नहीं की l
भाजपा के इन दोनों नेताओं पर चुनाव आयोग ने कार्रवाई कर प्रतिबंध लगाया है परंतु पार्टी ने उन्हें चेतावनी तक नहीं दी l जो यह साबित करता है कि अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा ने जो कुछ कहा वह पार्टी के इशारे पर कहा और इसी कोशिश में भाजपा को दिल्ली के जागरूक मतदाताओं में एक्सपोज कर दिया है lमुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का आक्रामक होना इस बात का संकेत है कि दिल्ली के मतदाता भाजपा को वह भाव नहीं दे रहे जो लोकसभा चुनाव में दिया गया था lजरीवाल ने मंच से यह करना शुरू कर दिया है कि मोदी खतरनाक आदमी है lउसने पाकिस्तानियों से सेटिंग कर रखी है l उसने उग्रवादियों से सेटिंग कर रखी है l मोदी देशद्रोही हैl

क्षेत्रीय दल आ रहे हैं आगे
यह चुनाव शायद यह बात भी साबित करने जा रहा है कि प्रदेशों में मतदाता राष्ट्रीय दलों की बजाय क्षेत्रीय दलों को इसलिए अधिमान दे रहे हैं कि वह उनकी समस्याओं को ज्यादा अच्छी तरह से समझते हैं और उनका समाधान भी करते हैं l महाराष्ट्र झारखंड के बाद दिल्ली में क्षेत्रीय दल के नेता का मुख्यमंत्री बनने की संभावना इस विचार को और मजबूत करती नजर आ रही है l

भाजपा के बड़ी उपलब्धियां काम नहीं आ रही
एक बात और है lजम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने जैसे शानदार मसले पर प्रधानमंत्री गृहमंत्री और भाजपा की मजबूत इच्छाशक्ति राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने नागरिकता संशोधन कानून बनाने के अहम फैसलों पर देश में बढ़ रही बेरोजगारी लचर होती अर्थव्यवस्था के मुद्दे भारी पडते नजर आ रहे हैं lभाजपा ने कहो या मोदी सरकार ने ,सीए और एनआरसी को लेकर यह तो सोचा होगा कि इसका विरोध होगा परंतु यह नहीं सोचा होगा कि इतना विरोध होगा l

भीड़ को वोटों में तब्दील नहीं कर पा रहे प्रधानमंत्री
अभी तो भाजपा को यह भ्रम है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली और कार्यक्रम होने शेष है l परंतु पिछला अनुभव तो यह बता रहा है कि मोदी जी जहां गए अमूमन वहीं भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा है lमतलब मोदी भी अब चमत्कार नहीं कर पा रहे हैं l

वोट प्रतिशत घट गया तो क्या होगा?
शायद भाजपा नेता यह मानकर चल रहे हैं कि दिल्ली में उनका 32% से अधिक वोट शेयर है जो इस बार उपरोक्त मुद्दों के कारण बढ़ेगा lमसलन धारा 370 राम मंदिर निर्माण की संभावना निश्चित तौर पर भाजपा के काम आएगी परंतु ऐसा ही हो रहा होता तो भाजपा के नेताओं को भाषा के मामले में कच्चे में उतरने की जरूरत नहीं पड़ती lएक बात बता दें कि जिस तरह पहले से पिछड़ने के बावजूद हरियाणा में विधानसभा चुनाव में भाजपा को 3% वोट ज्यादा मिले थे इसके विपरीत दिल्ली में भाजपा को सीटें पहले से ज्यादा मिलने के बाद भी यदि उसका वोट शेयर घट गया तो फिर भाजपा की रेलगाड़ी ऐसी पटरी से उतरेगी कि इसे अगले 5 साल में भी फिर से पटरी पर लाना बहुत कठिन हो जाएगा l

अब अरविंद केजरीवाल का कोई विकल्प नहीं

लोकसभा चुनाव में जनता के पास प्रधानमंत्री का कोई ठोस विकल्प नहीं था lलोगों को एक ही रास्ता नजर आया वह था नरेंद्र मोदी lपरंतु दिल्ली में स्थिति और है l यहां भाजपा के पास अरविंद केजरीवाल का विकल्प नहीं है lआप यह मान कर चल सकते हैं कि दिल्ली चुनाव में कांग्रेस का वोट हो या मुस्लिम मतदाता, निश्चित तौर पर आम आदमी पार्टी को फेवर करता दिख रहा है lयदि दिल्ली का दलित वोटर बट भी गया तो भाजपा की कुछ सीटें बढ़ सकती हैं परंतु यह फैक्टर अरविंद केजरीवाल को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाने से नहीं रोक पाएगा lअभी दिल्ली में तथाकथित मीडिया ट्रायल बाकी है परंतु इस मामले में केजरीवाल से बड़ा मास्टरमाइंड शायद ही कोई और होगा l

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