अशोक तंवर की नई राजनीतिक शुरुआत 16 को कर सकते हैं पार्टी के गठन का ऐलान

अशोक तंवर की नई राजनीतिक शुरुआत 16 को कर सकते हैं  पार्टी के गठन का ऐलान

राजकुमार अग्रवाल
चंडीगढ़। क्या यह सही है कि पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर ने पिछले 6 साल के दौरान संघर्ष की नई मिसाल कायम की?लेकिन  कांग्रेस में अनदेखी होने के चलते अशोक तवर को पार्टी छोड़ने को मजबूर होना पड़ा?अब प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर जेजेपी मुखिया व प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की राह पर आगे बढ़ते हुए नजर आ रहे हैं।जिस तरह से दुष्यंत चौटाला ने अपने परिवार के पार्टी से बेदखल किए जाने के बाद नई पार्टी बनाते हुए 1 साल के अंदर ही सत्ता में हिस्सेदारी हासिल करने का नया इतिहास रचा, उसी तरह कांग्रेस में पूरी तरह से अनदेखा किए जाने के चलते पार्टी छोड़ने को मजबूर हुए अशोक तवर भी अपने बलबूते की सियासत करने का फैसला ले चुके हैं।

 

दुष्यंत चौटाला की तरह अलग पार्टी बनाकर अशोक तंवर भी प्रदेश की सियासत में नई ताकत बनने जा रहे हैं। 16 फरवरी को करनाल में उन्होंने स्वाभिमान दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया है। उस कार्यक्रम में अशोक तंवर नई पार्टी बनाने की घोषणा कर सकते हैं।अशोक तंवर कार्यक्रम की सफलता के लिए इस समय पूरे प्रदेश के समर्थकों से संपर्क साध रहे हैं। अशोक तंवर की सक्रियता यह बता रही है कि वह अपने बलबूते पर संघर्ष करते हुए अगले 5 साल संघर्ष करते हुए खुद को दमदार नेता के रूप में स्थापित करने की प्लानिंग को अमलीजामा पहना चुके हैं। बात यह है कि गर्दिश के दिनों में 6 साल तक कांग्रेस की कमान संभालने वाले अशोक तंवर ने संघर्ष और मेहनत में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।

 

प्रदेश कांग्रेस के दूसरे बड़े नेताओं द्वारा सहयोग नहीं करने के चलते वे कांग्रेस को सबसे मजबूत पार्टी नहीं बना पाए थे।राजनीतिक मजबूरियों के चलते कांग्रेस हाईकमान ने उनको चुनाव से ठीक पहले पद से हटा दिया और कुमारी शैलजा को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंप दी। अशोक तंवर को इससे कोई एतराज भी नहीं था। अशोक तंवर को उस समय ज्यादा झटका लगा जब विधानसभा चुनाव में उनके ज्यादातर समर्थकों के टिकट काट दिए गए। अशोक तंवर इस अनदेखी से खफा हो गए और उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया।3 महीने तक सारे हालात को खंगालने के बाद अशोक तंवर ने अब नई पार्टी बना कर नए सिरे से अपनी सियासत का बिगुल बजाने का फैसला लिया हैअशोक तंवर ने 6 साल के कार्यकाल के दौरान समर्थकों की खास सेना खड़ी की है।

 

 

इन समर्थकों को न तो कांग्रेस में पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने अपनाया और ना ही कुमारी शैलजा ने उन्हें अपने साथ लगाया। अशोक तंवर के समर्थक कांग्रेस छोड़ने के बाद भी उनके साथ खड़े हैं। ऐसे में उनके लिए नई पार्टी बनाना मुश्किल नहीं लग रहा है।यह सच्चाई है कि कांग्रेस को बड़ा मंच मानते हुए उनके साथ नजर आने वाले कई नेता नई पार्टी में उनके साथ नहीं जाएंगे। ऐसे में अशोक तौर को अपने बलबूते पर ही अपनी पार्टी का संगठन खड़ा करना होगा और गांव-गांव घूमकर वर्करों को जोड़ना होगा।

 

अशोक तंवर के नई पार्टी बनाने पर प्रदेश की सियासत में नए दौर का आगाज होगा।
नई पार्टी बनाने के बारे में उन्होंने कहा कि इस दिन साथियों की मर्जी रही, तो वह नई पार्टी का ऐलान कर सकते हैं। गुरुग्राम में अशोक तंवर ने कहा कि कांग्रेस में जाना होता तो वह पार्टी को छोड़ते ही नहीं। उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने टिकट सही लोगों नहीं दिया। जिसका नतीजा यह रहा है कि प्रदेश में मौजूदा सरकार के विपक्ष में कोई पार्टी नहीं रही। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के स्वाभिमान की रक्षा के लिए वे नई पार्टी का गठन करने जा रहे हैं।

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