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कैथल पुलिस ऐसा कैसे कर सकती है ,

कैथल पुलिस ऐसा कैसे कर सकती है ,

डिजिटल नम्बर प्लेट होते हुए भी पुलिस पर जबस्दस्ती  चालान काटने के आरोप

पुलिस अधिकारी को आईना दिखाने के लिए युवक ने पुलिस वाले की साधारण नम्बर प्लेट वाली फ़ोटो सोशल मीडिया पर की वायरल

एसपी को मामले की शिकायत देकर की कार्रवाई की मांग, कहा पुलिस वाले का भी किया जाए चालान

कैथल, 19  सितंबर (कृष्ण प्रजापति):

करोना काल मे जगह-जगह खड़े होकर चालान काटने में व्यस्त कैथल की ट्रेफिक पुलिस के अजीबोगरीब कारनामे थमने का नाम

नही ले रहे हैं। लोग इस महामारी में पहले ही बेरोजगारी की मार झेल रहे है वहीं पुलिस हर सड़क, हर मोड़ और हर चौराहे पर

चेकिंग के नाम पर धड़ाधड़ चालान काट कर सरकार की अर्थव्यवस्था को ऊपर उठाने में जुटी है। इसी बीच एक घटना एडवोकेट

गुरदीप सिंह के साथ भी घटी। जानकारी देते हुए सोशल एक्टिविस्ट जयपाल रसूलपुर ने बताया कि परसो उनके मित्र गुरदीप

एडवोकेट कैथल से अपने भाई के साथ वापिस अपने गाँव मालखेड़ी जा रहे थे तो कैथल के छोटू राम चौक के पास कैथल की

ट्रैफिक पुलिस चेकिंग कर रही थी, तभी एएसआई राजेन्द्र सिंह ने गुरदीप की बाईक को रोका और उसके सभी कागजात दिखाने

को कहा। गुरदीप ने अपनी बाईक के सभी कागजात दिखाए जो सभी पूरे मिले। परन्तु आरोप हैं कि उक्त एएसआई तानाशाही

रवैया अपनाते हुए जबर्दस्ती 500 रु मांगने लगे और नही देने पर 500 का चालान काटने के लिए अड़ गए, जिसका गुरदीप ने

विरोध किया और कहा कि जब हेलमेंट, मास्क और सभी कागजात पूरे हैं तो पैसे किस चीज के दें, तो जनाब को ये बात सुन कर

बहुत गुस्सा आया और किसी की क्या मजाल की कोई कैथल पुलिस के आगे ऊंची आवाज में बात करे, तो उक्त थानेदार ने

जबस्दस्ती

गुरदीप की बाईक का बिना “डिजिटल नम्बर प्लेट” न लगी होने का 500 रु का चालान काट दिया और बोला कि जो

करना है कर लेना, इतना कह कर 500 रु का चालान गुरदीप के हाथ मे थमा दिया,

अब गुरदीप ने भी अपनी वकालत की पढ़ाई की हुई है वो हार मानने वालों में से नही है और आप को बता दे कि गुरदीप ने इस

वाक्या से ठीक एक दिन पहले ही प्रदुषण कार्ड बनवाया था जिस पर डिजिटल नम्बर प्लेट साफ-साफ दिख रही है,

जो इस विषय मे अहम सबूत है, गुरदीप ने यह वाक्य साँझा

किया, जिसको लेकर कल एसपी कैथल को इस पूरी घटना की शिकायत की जिस पर अब तक तो कोई कार्यवाही नही हुई और

आज एडवोकेट ने भी कमाल करते हुए जॉली एलएलबी की तरह पता नही कहाँ से उस पुलिस वाले की बिना डिजिटल नम्बर प्लेट

लगी बाईक की फ़ोटो खींच लाए जिसमें साफ दिख रहा है कि उक्त एएसआई ने अपनी खुद की बाईक पर डिजिटल नम्बर प्लेट

नही लगाई हुई है। जयपाल ने बताया कि अब कुछ मित्र बोल रहे है कि 500 रु की बात है भर देते है क्यों पुलिस के लफड़ों में पड़ना

पर मेरा और गुरदीप का ज़मीर नही मानता क्योंकि मैं भी एलएलबी की पढ़ाई कर रहा हूँ और हम मानते है कि अगर हम खुद को

ही न्याय नही दिलवा सके तो आगे भविष्य में जनता को क्या न्याय दिलवा सकेंगे, अब बात कानून की है तो कानून पर ही खत्म

करगें और इस पुलिस अधिकारी को सबक जरूर सिखाएंगे चाहे इसके लिए हमे हाई कोर्ट ही क्यों न जाना पड़े।

 

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