किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए भाजपा का फार्मूला,डराना-धमकाना-बहकाना

डराना-धमकाना-बहकाना  किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए भाजपा का फार्मूला

=अटल हिन्द ब्यूरो =

BJP’s formula to end the intimidation-bullying-misleading farmer movement

गुरुग्राम। 2 दिन पहले दिल्ली भाजपा मुख्यालय में गृह मंत्री अमित शाह के साथ कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करे लाखों किसानों को निपटाने के लिए गुरु मंत्र दिए गए।
गुरु मंत्रों का निचोड़ ही है निकल रहा है कि किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए भाजपा ने डराने-धमकाने और बहकाने के तीन फार्मूलों को आजमाया है।


किसानों को डराने का अभियान शुरू
आज उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सर्व खाप के मुख्यालय सौरम गांव में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने सर्वखाप प्रधान के साथ बातचीत करने की कोशिश की। उनके मना करने के बाद जब दबाव डालने की कोशिश की गई तो किसान भड़क गए। ऐसे में केंद्रीय मंत्री के सुरक्षाकर्मियों और भाजपा समर्थकों ने किसानों से मारपीट करके उन्हें डराने का काम किया। यानी भाजपा किसानों को डराकर आंदोलन खत्म करने की पहली रणनीति पर काम कर रही है।
धमकाने की पॉलिसी से मुंह बंद करने की रणनीति
किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे पत्रकारों, एनजीओ के वर्करों और दूसरे लोगों को देशद्रोह की धाराओं का डर दिखाकर मुंह बंद करने की दूसरी रणनीति सरकार की तरफ आजमाई जा रही है। इस बारे में दिल्ली की कोर्ट ने सरकार पर टिप्पणी भी की कि देशद्रोह के नाम पर विरोधियों को चुप्प कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
किसानों को बहकाने की रणनीति
सोशल मीडिया पर आज गुरुग्राम में हुई हरियाणा भाजपा की बैठक का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक नेता यह कह रहा है कि किसानों के बहकाने के 2-4 मंत्रों पर भी चर्चा होनी चाहिए। भाजपा नेता पार्टी अध्यक्ष से केंद्रीय मंत्री व सांसदों के साथ बैठक में किसानों को “बहकाने के मंत्र” माँग रहा है। साफ़ कह रहा है कि आपकी बात सही है कि किसान समझेंगे नहीं बहकाने ही पड़ेंगे।
इस वीडियो से यह साफ हो गया किसानों के आंदोलन को खत्म करने के लिए अब झूठी बातों के जरिए तीसरी रणनीति के तहत किसानों को बहकाने का काम किया जाएगा।
अमित शाह के साथ बैठक के बाद उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में भाजपा की चल रही गतिविधियां यह साफ इशारा कर रही है कि सरकार कृषि कानूनों को किसी भी हाल में वापस नहीं लेने वाली है।
इसके विपरीत किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए जहां खापों के चौधरियों को मनाने का काम किया जाएगा, वहीं किसानों को खुद मारपीट करके मुकदमे दर्ज करके डराने का काम किया जाएगा।
आंदोलन का समर्थन कर रहे लोगों को झूठे मुकदमों के जरिए चुप कराया जाएगा और भोले-भाले किसानों को कृषि कानूनों पर बेवकूफ बनाने और बहकाने का काम किया जाएगा।
किसानों की मांग मानने की बजाय भाजपा की यह छोटी सोच यह बता रही है कि उसे किसानों के भले और सुख समृद्धि से कोई वास्ता नहीं है बल्कि सत्ता अपने अहंकार में अपने तुगलकी कानूनों को लागू रखने और बड़े घरानों को फायदा देने की 1 सूत्री सोच पर काम कर रही है।

 

—-VEDIO–

 

 

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