किसानों के सामाजिक भाईचारे ने मोदी और मनोहर सरकार को  दिया मुंहतोड़ जवाब

किसानों के सामाजिक भाईचारे ने मोदी और मनोहर सरकार को  दिया मुंहतोड़ जवाब

किसान आंदोलन की फंडिंग की  ED से जांच कराने वाली बीजेपी  सरकार को यह तस्वीरें देखकर खुद के फैसले पर शर्म करनी चाहिए

=अटल हिन्द ब्यूरो =

Social brotherhood of farmers gave a befitting reply to Modi and Manohar Sarkar

The BJP government, which conducted an ED investigation into the funding of the farmer movement, should be

ashamed of its decision after seeing these pictures.

मकडौली (रोहतक)। देश में  मोदी बीजेपी और हरियाणा में बीजेपी=जेजेपी   सरकार पिछले 3 महीने से चल रहे हैं किसान आंदोलन को पाकिस्तान, चीन और खालिस्तान फंडेड करार देती आ रही है । और  सच्चाई से मुंह फेरते हुए आंदोलन के बारे में साजिश रचने और झूठ बोलने का काम ही कर रही है।किसान आंदोलन को चलाने के लिए किसी बाहरी फंड की जरूरत नहीं है क्योंकि हरियाणा, पंजाब और उत्तरप्रदेश के हजारों गांव से हर घर से पैसे, सब्जी, लकड़ी, दाल, चावल, आटा, नमक-मिर्च, घी और दूध की सप्लाई लगातार आंदोलनों स्थलों की जा रही है। मोदी सरकार की ED को अगर आंदोलन की फंडिंग की सच्चाई जाननी है तो उसे सुबह-सुबह दिल्ली के चारों ओर मौजूद गांवों में 6-7 बजे जाकर देखना चाहिए कि किस तरह किसानों के लिए घर घर से दूध, सब्जियां और दूसरा सम्मान आता है।यह तस्वीरें रोहतक जिले के मकड़ौली गांव की हैं जहां पर सुबह-सुबह सैकड़ों की संख्या में किसान अपने घर से दुध, सब्जियां लाकर टिकरी बॉर्डर पर जाने वाले ट्रैक्टर को सौंप देते हैं। ऐसे सामाजिक भाईचारे की मिसाल पूरे विश्व में कोई दूसरी नहीं है किसान आंदोलन को हर किसान का परिवार अपना मान कर लड़ रहा है और हर मुमकिन मदद दे रहा है। इसीलिए यह आंदोलन थकने और रुकने के बजाय लगातार मजबूत हो रहा है।


इस तरह की तस्वीरें जो सिर्फ तस्वीरें नहीं बल्कि जीती जागती हकीकत है जो देश की बीजेपी सरकार (भारत सरकार नहीं )और भारत के इतिहास में  सबसे कम पंसद की जाने वाली हरियाणा सरकार की साजिशों को तार-तार करते हुए लाखों किसान कृषि कानूनों के खिलाफ लगातार दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे हैं और कृषि के रद्द हुए बिना घर वापस नहीं जाने का ऐलान कर चुके हैं।

किसान आंदोलन में एक नया मोड़
किसान आंदोलन में एक नया मोड़ टूल किट आ गया है। हम उसी डिजिटल टूलकिट मामले की बात कर रहे हैं जो इस समय पूरे देश की सुर्खियां बना हुआ है जिसमें दिशा रवि एक 21 साल की लड़की को गिरफ्तार किया गया है। दिशा रवि एक पर्यावरण कार्यकर्ता है। तो उसी टूलकिट मामले को लेकर दिल्ली महिला आयोग  गिरफ्तार पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि का बचाव करने उनके पक्ष में उतरा है।
दिल्ली महिला आयोग ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक नोटिस जारी किया है। तो वही दिल्ली पुलिस का दावा है कि खालिस्तानी संगठन पीजेएफ के साथ दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु ने जमू पर मीटिंग की थी। जिसके सबूत मिले हैं।

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