असल पेच तो अब फंसेगा हरियाणा की खटटर और दुष्यंत सरकार के बीच , बेरोजगारी भत्ता, बुजुर्ग पेंशन पर 

(The real screw will now be stuck between Khatter and Dushyant government of Haryana, unemployment allowance, elderly pension)असल पेच तो अब फंसेगा हरियाणा की खटटर और दुष्यंत सरकार के बीच , बेरोजगारी भत्ता, बुजुर्ग पेंशन पर

नई दिल्ली(अटल हिन्द ब्यूरो )हरियाणा की भाजपा और जेजेपी  पार्टियों के पांच बड़े वादों पर नजर डाले तो इन घोषणाओं का  आम लोगों पर असर पड़ने वाला है. सीएम और डिप्टी सीएम की शपथ हो चुकी है लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि किए गए वादे कैसे पूरे होंगे. हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा का कहना है कि बीजेपी-जेजेपी इनमें से कुछ मुद्दों को लेकर आमने-सामने हो सकते हैं. जेजेपी (JJP)चाहेगी कि उसके ज्यादातर वादे पूरे हों. सिर्फ 10 महीने पुरानी पार्टी की 10 सीटें आई हैं तो इसमें बड़ा योगदान उसके लुभावने वादों का भी है. ऐसे में यदि उसे लंबा सफर तय करना है तो इन वादों को पूरा करवाना होगा. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडिया इकोनॉमी  के मुताबिक हरियाणा(HARIYANA) में बेरोजगारी की दर अगस्त 2019 में बढ़कर 28.7 प्रतिशत हो गई है, जो देश में सबसे अधिक है. इसलिए दुष्यंत चाहेंगे कि युवाओं के लिए कुछ ऐसा करें जिससे वो उनसे खुश रहे. जेजेपी नेता दिग्विजय चौटाला से  उनके मीटिंग में होने की वजह से खबर लिखे जाने तक पार्टी का पक्ष नहीं मिल सका. हालांकि, बीजेपी के प्रदेश महासचिव संदीप जोशी(SANDEEP JOSHI) का कहना है कि हमने भारी-भरकम वादे नहीं किए हैं. हमने अपने संकल्प पत्र में वही कहा है जो वाकई पूरा किया जा सकता है. जेजेपी ने चुनाव में जो वादा किया था वो अलग है. अब गठबंधन की सरकार है इसलिए किसी एक पार्टी के वादे पर ही अमल नहीं किया जाएगा. एक कॉमन मिनिमन प्रोग्राम (सीएमपी) बनेगा और उसके आधार पर चीजें तय होंगी.बेशक हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी के गठबंधन वाली नई सरकार बनने के बाद अब दोनों दलों पर अपने-अपने घोषणापत्र  को लागू करने का दबाव रहेगा. बीजेपी(BJP) ने सत्ता में दोबारा वापसी की उम्मीदों के बीच कम वादे किए थे लेकिन जेजेपी ने ऐसे वादे किए हैं जिन्हें पूरा करने में हरियाणा सरकार की आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है. बहरहाल स्थिति जो भी हो, दोनों पार्टियों पर जनता से लिखिति में किए गए वादों को पूरा करने का दबाव है. चूंकि चुनाव नतीजों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है इसलिए यह प्रेशर और बढ़ता नजर आ रहा है. देखना ये है कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला(DUSHYANT CHOTALA) सरकारी खजाना खाली करने वाले वादे कैसे पूरा करते हैं.

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