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ऐसे में लड़कियो को क्या करना चाहिए? jab बस, ट्रेन में भीड़ भाड़ का फायदा उठा कर,

बस, ट्रेन में भीड़ भाड़ का फायदा उठा कर लोग लड़कियो को गलत जगह क्यों छूने की कोशिश करते हैं? ऐसे में लड़कियो को क्या करना चाहिए?
delhi (atal hind)पुरुषों का स्त्रियों के प्रति शारीरिक आकर्षण स्वाभाविक व प्राकृतिक है। वे सदैव स्त्रियों से शारीरिक संबंध बनाने के लिये इच्छुक रहते हैं जिसका पहला कदम होता है उसे छूकर ही संतोष प्राप्त कर लेना।

सामाजिक नियमों व मर्यादित आचरण की अपेक्षाओं के अनुसार ऐसा करना ग़लत है जिसके लिये माता-पिता अपने बच्चों को उनके शैशवकाल से ही उचित संस्कार देने का प्रयत्न करते रहते हैं किन्तु किशोरावस्था में जब शरीर में हार्मोनों का प्रवाह प्रारंभ हो जाता है तो अपेक्षाकृत कमजोर संस्कार वाले लड़के बहक जाते हैं और वे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लड़कियों के शरीर को स्पर्श करने की चेष्टा करने से बाज नहीं आते हैं।
यह प्रवृत्ति केवल कम आयु के लड़कों में ही नहीं बल्कि सभी आयुवर्ग के पुरुषों में पाई जाती है। मेले में या मंदिर में परिक्रमा क्षेत्र में दर्शन करने को आई भीड़ में भी अधेड़ व वृद्ध पुरुष भी स्त्रियों के शरीर को अनजान बनते हुये पीछे से धक्का देते हुये स्पर्श करने की चेष्टा करते हैं और कुछ विकृत मानसिकता के पुरुष तो भीड़ का लाभ उठाते हुये हाथ बढ़ा कर भी स्त्रियों के शरीर को न केवल छूते हैं बल्कि उसे दबाने या भींचने का भी उपक्रम करते हैं।

कुछ विकृत मानसिकता के वृद्ध पुरुष तो युवतियों को आशीर्वाद देने के बहाने या उनका हौसला बढ़ाने के बहाने उनकी पीठ थपथपाते हुये उनके अधोवस्त्रों को महसूस करते हैं अथवा हग करने के बहाने उनके शरीर के कोमल अंगों को स्पर्श करने का उपाय करते हैं।

जहाँ तक यह प्रश्न है कि ऐसी परिस्थितियों में लड़कियों को क्या करना चाहिये तो मेरी समझ से उन्हें पुरुष मानसिकता को समझते हुये पहले तो ऐसी परिस्थितियों से बचना चाहिये जहाँ इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि कोई परिचित या अपरिचित व्यक्ति उनके शरीर को छू सके जैसे कि उन्हें भीड़भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों पर जैसे कि मेले व प्रदर्शनियों इत्यादि में जाने से बचना चाहिये।

लड़कियों को चाहिये कि वे यथासंभव वाहन चलाना सीख कर स्वयं के वाहन पर ही यात्रा करें। उन्हें अपने बॉयफ़्रेंड की बाइक की पीछे वाली सीट पर उससे चिपक कर बैठने से तो कोई नहीं रोक सकता है क्योंकि यह उनका स्वयं का निर्णय होता है और उनकी सहमति से ही होता है किन्तु अन्य पुरुषों के साथ दोपहिया वाहनों पर यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिये।

सुनने में भले ही अच्छा व लगे किन्तु कटु सत्य यही है कि भीड़भाड़ वाली बसों में जिनमें इतनी भीड़ होती है कि स्त्री हों या पुरुष उन्हें इतना चिपक कर खड़ा होना पड़ता है कि उन्हें सीना फुला कर साँस लेने की भी जगह नहीं होती है, यह संभव नहीं है कि लड़कियों का शरीर पुरुषों के शरीर से अछूता रह जाये। धड़ को धड़ से छू जाने से तो नहीं बचा जा सकता है किन्तु यदि कोई व्यक्ति अपने हाथ से जानबूझ कर स्त्री के शरीर को छूना चाहता है तो उसका विरोध अवश्य किया जाना चाहिये।

संभवत: अब लोगों ने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है और कुछ विशेष मामलों को छोड़ कर जिनमें लोग हद पार कर देते हैं, अब लोग ऐसी छोटी मोटी बातों को अनदेखा कर देने में ही भलाई समझते हैं और कुछ अपवाद स्वरूप प्रकरणों में तो लोग ऐसी परिस्थितियों में आनंद भी उठाने लगे हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति ATAL HIND उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार #ATALHIND के नहीं हैं, तथा atal hind उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

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