कितना बड़ा धोखा मानवता के नाम पर,बाबा भारती और एम्बुलेंस चालक

कितना बड़ा धोखा मानवता के नाम पर,बाबा भारती और एम्बुलेंस चालक

           

                #-कमलेश भारतीय

 

 

बचपन में सबने बाबा भारती की कहानी पाठ्यपुस्तक में पढ़ी होगी और आज तक भूली नहीं होगी । थोड़े में याद दिला देता हूं । बाबा भारती के पास बहुत शानदार घोड़ा था । जिसकी चर्चा दूर दूर तक फैली थी । एक डाकू का मन आ गया उस घोड़े पर । भेष बदल कर बाबा भारती की राह में रोगी बन कर लेट गया । बाबा भारती ने दया कर उसे घोड़े पर बिठा लिया । कुछ दूरी के बाद डाकू ने बाबा भारती को उतार कर घोड़ा भगाने की सोची तब बाबा भारती ने कहा कि घोड़ा ले जाओ खुशी से लेकिन तुमने घोड़ा इस तरह रोगी बन कर छीना यह बात मत बताना । इस पर डाकू ने पूछा कि ऐसा क्यों ? बाबा ने कहा कि यदि तुमने यह बात फैला दी तो आगे से लोग रोगी की मदद करना छोड़ देंगे । इसलिए । बाद में रात के अंधेरे में डाकू घोड़ा वापस बांध गया ।

ह सतयुग रहा होगा या डाकू सतयुग का रहा होगा । पर आज कोरोना के चलते लोग कलयुग के हो रहे हैं । पहले तो इस मजबूरी के समय में फल , सब्जियों , दवाइयों और अन्य जरूरी चीजों के दाम बढाए जा रहे हैं । फिर मास्क और सेनेटाजर ब्लैक हो रहे हैं । ऊपर से जुल्म यह कि अब तो रोगियों को ले जाने वाले एम्बुलेंस चालक लोगों की मजबूरी का फायदा उठा कर मनमाने दाम बसूल कर मोटी कमाई कर रहे हैं और यह बात स्टिंग में सामने आने लगी है । कोरोना से लगे कर्फ्यू में आम वाहन तो बिना प्रशासन के परमिट के चल नहीं सकते तो ऐसे में एम्बुलेंस को कौन रोक सकता है ? वो भी बिना परमिट के । बस । हो गयी मनमानी वसूली शुरू ।

 

बिना मरीज के भी मरीज बन पीछे की सीट पर लेट जाओ और जहां पहुंचना है पैसे दो और पहुंचा देंगे । कितना बड़ा धोखा मानवता के नाम पर । अब जब भेद खुल गया तो बताइए इमर्जेंसी में कौन सही मरीज को एम्बुलेंस में जाने देगा ? कितना बड़ा अनर्थ किया इन एम्बुलेंस चालकों ने । वे नहीं जानते । क्राइस्ट ने ठीक ही कहा था कि ये लोग नहीं जानते कि क्या कर रहे हैं ? एक भी गलत दिशा में उठाया कदम समाज को कहां ले जायेगा ? ज़रा सोचिए । वैसे तो कहते हैं कि न जाने नारायण किस भेष में मिल जाए पर अब तो कहना पड़ेगा कि न जाने डाकू किस भेष में मिल जाए ।

बाबूजी बड़े धोखे हैं इस राह में

बाबूजी ज़रा संभालना ।

बाबूजी धीरे चलना ।

9416047075

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