ईमानदार  Haryana सरकार के अपने संतरी -मंत्रियों के खर्चे कैसे निकलेंगे ? जनता की तो बाद में सोचेंगे 

ईमानदार  हरियाणा सरकार के अपने संतरी -मंत्रियों के खर्चे कैसे निकलेंगे ? जनता की तो बाद में सोचेंगे

 

How will the expenses of your sentry-ministers of honest Haryana government be met? Will think of public later

-राजकुमार अग्रवाल —

चर्चा तो राज्य में इस बात को लेकर भी हो रही है की हरियाणा में बीजेपी  के सत्ता में आने के बाद राज्य का खजाना खाली हो गया जिसके बारे में राज्य के मुखिया मनोहर लाल खटटर ने खुद सार्वजनिक किया था के चलते हरियाणा में बढ़ रहे माहामारी के मरीजों का इलाज कैसे सम्भव हो पाएगा। हरियाणा में आये दिन मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है और राज्य सरकार के पास पैसे नहीं है इन हालातों में हरियाणा वासियों का क्या होगा यही चर्चा हरियाणा के  हर  कोने कोने में हो रही है। हरियाणा में कोरोना माहामारी जिस तरह धीरे धीरे अपने पाँव पसार रही है उसे लेकर आम हरयाणवी परेशान दिखाई दे रहा है क्योंकि एक तो कोरोना माहामारी का डर ऊपर से हरियाणा सरकार के अपने संतरी -मंत्रियों के खर्चे कैसे निकलेंगे ?माहामारी के इस दौर में हरियाणा की जनता का क्या होगा यह तो बाद में सोच लेंगे ?लेकिन किन  हरियाणा की जनता सरकार के खर्चों को कहाँ से पूरा करेगी यह समस्या भी हर हरयाणवी के सामने कोरोना से भी ज्यादा ताकतवर बन कर उभर रही है .हरियाणा की ईमानदार कहे जाने वाली बीजेपी गठबंधन सरकार शायद यह भूल गई की हरियाणा में लगभग साढ़े 6 साल से पहले हरियाणा में जिन भी राजनीतिक दलों ने राज किया और उन पर बीजेपी ने भ्र्ष्टाचार के आरोप लगाए ,सरकारी ख़जाने को लुटाने और उसका दुरूपयोग करने की ब्यान बाजी की इसके बावजूद किसी भी पूर्व सरकार ने नहीं कहा की हरियाणा का खजाना खाली हो गया।
हरियाणा में बीजेपी के अनुसार करोड़ो के घोटाले भी हुए इसके बावजूद हरियाणा कंगाल नहीं हुआ यही नहीं पूर्व सरकारों के समय आज के मुकाबले राज्य का राजस्व बहुत कम आता था फिर भी हरियाणा खुशहाल था लेकिन बीते साढ़े 6 सालों में बीजेपी ने हरियाणा में ऐसा क्या काम कर दिया की राज्य में इतना राजस्व आने के बाद भी हरियाणा का खजाना खाली हो गया और हरियाणा कंगाल हो गया। माना की बीजेपी अकेली दोषी नहीं है विपक्ष का समर्थन भी इस वर्तमान सरकार के साथ ही है। हरियाणा में अनेक नेता मुख्यमंत्री बने लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खटटर की तरह किसी को बार -बार बयानों से मुकर जाना और अपने ही बयानों पर यू  टर्न लेते कभी नहीं देखा यह भी हरियाणा में सुनहरे अक्षरों से लिखा जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल जो राज्य के वित्तमंत्री भी है ने बड़े खुले दिल से बिना हिचकिचाए यह स्वीकार किया की कोरोना माहामारी से निपटने के लिए हरियाणा सरकार के पास पैसे नहीं है उसे कर्ज लेना पड़ेगा जिसका समर्थन विरोधी दलों के नेताओ ने भी किया करना भी चाहिए क्योंकि सत्ता किसी एक की जागीर नहीं है आज मनोहर है कल कोई दूसरा होगा सहयोग की जरूरत उसे भी पड़ेगी। दूसरी तरफ हरियाणा की इस ईमानदार बीजेपी सरकार की बात की जाये तो मनोहर लाल ने बजट में सार्वजनिक रूप से दिखाया था की उनकी सरकार रहते हरियाणा में 21 हजार करोड़ का कर्ज बढ़ा लेकिन यह कर्ज क्यों बढ़ा ,किसलिए बढ़ा ,यह नहीं बताया आखिर क्यों ?सरकार का साथ देने वाले वही विपक्षी दल अब बीजेपी -जेजेपी सरकार पर आरोप लगा कर कह रहे है की  भाजपा-जजपा सरकार आर्थिक संकट की घड़ी में ‘जजिया कर’ वसूली बंद करे यही नहीं  अंधेरे में खट्टर सरकर ने प्रदेश के 2.5 करोड़ लोगों से जबरन वसूली का एक नया काला अध्याय लिख डाला। पूरी दुनिया में सरकारें अच्छी नीति व नीयत से लोगों की जेब में पैसा डालने का काम कर रही हैं, पर खट्टर सरकार कोरोना महामारी व आर्थिक संकट के इस काल में टैक्स पर टैक्स लगा खजाना भरने में जुटी है।

HARYANAमुनाफाखोरी और कालाबाजारी व्यापारी नहीं बल्कि सरकार के अधिकारी करवा रहें है ?

इसके सबूत देखिए:-

1.पेट्रोल-डीज़ल पर टैक्स लगा खट्टर सरकार ने 6 साल में हरियाणा की जनता से वसूले ₹42,000 करोड़। केवल पेट्रोल-डीज़ल से सालाना रिकवरी बढ़कर हो जाएगी ₹9,255 करोड़।

खट्टर सरकार ने पिछले 6 वर्षों में VAT वसूली से ₹42,000 करोड़ कमाए हैं (संलग्नक A1):-

साल वसूला गया VAT
2014-15 ₹5,112 करोड़
2015-16 ₹5,976 करोड़
2016-17 ₹7,000 करोड़
2017-18 ₹7,647 करोड़
2018-19 ₹8,286 करोड़
2019-20 ₹7,873 करोड़
योग ₹41,894 करोड़
(अप्रैल, 2019 से दिसंबर, 2019 तक VAT रिकवरी ₹5,873 करोड़ है। जनवरी, 2020 से मार्च, 2020 तक इसी रिकवरी की औसत में ₹2000करोड़ वसूली का अनुमान जोड़ा गया है।)

इसके अलावा हरियाणा सरकार GST के माध्यम से तेल रिफाईनरी से पिछले तीन सालों में ही ₹1,668 करोड़ वसूल कर चुकी है

यह भी याद रहे कि जब कांग्रेस ने 2014 में सरकार छोड़ी, तो पेट्रोल पर VAT 21 प्रतिशत था जो अब बढ़कर 26.25 प्रतिशत हो जाएगा। डीज़ल पर VAT 9.24 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 17.22 प्रतिशत हो जाएगा।

खट्टर सरकार ने कल खुद स्वीकारा है कि पेट्रोल व डीज़ल पर क्रमशः ₹1व ₹1.10 बढ़ाकर व लोगों से ₹732 करोड़ सालाना की अतिरिक्त रिकवरी करेगी। इसके अलावा, रिफाईनरी में ळैज् से ₹650 करोड़ और आएगा।2019-20 पर पेट्रोल/डीज़ल की VAT रिकवरी को ही अगर 2020-21 में अनुमान लगा लिया जाए, तो खट्टर सरकार अब अकेले पेट्रोल/डीज़ल पर टैक्स से ₹9,255 करोड़ सालाना (₹7,873 करोड़ + ₹732 करोड़ + ₹650करोड़) कमाएगी।

चौंकानेवाली बात यह है कि भारत सरकार के मुताबिक 29 अप्रैल, 2020को एक बैरल कच्चा तेल USD17.23 या ₹1304.39 पैसे में खरीदा जा रहा है (संलग्नक A3)। एक बैरल में 159 लीटर होते हैं। यानि प्रति लीटर लागत ₹8.20 है। इसके बावजूद हरियाणा में आज पेट्रोल की कीमत ₹70.21 प्रति लीटर, डीज़ल की कीमत ₹62.07 रु. प्रति लीटर है। यानि सारा मुनाफा मोदी व खट्टर सरकारें मिलकर कमा रही हैं व हरियाणा का किसान-दुकानदार-नौकरीपेशा व्यक्ति-गरीब पिस रहा है।

2.केवल बस किराया बढ़ाकर हरियाणा की जनता से ₹170 करोड़ अतिरिक्त वसूले जाएंगे।
कल जारी की गई सरकार की विज्ञप्ति के मुताबिक प्रतिदिन हरियाणा में रोडवेज़ की बसें 10,38,000 किलोमीटर चलती हैं। अगर 30 सवारियों की औसत भी लगाएं, तो 311.4 लाख पैसेंजर किलोमीटर प्रतिदिन बनते हैं। इसे अगर सालाना निकाला जाए तो यह 1,13,661 लाख पैसेंजर किलोमीटर होते हैं। और अगर 15 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोत्तरी को गिना जाए, तो जनता पर ₹170.49 करोड़ प्रतिवर्ष (113661X15 पैसा) का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

3.हरियाणा में फल और सब्जी पर कोई मार्केट फीस नहीं थी। 1प्रतिशत मार्केट फीस लगा व 1 प्रतिशत HRDF लगा भाजपा-जजपा सरकार ने गरीब की कमर तोड़ने का काम किया है।

कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि कोरोना महामारी व गंभीर आर्थिक संकट झेल रही हरियाणा की जनता पर खट्टर सरकार ‘जजिया कर’ लगाना बंद करे।

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