ओम प्रकाश धनखड़ और अभिमन्यु प्रदेश प्रधान बनते तो मुख्यमंत्री से इनका तालमेल अधिक अच्छा नहीं रहता। इसलिए फिर से सुभाष बराला ! औपचारिक घोषणा बाकी  

ओम प्रकाश धनखड़ और अभिमन्यु प्रदेश प्रधान बनते तो मुख्यमंत्री से इनका तालमेल अधिक अच्छा नहीं रहता। इसलिए फिर से सुभाष बराला ! औपचारिक घोषणा बाकी
-राजकुमार अग्रवाल –
चंडीगढ़। हरियाणा में भाजपा के संगठन चुनावों की प्रक्रिया जारी है। विधानसभा का बजट सत्र की आवाज में पार्टी के प्रदेश प्रधान के चुनाव की प्रक्रिया की धमक कम सुनाई दे रही थी। लेकिन इसी बीच भाजपा ने जिला प्रधानों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर ली। जिला प्रधानों के चुनाव के लिए नियुक्त प्रभारियों ने जिलों में जाकर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की राय जानी है। पर कहा यह जा रहा है कि राय सुमारी एक सामान्य प्रक्रिया है, जो पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए चला रही है। अन्यथा भाजपा ने अपने जिलों प्रधानों के नामों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है। जिलों के प्रधानों के नाम पार्टी आलाकमान ने तय किए हुए हैं और कभी भी उनकी घोषणा की जा रही है। राय सुमारी तो महज एक दिखावा है, जो पार्टी कर रही है। जबकि कहने वाले तो यह भी कह रहे हैं कि राय सुमारी के समय किसी प्रत्याशी के नाम का विरोध भी पार्टी योज्यता का आधार बनायेगी।

 

पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि विरोध का अर्थ है कि नेता काम कर रहा है। अब तो यह भी कोई मायने नहीं रखते हैं कि राय सुमारी में किसको कितना समर्थन मिला है। भाजपा से जुड़े सूत्रों के अनुसार जिला प्रधानों के नामों का ऐलान प्रदेश प्रधान की घोषणा के बाद होगा। भाजपा से जुड़े सूत्र कहते हैं कि पार्टी के प्रदेश प्रधान के नाम की घोषणा बीस मार्च से पहले हो जायेगी। लेकिन यह तय माना जा रहा है कि भाजपा का प्रधान जाट वर्ग से होगा। क्योकि वर्तमान हालातों में और विधानसभा चुनाव के परिणामों से सीख लेते हुए पार्टी ने यह निर्णय लिया है कि पार्टी का प्रदेश प्रधान जाट समुदाय से ही बनाया जाए।

 

 

भाजपा के दिल्ली दरबार से जुड़े सूत्र कहते हैं कि पार्टी के वर्तमान प्रदेश प्रधान सुभाष बराला को ही एक बार फिर से प्रदेश प्रधान पद की जिम्मेदारी सौंपी जायेगी। इसके पिछे एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल भी यही चाहते हैं कि सुभाष बराला को ही दोबारा से प्रदेश प्रधान बना दिया जाए। कहते हैं कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने पार्टी के शीर्ष नेताओं को यह समझाया है कि प्रदेश प्रधान और मुख्यमंत्री का तालमेल होना पार्टी संगठन के हित में है। सर्वदिति है कि सुभाष बराला मुख्यमंत्री के अति विश्वसनीय है। परन्तु बीच में बराला की बजाए महीपाल ढाड़ा का नाम लिया जाने लगा था।

 

 

भाजपाई सूत्र बताते हैं कि पूर्व कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ और पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु भी जाट हैं और उनको संगठन का बड़ा अनुभव होने के बावजूद इन दोनों का नाम इसलिए कट जाता है कि इन देानो नेताओं का राजनैतिक कद बड़ा है। अगर यें दोनों चुनाव जीत जाते तो मुख्यमंत्री पद के लिए सशक्त दावेदारी करते। इसलिए माना जाता है कि कदावर नेताओं को प्रदेश प्रधान का पद न देकर उनको बड़ा औहदा से संतुष्ट किया जायेगा। वैसे यें प्रदेश प्रधान बनते तो मुख्यमंत्री से इनका तालमेल अधिक अच्छा नहीं रहता। इसलिए सुभाष बाराला को ही फिर से प्रदेश प्रधान बनाया जा सकता है। बराला को प्रदेश प्रधान दोबारा बनवाने के लिए मुख्यमंत्री ने भी अपनी पूरी ताकत लगाई हुई है। इसलिए समझा जाता है कि पार्टी बराला को ही दूसरा मौके दे दें।

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