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मनोहर लाल खट्टर अपना घमंड छोड़ केजरीवाल से सीखे

केजरीवाल से कुछ सीखें खट्टर वरना हरियाणा में और गिरेगा भाजपा का ग्राफ

नई दिल्ली: (राजकुमार अग्रवाल)देश भर में आज आम आदमी पार्टी दिल्ली में जीत का जश्न मना रही है। यही नहीं कांग्रेस और भाजपा नेताओं को भी जश्न मनाते देखा जा रहा है। कांग्रेस इसलिए जश्न मना रही है क्यू कि दिल्ली में भाजपा की दाल नहीं गली जबकि भाजपा इसलिए जश्न मना रही है क्यू कि दिल्ली में कांग्रेस का खाता नहीं खुला। सोशल मीडिया पर कुछ पार्टियों के नेता ऐसे ट्वीट कर रहे हैं जिसे देख कर लग रहा है कि सब खुश हैं। कोई किसी की जीत से खुश है तो कोई किसी की हार से। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर दिल्ली के मुख्य्मंत्री को जीत की बधाई दी है।

आम आदमी पार्टी की जीत के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं जिनमे लोगों का कहना है कि दिल्ली की जनता ने मुफ्तखोरी के चक्कर में आम आदमी पार्टी को जिताया है। वर्तमान में देश की बात करें तो देश के गरीबों का हाल बेहाल है। तमाम गरीबों को सरकार सस्ता राशन देती है लेकिन अधिकतर गरीबों का राशन डिपो वाले माफिया डकार जाते हैं। सरकार की हर सुविधाएँ जनता तक नहीं पहुँच पा रही हैं। गरीबों को भी जीने का हक़ है। वो भी अपने बच्चों को पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना देखते हैं। ऐसे में जब उन्हें सरकारी सुविधाएँ नहीं मिलेंगी और उनका हक़ माफिया डकार जाएंगे तो वो कहाँ जाएंगे। घर में पूड़ी नहीं मिलती तो हर किसी को भंडारा अच्छा लगता है। दिल्ली के गरीबों का हाल भी कुछ ऐसा ही था लेकिन केजरीवाल ने इस मुद्दे पर गरीबों का दर्द समझा और बिजली-पानी, शिक्षा स्वास्थ्य पर ध्यान दिया। दिल्ली के गरीब ही नहीं आम लोग भी केजरीवाल सरकार से खुश हैं। तमाम लोग ऐसे हैं जिनमे कई-कई मकान हैं और उन्होंने किराए पर दिया है ऐसे में बिजली के दाम कम होने से और 200 यूनिट बिजली फ्री होने से उनका भी हर माह लाखों का फायदा हो रहा है ऐसे में वो भी केजरीवाल के खिलाफ नहीं गए।

इस चुनाव में भाजपा ने अपने केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों की फ़ौज दिल्ली में उतार माहौल बदलने का प्रयास किया लेकिन किसी भी राज्य का कोई भाजपा का मंत्री सांसद दिल्ली में प्रचार करता था और वो खबर सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाती थी तो लोग उस मंत्री नेता को आइना दिखाते थे कि आपने अपने क्षेत्र की जनता के लिए कुछ नहीं किया है। पहले अपना क्षेत्र सुधारो फिर दिल्ली में कुछ बोलो। दिल्ली की जनता ने ऐसे नेताओं का भाषण तो सुन लिया लेकिन किया वही वो पहले से सोंच रखा था। भाजपा के जितने भी नेता दिल्ली में प्रचार कर रहे थे उनमे से लगभग 90 फीसदी नेता मोदी के नाम पर मंत्री सांसद बने हैं ऐसे में जनता ने इनकी कोई भी बात नहीं मानी। वर्तमान में अगर लोकसभा चुनाव हो तो अधिकतर सांसदों को मोदी के नाम का ही सहारा है। अपने दम पर 50 सांसद भी शायद ही चुनाव जीत सकें।
दिल्ली में कांग्रेस का और कमजोर होना आम आदमी पार्टी के लिए अच्छा रहा। यहाँ कांग्रेस के वोट बैंक कहे जाने वाले अल्प समुदाय के लोग भी केजरीवाल की तरफ चले गए। दिल्ली जीत के बाद आम आदमी अब फिर कांग्रेस का विकल्प बनने का प्रयास करेगी। बिहार चुनावों में भी आम आदमी पार्टी मैदान में उतर सकती है। हरियाणा के कई नेताओं ने दिल्ली में प्रचार किया लेकिन भाजपा को ज्यादा फायदा नहीं पहुंचा सके। हरियाणा के सीएम को केजरीवाल से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है वरना अगली बार भाजपा की और दुर्गति हो सकती है। प्रदेश में हर तरह के गलत काम धड़ल्ले से जारी हैं। मनोहर लाल माफियाओं पर अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं। खट्टर के आस पास चमचों की फ़ौज है जो उन्हें गुमराह करते थे और अब भी कर रहे हैं। केंद्र सरकार की कई योजनाओं का लाभ प्रदेश की अधिकतर जनता को नहीं मिल रहा है। गरीबों का राशन अब भी माफिया डकार रहे हैं। शिक्षा स्वास्थ्य माफिया प्रदेश की जनता को जमकर लूट रहे हैं। प्रदेश में बड़ा गड़बड़झाला जारी है। मनोहर नीति में बदलाव न हुआ तो हरियाणा भाजपा का ग्राफ आगे और गिरता चला जायेगा। पीएम मोदी अधिक समय तक हरियाणा भाजपा को नहीं बचा सकते।j

पिछले साल जब हरियाणा में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के बीच हरियाणा के सरकारी स्कूलों को लेकर वाक युद्ध छिड़ा तो हरियाणा के मुख्यमंत्री ने अरविंद केजरीवाल का खूब मजाक उड़ाया और अरविंद केजरीवाल को बहुत बुरा भला कहा इसके बावजूद भी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए उल्टा पिछले दिनों प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन को हरियाणा के सरकारी स्कूलों को अडॉप्ट करने की विनती की एक राज्य के लिए इससे बड़ी शर्मसार बात क्या होगी जब वहां का मुख्यमंत्री प्राइवेट स्कूलों को कहता है कि वह सरकारी स्कूलों को अडॉप्ट करें यही नहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पिछले 5 साल के कार्यकाल के दौरान उनके घमंड और बोलचाल को लेकर हरियाणा की जनता कितनी नाखुश है वह खुद देख चुके हैं इसके बावजूद भी मनोहर लाल ने कोई सबक नहीं सीखा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को चाहिए कि वह अपना घमंड और बड़ा भाजपा नेता होने का रुतबा छोड़ केजरीवाल से सबक सीखे

 

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