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ऑन स्‍क्रीन हिट जोड़ियां – जो साथ थे पर साथ नहीं…

ऑन स्‍क्रीन हिट जोड़ियां – जो साथ थे पर साथ नहीं…

===ज्योतिष आचार्या रेखा कल्पदेव======

वर्षों बीतने पर भी बॉलीवुड का रंग फिका ना पड़ा। समय के साथ बॉलीवुड की खूबसुरती में निखार आता ही जा रहा है। इस निखार में चार चांद लगाने का काम यहां एक साथ काम करने वाली जोड़ियां करती है। इन जोड़ियों को सिल्वर स्क्रीन पर देख हम सभी हैरान, परेशान हो जाते है, और कई बार तो इनके अभिनय में इतनी वास्तविक्ता होती है कि इनका अभिनय, इनका नाचना गाना, इनका रोमांस करना, इनका विवाह करना, सब जीवंत लगता है। बॉलीवुड की सिल्वर स्क्रीन पर एक साथ काम करते करते कुछ जोड़ियां ऐसी बनती है की यकीं ही नहीं होता कि वो अभिनय कर रही है।

बॉलीवुड कुछ चीजें पूरी तरह से करता है – हमें बड़े सपने देखने के लिए प्रभावित करता है और हमारे प्रेम जीवन से हमें अवास्तविक अपेक्षाएं कराता है। हालांकि बॉलीवुड की कहानियां किसी पागलपन से कम नहीं होती, लेकिन हम शिकायत नहीं कर सकते क्योंकि हम पागल प्रशंसक हैं और पागल प्रशंसक शिकायत नहीं करते हैं। प्रशंसक सिर्फ अपने पसंदीदा सितारों की बातों को फोलो करते है। हालांकि हर फिल्म के साथ, हमारी उम्मीदें बदल जाती हैं, कुछ ऑन-स्क्रीन युगल हैं जिन्होंने सदैव उसी रुप में देखना चाहते है।

जो पर्दे पर दिखता है वही सच लगता है। अपने बेमिशाल अभिनय से ये जोडियां इस कदर वास्तविक लगती है, की वास्तविक जोड़ियों को भी पीछे छोड़ देती है। सत्तर के दशक से लेकर आज तक बॉलीवुड अनेक जोड़ियां लोगों के दिलों में अपनी जगह बना चुकी है। इन्हें एक दूसरे से अलग कोई देखना ही नहीं चाहता। आज हम ऐसी ही कुछ जोड़ियों की चर्चा करने जा रहे हैं जो ऑन स्‍क्रीन हिट जोड़ियां साबित हुई परन्तु जोड़ी नहीं बन सकी।

राज कपूर और नरगिस
“कुछ भी नहीं था जो उन्हें रोक सकता था, कुछ भी नहीं जो उन्हें अलग कर सकता था। उनके बीच कोई रेखा नहीं थी, कोई डॉट्स नहीं थे। वह सब कुछ था जिसका जीवन उसके लिए था ।।। प्यार, झगड़े, आंसू, झगड़े। सुलह, एकता – वे एक आत्मा की तरह थे। हर सफल आदमी के पीछे एक औरत होती है। हिंदी फिल्म उद्योग के अंतिम शोमैन- राज कपूर के लिए, यह नरगिस थी। वह केवल उनकी नायिका नहीं थीं, वह उनकी प्रेरणा थीं, उनका जूनुन थीं। उनकी स्क्रीन पेयरिंग और उनकी अनोखी केमिस्ट्री ने उनकी फ़िल्मों को क्लासिक्स में बनाने का एक लंबा रास्ता तय किया। किन्हीं कारणों से दोनों विवाह सूत्र में नहीं बन सके हालांकि दोनों एक दूसरे के साथ ऑन स्‍क्रीन बेस्ट जोड़ी थी। यही वजह है कि एक का नाम आते ही दूसरे का नाम अपनेआप जुबां पर आ ही जाता है।

दिलीप कुमार और वैजयंती माला
दिलीप कुमार ने अपने समय की अनेक अभिनेत्रियों के साथ अभिनय किया, जिसमें से सबसे अधिक उनकी जोड़ी वैजयंती माला के साथ सफल रही। दिलीप कुमार ने – देवदास, नया दौर, मधुमती, पायघम, गंगा जमुना और नेता फिल्म में वैजयंतीमाला के साथ अभिनय किया। इन दोनों की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री लोगों को बेहद पसंद थी। लेकिन दोनों का किसी तरह का अफेयर नहीं था। सूत्रों की माने तो दोनों बालीवुड की सफल जोड़ियों में से एक थे परन्तु दोनों में अच्छी मित्रता भी नहीं थी, यहां तक की दोनों एक-दूसरे से बात तक नहीं करते थे। हां दोनों के जीवन साथी एक दूसरे के अच्छे मित्र अवश्य थे।

राजेश खन्‍ना शर्मिला टैगोर

रोमांस के बादशाह राजेश खन्ना ने 1960 और 70 के दशक के दौरान लगभग सभी बॉलीवुड की अग्रणी महिलाओं के साथ काम किया है और उनमें से एक अभिनेत्री शर्मिला टैगोर थी, शर्मिला टैगोर के साथ उनकी सबसे बेस्ट केमिस्ट्री थी। राजेश खन्ना की बॉक्स ऑफिस पर जीत का सिलसिला 1969 की शक्ति सामंत फिल्म आराधना से शुरू हुआ। सबसे सफल ऑनस्क्रीन जोड़ियों में से एक, राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर ने सफर और अमर प्रेम जैसी अन्य हिट फिल्मों में अभिनय किया। लगातार करीब छह सुपरहिट फिल्‍में देने वाली बॉलीवुड जोड़ी रही है शर्मिला टैगोर और राजेश खन्‍ना की। हालांकि इनके बीच किसी अफेयर की खबरें नहीं आई।

अनिल कपूर और श्री देवी
अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित भले ही आज देवर-भाभी के रिश्ते में हों, परन्तु यह जोड़ी बालीवुड़ की आन स्क्रिन सफल जोड़ियों में से एक रही है। माधुरी दीक्षित अपने अभिनय से अनिली कपूर को पूरी तरह से प्रतिस्पर्धा देती थी। दोनों ने एक साथ मिस्टर इंडिया और लम्हे जैसी फिल्में दीं। आन स्क्रीन दोनों का तालमेल देखने योग्य होता था।

अमिताभ बच्‍चन और रेखा
यह जोड़ी सिल्वर स्क्रीन पर जब भी आई, लोगों के लिए यादगार बनकर रह गई। जिस भी फिल्म में ये दोनों एक साथ थे, दोनों का आपसी तालमेल सराहनीय रहा। आन स्क्रीन सबसे खूबसुरत और यादगार जोड़ियों की श्रेणी में इनका नाम अग्रणी रहा है। फिल्मी जीवन में दोनों का साथ रहा परन्तु वास्तविक जीवन में यह साथ न बन सका।

आमिर खान और जूही चावला
आमिर खान और जूही चावला दोनों ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत एक साथ की थी। सबसे अच्छी बात यह थी कि दोनों बहुत मनमोहक और मासूम दिखते थे। जूही ‘चुलबुली लड़की’ और आमिर खान की छवि ‘चॉकलेट बॉय’ की थी। अपनी पहली ही फिल्म से यह जोड़ी लोकप्रिय हो गई थी। आमिर खान और जूही चावला ने फिल्‍म कयामत से कयामत में एक साथ डेब्‍यु किया और तब से लेकर आज तक वो बॉलीवुड की कामयाब सबसे क्‍यूट जोड़ी मानी जाती है।

दीप्ति नवल – फारूक शेख
वह कभी किसी ‘हीरो’ के जैसा नहीं था और ना वह किसी हीरोइन के जैसे दिखती थी। फिर भी दोनों के अभिनय में कुछ ऐसा था कि दोनों वास्तविक युगल जैसे लगते थे। एक समय था कि सामान्य और वास्तविक दिखने वाले इस फिल्मी कपल ने सिल्वर स्क्रीन पर अपना कब्जा जमा लिया था। उनकी वास्तविकता का यह आलम था कि दोनों फिल्म के आम दर्शकों जैसे ही दिखते थे।
सच्चाई के एकदम निकट दिखने और लगने वाली यह जोड़ी अपने समय की सफल जोड़ियों में से थी।

वहीदा रहमान – गुरुदत्त
भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग में गुरुदत्त और वहीदा रहमान ने साहिब, बीवी और गुलाम, प्यासा और कागज़ के फूल जैसी कुछ बेहतरीन फिल्में दीं थी। इस समय में इस जोड़ी के द्वारा बनाई गई फिल्में इस कदर शानदार थी कि आज के अभिनेता इनसे बहुत कुछ सिखते है। दोनों का अभिनय प्रखर, भावनात्मक और लयात्मक रहता था। आज भी इन दोनों की जोड़ी को अभी तक की सबसे प्रतिष्ठित ऑन-स्क्रीन जोड़ी में से एक कहा जाता है।

काजोल – शाहरुख खान
बॉलीवुड में सबसे लोकप्रिय जोड़ों में से एक काजोल और शाहरुख खान, दोनों पेड़ों के चारों ओर नृत्य करते हुए एक सपने के सच होने जैसे दिखते हैं। इसी सपने के चलते देश की आधी आबादी को अब भी उम्मीद है कि उन्हें अपने जीवन का प्यार ट्रेन या सरसों के खेत में मिलेगा। इस जोड़े ने यह भी सुनिश्चित किया कि लोग कभी इस बात पर विश्वास न करें कि एक लड़का और लड़की दोस्त हो सकते हैं (खासकर अगर वे बास्केटबॉल खेलते हैं)। रोमांस, मित्रता और प्रेम को एक नई ऊंचाईयां देने वाले काजोल और शाहरुख खान दोनों की जोड़ी पिछले दशक की सफल जोड़ी रही है। दोनों की फिल्‍म दिल वाले दुल्‍हनिया ले जायेंगे आज तक सिनेमा घरों में चल रही है।

कैटरीना कैफ – अक्षय कुमार
वह मोटा और सख्त देसी लड़का है और वह सुंदर एन आर आई है और साथ में होते है तो गजब की जोड़ी दिखते है। कॉमेडी से लेकर ड्रामा से लेकर एक्शन तक, उनकी केमिस्ट्री को हर विधा में परफेक्ट लगते है। अपने अभिनय से प्रभावित करने में कभी असफल नहीं होते हैं। दोनों ने एक साथ अधिकतम फिल्में की हैं और वे एक अच्छा तालमेल ऑफ स्क्रीन भी साझा करते हैं।

मधुबाला – देव आनंद
मधुबाला और देव आनंद, व्यक्तिगत रूप से, भारत के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक थे। उन्होंने रोमांस को एक नया अर्थ दिया और उनके रोमांटिक दृश्यों के साथ आत्मीय गीतों ने निश्चित रूप से उन्हें लोकप्रिय बनाने में बहुत मदद की। यद्यपि उनकी मूवि ब्लेक एंड व्हाईट के समय की थी लेकिन उनकी फिल्में अब तक की सबसे जीवंत फिल्में थीं और उनकी जोड़ी आज भी जहन में कैद है।

प्रेम विवाह के ज्योतिषीय योग
आइये अब जानते है की ऐसे कौन से ज्योतिषीय योग है जिनके चलते कार्यक्षेत्र में काम करते हुए व्यक्ति को अपने सहयोगियों के साथ प्रेम हो जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र यह कहता है की पंचम भाव प्रेम का भाव है, दशम भाव कर्म भाव है और बुध को ग्रहों में सहयोगियों का कारक ग्रह माना गया है। इस प्रकार इन तीनों का आपसी सम्बन्ध होना, कार्यक्षेत्र में प्रेम की संभावनाएं बनाता है और आगे जाकर यदि पंचमेश के सप्तम या नवम भाव से प्रत्यक्ष योग बनते है तो व्यक्ति का प्रेम विवाह का रूप लेता है। इन योगों के साथ साथ जन्मपत्री में शुक्र और गुरु ग्रह की स्थिति भी सुखद होनी चाहिए।

· पांचवें घर को रोमांस का घर माना जाता है। केतु एक पृथकतावादी ग्रह है और 5 वें भाव में केतु संबंध तोड़ने का कारण बन सकता है। इसी तरह यहाँ सूर्य की स्थिति प्रेम रिश्तों के बिखराव का कारण बनता है। साथ ही सूर्य की यहां स्थिति रिश्तों के टूटने की वजह अत्यधिक प्रतिबंध होते है।

· वैसे तो शुक्र और चंद्रमा का साथ स्नेहपूर्ण रिश्तों के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन अन्य सभी ग्रहों की भूमिका इसमें कुछ स्तर तक अहम मानी जाती है क्योंकि एक रिश्ते के सफल होने में सभी ग्रह अपनी कुछ ना कुछ भूमिका निभाते है। उदाहरण के लिए बुध प्रेम संबंधों में आपसी बातचीत को सफल बनाता है। फिर भी चंद्रमा और शुक्र इसमें सबसे महत्वपूर्ण हैं क्योंकि चंद्रमा निस्वार्थ आराधना, समर्पित और गहरा प्रेम लाता है। शुक्र रिश्ते में आकर्षण लाता है। राहु इनमें भ्रम की स्थिति देता है।

· तीसरे घर को पारंपरिक रूप से लव रोमांस का भाव नहीं माना गया है, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति के साथ जुड़ने के लिए प्रयास करना, आपसी संचार, डेटिंग, बातचीत, झगड़ा आदि सभी इसी भाव से देखे जाते हैं। यहां शुक्र और राहु का होना कई रिश्ते दे सकता है। शुक्र के साथ मंगल संबंधों में अनैतिकता दे सकता है।

· 6 वां भाव स्वतंत्रता, व्यक्तित्व, वाद-विवाद और विलक्षणता का घर है। एक मजबूत 6 वां भाव रिश्ते की समस्याओं और कई रिश्तों का कारण बन सकता है। यहां राहु, मंगल या शुक्र का होना रिश्तों में दरार दे सकता हैं।

· इसी तरह 8 वां दीर्घकालिक संबंधों और स्वार्थ के कारण रिश्ते टूटने का भाव है।

· ग्रह योगों में शुक्र + मंगल, राहु + शुक्र, शनि + शुक्र कुछ योग हैं जो अक्सर रिश्ते को तोड़ देते हैं।
· कुछ ग्रह स्वाभाविक रूप से अपनी दशा में व्यक्ति को व्यक्ति को प्रेम संबंधों के लिए प्रेरित करते हैं. बुध बुद्धि का कारक ग्रह है। बुध की दशा के दौरान आपका मन बेचैन हो जाता है। इसलिए इस दशा के दौरान प्यार में पड़ने की प्रबल संभावनाएं रहती है। राहु की दशा प्रेम के लिए उत्प्रेरक का काम करता है। इस दशा में स्थापित रिश्ते जल्द शुरू होते हैं और भावुकता भी अधिक होती है, लेकिन वे लंबे समय तक नहीं रहते हैं। राहु सही और गलत के बीच का अंतर नहीं जानता है। इसलिए, एक व्यक्ति राहु की दशा में भ्रमित हो गलत रिश्ते भी रख सकता है.
· शुक्र ग्रह को प्यार का कारक ग्रह माना जाता है। शुक्र की दशा में प्यार की तलाश पूरी होने की अधिक संभावनाएं बनती है. चंद्रमा मन और हृदय का कारक ग्रह है। इसीलिए इसे एक बैचेनी देने वाला ग्रह भी माना जाता है। इसलिए चंद्रमा के दशा के दौरान व्यक्ति का मन और दिल बेचैन रहता है और इस स्थिति में प्यार में पड़ने की प्रबल संभावनाएं बनती है। अधिकांश प्रेम संबंध बुध, राहु, शुक्र और चंद्रमा की दशा में इन ग्रहों के किसी भी भाव में होने की स्थिति में बनते है.
· कुंडली में सातवें घर को शादी के भाव के रूप में जाना जाता है। यदि सप्तम भाव या सप्तम भाव के स्वामी का लग्न, पंचम भाव, पंचम भाव के स्वामी, नवम या नवमेश के साथ संबंध न हो तो प्रेम विवाह में परिवर्तित नहीं होता है।
· पंचम भाव का स्वामी जब नवम भाव में मौजूद होता है या जब नवम भाव का स्वामी पंचम भाव में होता है तब भी प्रेम विवाह संभव नहीं होता है।
· कुंडली में छठा घर हिंसा का कारक है। कुंडली में छठे भाव की दशा चल रही हो तो प्रेम संबंध सफल नहीं होते। आठवें घर की दशा या अष्टम भाव में मौजूद ग्रहों दशा के दौरान भी प्रेम संबंध समाप्त हो जाते हैं।
· बारहवें घर को खर्चों के घर के रूप में जाना जाता है। बारहवें भाव के स्वामी की दशा के दौरान भी रिश्ते समाप्त हो सकते हैं। शनि को त्याग का कारक ग्रह माना जाता है। शनि की दशा के दौरान व्यक्ति का मन और दिल बेचैन हो सकता है और वह प्यार की कमी के कारण उदासीन हो सकता है। जिसके कारण, एक रिश्ता धीरे-धीरे समाप्त हो सकता है।
· यदि पंचम भाव कमजोर या पीड़ित हो, मतलब यदि पंचम भाव या पंचम भाव का स्वामी राहु, केतु, शनि या मंगल जैसे अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो तो प्रेम संबंध शुरू हो सकता है, लेकिन यह रिश्ता अधिक समय तक नहीं टिकेगा। एक लंबे समय तक चलने के बाद यह शादी से पहले टूट जाता है.
· सूर्य को अलगाव का ग्रह माना जाता है। इसलिए, यदि कुंडली में सूर्य की दशा चल रही हो या यदि सूर्य पंचम भाव में मौजूद हो, तो एक रिश्ता समाप्त हो सकता है।

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