कोरोना लॉक डाउन में भी  फूलों की सेज  ख्वाजा साहब की मजार पर ,ब्रह्मा मंदिर में भी पूजा अर्चना और आरती प्रतिदिन।

कोरोना लॉक डाउन में भी  फूलों की सेज  ख्वाजा साहब की मजार पर ,ब्रह्मा मंदिर में भी पूजा अर्चना और आरती प्रतिदिन।
अजमेर (अटल हिन्द ब्यूरो )
इसे कौमी एकता की मिसाल ही कहा जाएगा कि देशव्यापी लॉक डाउन के दौरान भी पवित्र तीर्थ पुष्कर से रोजाना कोई तीस किलो गुलाब के फूल अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की मजार पर पेश हो रहे हैं। कोरोना वायरस के प्रकाप के चलते भले ही जायरीन का प्रवेश दरगाह में बंद हो, लेकिन खादिम समुदाय सामान्य दिनों की तरह खिदमत का काम कर रहा है। खादिमों की प्रतिनिधि संस्था अंजुमन सैय्यद जादगान के सचिव वाहिद हुसैन अंगाराशाह ने बताया कि लॉक डाउन में भी रोजाना की तरह प्रात: चार बजे आस्थाना शरीफ को खोला जाता है तथा मजार की खिदमत की जाती है। भले ही जियारत के लिए जायरीन नहीं आ रहे हों, लेकिन दोपहर तीन बजे मजार शरीफ पर चंदन और लिबास पेश किया जाता है। रोजाना की तरह पुष्कर से आए गुलाब के देशी फूलों की सेज से मजार शरीफ को सजाया जाता है। पुष्कर के ही देशी गुलाब के फूलों की सेज मजार शरीफ पर पेश करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। देश का माहौल चाहे जैसा भी हो, लेकिन पुष्कर तीर्थ के फूलों की सेज रोजाना मजार शरीफ पर पेश होती है। सामान्य दिनों की तरह सायं साढ़े छह बजे चुनिंदा खादिम मजार शरीफ और आस्थाना शरीफ पर मोमबत्ती जलाकर रोशनी की रस्म अदा करते हैं। रात साढ़े 9 बजे आस्थाना शरीफ को बंद किया जाता है। अंगाराशाह  ने बताया कि लॉकडाउन से दरगाह में धार्मिक रस्में प्रभवित नहीं हुई है। प्रशासन के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए खादिम समुदाय अपना फर्ज निभा रहा है। खादिम समुदाय देश में अमन चैन और खुशहाली की दुआ भी कर रहा है। दरगाह के खादिम सैय्यद एसएफ हसन चिश्ती ने बताया कि कोरोना वायरस के प्रकोप से भारत को मुक्ति दिलाने के लिए दरगाह में दुआ की जा रही है।
दरगाह कमेटी मंगवाती है फूल:
केन्द्र सरकार के अधीन काम करने वाली दरगाह कमेटी के नाजिम शकील अहमद ने बताया कि दरगाह कमेटी ही प्रतिदिन पुष्कर से देशी गुलाब के फूल मंगवाती है और सेज बना कर मजार शरीफ पर पेश किया जाता है। चूंकि सेज पुष्कर के फूलों से बनाई जाती है, इसलिए इसी परंपरा को निभाया जा रहा है। प्रतिदिन 20 किलो फूलों की सेज तैयार कर पेश की जाती है। इसके अतिरिक्त अन्य रस्मों में भी फूलों का उपयोग होता है।
लंगर भी और महफिल भी:
अंजुमन के सचिव अंगाराशाह ने बताया कि दरगाह की परंपरा के अनुरूप रोजाना लंगार बनाया जा रहा है तथा कुछ खादिमों के बीच महफिल की रस्म भी हो रही है। यानि दरगाह में सभी परंपराओं का निर्वाह किया जा रहा है।
ब्रह्मा मंदिर में पूजा अर्चना:
पुष्कर स्थित एक मात्र ब्रह्मा मंदिर में भी पूजा अर्चना का काम नियमित हो रहा है। मंदिर के पूजारी परिवार के सदस्य कमलेश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि समान्य दिनों की तरह प्रात: छह बजे मंगला आरती की जाती है तथा दोपहर डेढ़ बजे से तीन बजे के बीच मंदिर के पट बंद रखे जाते हैं। तीन बजे मंदिर खोला जाता है तथा सायं छह बजे संध्या आरती तथा रात 9 बजे शयन आरती की जाती है। रात 9 बजे शयन आरती के साथ ही मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर परिसर में होने वाली सभी धार्मिक रस्में श्रद्धालु एलईडी के जरिए मंदिर के नीचे से देख सकते हैं। उन्होंने बताया कि लॉक डाउन के दौरान भले श्रद्धालु मंदिर परिसर में प्रवेश न कर पा रहे हों, लेकिन मंदिर में सभी धार्मिक रस्में नियमित रूप से हो रही हैं।

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