आईटीसी सेवलॉन स्वस्थ इंडिया ने पेश किया स्वच्छता का गुल्लक

आईटीसी सेवलॉन स्वस्थ इंडिया ने पेश किया स्वच्छता का गुल्लक

 

पर्यावरण के सुपर हीरो समझे जाने वाले एक लाख युवाओं की मदद और देशव्यापी अपील के जरिये अलग अलग तरह के कचरों के संग्रहण को प्रोत्साहित करने वाली प्लास्टिक (शुष्क अवशिष्ट) संग्रहण मुहिम चलाई गई

 

अक्टूबर, 2019: प्रधानमंत्री की अपील पर स्वच्छता ही सेवा अभियान में सहयोग करने के लिए आईटीसी की मुहिम के तहत आईटीसी के प्रमुख हाइजीन उत्पाद सेवलॉन ने स्कूली बच्चों के नेतृत्व में एक अनूठी सामाजिक पहल स्वच्छता का गुल्लक शुरू की है।

 

गुल्लक की अवधारणा इस सच्चाई की बार—बार याद दिलाती है कि कचरे को यदि उचित तरीके से अलग—अलग करके रखा जाए तो इससे भी बड़ी कीमत प्राप्त की जा सकती है, जैसे बेहतर भविष्य की आस में लोग मिट्टी के बने इस खास पात्र में बचत करते हैं। स्कूली बच्चों को सूखा कचरा जमा करने में मदद के लिए आईटीसी सेवलॉन के स्वस्थ इंडिया मिशन के तहत दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में स्वच्छता का गुल्लक अभियान चलाया जा रहा है। इस मुहिम का मकसद छात्रों को पर्यावरण अनुकूल जीवन जीने की आवश्यकता के प्रति संवेदनशील बनाना है जबकि साथ ही समुदायों में गीले और सूखे कचरे को अलग—अलग करके रखने के लिए प्रेरित करना है। इस मुहिम में एक लाख से ज्यादा छात्र हिस्सा लेने जा रहे हैं। इस मुहिम के तहत एकत्रित होने वाले सूखे कचरे को रिसाइकिल किया जाएगा।

 

आईटीसी लिमिटेड में पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स बिजनेस के चीफ एक्जीक्यूटिव समीर सत्पथी ने कहा, अवशिष्ट को मूल्यवान संसाधन में बदलना तभी संभव है जब हम सभी गीले और सूखे कचरे को अलग—अलग संग्रह करने में तत्परता दिखाएं। सेवलॉन का स्वच्छता का गुल्लक अभियान स्कूली बच्चों को अपने स्कूल, घर और आस—पड़ोस में पर्यावरण के सुपर हीरो बनने के लिए शिक्षित करने के मकसद से लाया गया है। हाइजीन अवेयरनेस आईटीसी सेवलॉन स्वस्थ इंडिया प्रोग्राम का अभिन्न हिस्सा है और स्वच्छता का गुल्लक के जरिये हम छोटे बच्चों को अधिक से अधिक पर्यावरण अनुकूल भविष्य के प्रति संवेदनशील बनाने की उम्मीद करते हैं।

 

अवशिष्ट प्रबंधन के बारे में बच्चों को शिक्षित करने का एक बड़ा पहलू अवशिष्ट प्रबधन के बारे में जानकारी रखना भी है। इस अपील को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए इस ब्रांड ने एक फिल्म भी रिलीज की है। यह वीडियो इस विचार पर जोर देता है कि वयस्कों को बुद्धिमानी से पर्यावरण के अनुकूल फैसले लेने चाहिए और यह सब घर से ही कचरों को अलग—अलग करके रखने के एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम से शुरू होता है।

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