ऐसे दिया जा रहा है हादसे को खुला निमंत्रण !

ऐसे दिया जा रहा है हादसे को खुला निमंत्रण !

कौन होगा जिम्मेदार पालिका प्रशासन या फिर ठेकेदार

हेलीमंडी अनाज मंडी में बनाया जा रहा वाटर हार्वेस्टिंग

गहरे खतरनाक खड्डे के चारों तरफ नहीं सुरक्षा इंतजाम

फतह सिंह उजाला
पटौदी । किसी भी योजनाबद्ध विकास कार्य और परियोजना को पूरा करने के लिए तकनीकी ज्ञान होना बहुत जरूरी है । लेकिन किसी भी गंभीर हादसे को निमंत्रण देने के लिए किसी योग्यता के प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं होती है ।

कुछ ऐसा ही नजारा दिखाई दे रहा है हेली मंडी अनाज मंडी क्षेत्र में , जहां पर पालिका प्रशासन के द्वारा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण करवाया जा रहा है । यहां जो लंबा चैड़ा गहरा खड्डा खोदा गया है उसके चारों तरफ सुरक्षा के लिए किसी भी प्रकार के सुरक्षा प्रबंध, बैरिकेट्स, फेंसिंग इत्यादि नहीं की गई है । ऐसा लगता है की खुलेआम बेधड़क हादसे को निमंत्रण दिया जा रहा है । जिस स्थान पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का काम हो रहा है वह स्थान स्थानीय लोगों के मुताबिक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के अनुकूल नहीं है । वास्तव में जो अनाज मंडी में सीसी प्लेटफार्म बना है उसका ढलान रामपुर गेट की तरफ है , वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम वाले स्थान और रामपुर गेट के बीच करीब 30 फुट का फर्क है और यहां 6 से 7 इंच ढलान है । स्थानीय लोगों और दुकानदारों के मुताबिक बेहतर होता इस बार वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण कुछ और पहले अथवा रामपुर गेट क्षेत्र में वास्तविक ढलान जहां पानी अधिक समय तक खड़ा रहता है वहां किया जाता। तो और भी अधिक उपयोगी साबित हो सकता था ।

इस बात के अलावा अहम बात यह है कि जहां पर लंबा चैड़ा गहरा खतरनाक खड्डा बना हुआ है , वहां रात के समय अक्सर अंधेरा रहता है और बिजली जाने के बाद तो हालात और भी खतरनाक बन जाते हैं।  ऐसे में अनाज मंडी क्षेत्र में रात के समय गोवंश व अन्य आवारा पशु जानवर भी घूमते रहते हैं , जो कि जाने-अनजाने इस गहरे खड्डे में गिर भी सकते हैं । खड्डे के चारों तरफ किसी प्रकार की फेंसिंग नहीं होने पर यहां अंधेरा रहते हुए कोई भी वाहन चालक हादसे का शिकार हो सकता है ! अब सवाल यह है कि हादसा हो भी जाए तो उसकी जवाबदेही पालिका प्रशासन की होगी या फिर संबंधित ठेकेदार की।  न हीं इस स्थान पर संबंधित ठेकेदार अथवा निर्माण एजेंसी के बारे में किसी प्रकार का सूचना पट्ट लगाया गया है।  कौन ठेकेदार है,  कितने का यह प्रोजेक्ट है, कितने समय में पूरा होगा , आपात स्थिति में किस नंबर पर किस अधिकारी से संपर्क किया जाए ? इस प्रकार से देखा जाए तो यह और भी गंभीर लापरवाही है।  अब यह देखना प्रशासन का काम है कि वह लापरवाही में हीं अधिक विश्वास रखता है या आम जनमानस सहित बेजुबान जानवरों की सुरक्षा की भी चिंता करता है ।

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