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अर्णव को बीजेपी का साथ,लेकिन मीडिया घरानों से तालुकात खराब 

अर्णव को बीजेपी का साथ,लेकिन मीडिया घरानों से तालुकात खराब

मुम्बई में अब आर भारत न्यूज़ चैनल को सबक सिखाएगी शिवसेना।

 

चैनल का वीडियो जर्नलिस्ट गिरफ्तार, केबल ऑपरेटरों को प्रसारण रोकने के निर्देश।

=====राजकुमार अग्रवाल =======

अभिनेत्री कांगना रनौत का दफ्तर तोड़ने के बाद अब शिवसेना और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे मुम्बई में आर

भारत न्यूज चैनल को सबक सिखाएंगे। चैनल के मालिक संपादक अर्णव गोस्वामी ने बताया कि उनके वीडियो

जर्नलिस्ट अनुज कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है तथा मुम्बई में केबल ऑपरेटरों को निर्देश दिए हैं कि आर

भारत चैनल का प्रसारण बंद कर दिया जाए। गिरफ्तार जर्नलिस्ट अनुज कुमार से मुम्बई पुलिस चैनल के खबरों

के स्त्रोत के बारे में जानना चाहती है। अर्णव गोस्वामी ने बताया कि शिवसेना के सांसद संजय राउत के भाई

सुनील राउत ने बकायदा एक लिखित आदेश मुम्बई के केबल ऑपरेटरों को जारी किया है। इस आदेश में चैनल

के प्रसारण को रोकने की बात कही गई है। अर्णव ने कहा कि आर भारत चैनल ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत

के मौत के प्रकरण और महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं को पीटपीट कर मार देने की घटनाओं को पूरजोर तरीके

से उठाया है। इसलिए शिवसेना और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे खफा है। महाराष्ट्र की शिवसेना कांग्रेस और

एनसीपी के गठबंधन वाली सरकार में पहले उन्हें भी प्रताडि़त किया है। लेकिन हमारा चैनल शिवसेना की गलत

नीतियों का विरोध करता रहेगा। हम राज्य सरकार की किसी भी धमकी से डरने वाले नहीं है। चूंकि हमने

जनहित के मुद्दे दर्शकों के सामने रखे, इसलिए दर्शकों ने आर भारत चैनल को देेश का पहले नम्बर का चैनल

बनाया। यहां यह उल्लेखनीय है कि अभिनेत्री कांगना रनौत ने भी सुशांत सिंह की मौत के प्रकरण में आवाज

बुलंद की थी। कांगना की आवाज को बंद करवाने के लिए मुम्बई में उनके दफ्तर को तोड़ दिया गया। कांगना ने

बीएमसी की इस कार्यवाही के पीछे भी उद्धव ठाकरे का दबाव बताया। कांगना ने भी उद्धव ठाकरे को सीधे

चुनौती दी है। महाराष्ट्र के मुम्बई में इन दिनों राजनीतिक लड़ाई व्यक्तिगत स्तर पर उतर आई है। राजनीति से

जुड़े लोग व्यक्तिगत तौर पर एक दूसरे के दुश्मन बन गए हैं.यहाँ मीडिया खासकर आर भारत  के अर्णव

गोस्वामी को भी यह समझना जरूरी है की बेशक बीजेपी का हाथ उनके सर पर है लेकिन उससे ज्यादा जरूरी

मीडिया के साथ आपसी तालुकात बनाये रखना है ,.क्योंकि भारत में बेशक लोकतंत्र है इसके बाद भी आम

आदमी की आवाज यहाँ सरेआम दबाई जा रही है खासकर राजनेताओं के खिलाफ बोलने वालों की। अर्णव

गोस्वामी  जिस प्रकार की भी पत्रकारिता करें उससे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अपनों से बैर लेकर कोई भी

सफल नहीं हुआ ,

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