खट्टर (Khattar)साहब ने करोड़ों रूपये की लैंड क्रुजर खरीदने के बाद करोड़ों का हवाई जहाज में तेल फूंककर कहते है सरकार है कंगाल ?

खट्टर और दुष्यंत ने क्या सरकार को कर दिया कंगाल जो बच्चों से पांच रूपये और किसानों से पांच किलो अनाज लेकर होना चाहती है मालामाल ?

विधायकों का अस्सी हजार का भत्ता और टेलीफोन का भत्ता कर्मचारियों का डीए की तरह एक साल के लिए बंद हो गया तो सरकार का खजाना में आएंगे करोड़ों रूपए ?

खट्टर साहब ने करोड़ों रूपये की लैंड क्रुजर खरीदने के बाद करोड़ों का हवाई जहाज में तेल फूंककर कहते है सरकार है कंगाल ?

14234378 करोड़ का सरकार के पास बजट होने के बावजूद घर बैठे अभिभावक निजी स्कूलों को देंगे फीस ?

भाजपा और जजपा की सरकार ने हरियाणा को बनाया 1.98 लाख करोड़ का कर्जदार फिर भी गीता जंयति पर खर्च करते हैं सौ करोड़ ?

पूंजीपतियों के बटे खाते के बाद किसानों और मजदूरों के कर्ज भी बटे खाते में डलवा दो खट्टर साहब वो भी हो जाएंगे खुशहाल ?

 

अटल हिन्द /कुलदीप खंडेलवाल

 

Did Khattar and Dushyant make the government pauper who wants to take five rupees from children and five kilograms of grain from farmers?

If the MLA’s allowance of eighty thousand and the telephone allowance is stopped like the DA of the employees for a year, then the crores of rupees will come to the treasury of the government?

Khattar saheb, after purchasing crores of land cruisers, blows oil in crores of airplanes and says that the government is a pauper?

14234378 crore, despite the government having a budget, parents sitting at home will pay fees to private schools?

BJP and JJP government made Haryana 1.98 lakh crores debtors, yet spend 100 crores on Geeta Jayanti?

After the divided account of the capitalists, the debts of farmers and laborers will also be included in the distributed account.

 

भाजपा और जजपा वित्तीय प्रबंधन फेल हो गया है। यहां 1.98 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है।प्रदेश में हर बच्चा अपने सिर पर 80 हजार रुपये का कर्ज लेकर जन्म लेता है। ऐसे में मनोहर लाल खट्टर करोड़ों की कार और हेलिकॉप्टर में सवारी करते हैं तो वहीं गीता जयंती पर करोड़ो पर लगा देती है। 16/10/2016 को प्रकाशित खबर हिंदुस्तान टाइम्स अखबार में हरियाणा सरकार कुरुक्षेत्र में भगवद गीता की शिक्षाओं का जश्न मनाने के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

 

 

इसके आगे के सालों में तो और भी ज्यादा खर्च किया होगा। जिसकी जानकारी फिलहाल मिली नहीं है। इसके साथ दो लैंड क्रुजर गाड़ी डेढ़- डेढ़ करोड़ की खरीदी गई जो एक चंडीगढ़ में रहेगी तो दुसरी दिल्ली में रहेगी।

 

तीन करोड़ की लैंड क्रुजर गाड़ी में खर्च कर दिये गये। इसके बाद बात करें तो हेलिकॉप्टर की तो गुरुग्राम स्थित कार्यकर्ता हरिंदर ढींगरा द्वारा दायर सूचना (आरटीआई) के एक अधिकार से पता चला है कि मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए राज्य के हरियाणा की भाजपा सरकार ने अक्टूबर 2014 से मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अंतर्देशीय हवाई यात्रा पर प्रति दिन लगभग 80,000 रूपए खर्च किए हैं, जब उन्होंने राज्य की बागडोर संभाली थी।

 

 

मुख्यमंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए राज्य के स्वामित्व वाले हेलीकॉप्टर की ईंधन लागत पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे और राज्य सरकार द्वारा किराए पर हवाई किराए का भुगतान किया गया था पिछले 45 महीनों के दौरान सेवाओं को उसके लिए काम पर रखा गया। यह आंकड़ा खट्टर की विदेश यात्राओं पर होने वाली लागत को छोड़कर था।

 

और भी ऐसे खर्चे हैं पर सरकार करती है अब कहती है की सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए बजट नहीं है। अब खट्टर साहब कभी किसानों से पांच किलो गेहूं की मांग करते हैं तो कभी बच्चों से पांच रुपए की मांग कर रहे हैं। यदि ऐसा हो जाता है तो सरकार का खजाना में कितना पैसा जाएगा और यदि सरकार अपनी फिजूलखर्ची बंद कर दें तो खजाना जरूर भर सकता हैं। देखते हैं इस रिपोर्ट में में कौन भरेगा सरकार का खजाना।

 

किसान से फंड इकट्ठा करने की बजाए 89 विधायकों के भत्तो से करें फंड इकट्ठा ?

किसानों से पांच किलो गेहूं मांगने पर संकट खत्म हो सकता है। ऐसा शायद मुख्यमंत्री को लग रहा है। आओ देखते हैं हरियाणा में यदि किसान सरकार को गेहूं दे देते हैं तो किसान सरकार का कितना खजाना भर पाते हैं। मानो हरियाणा में किसानों की संख्या पंद्रह लाख है तो पांच किलो अनाज के साथ गुणा करते हैं तो 1500000×100= 150000000 करोड़ (15 करोड़) बनते है। यदि यही आंकड़ा हम स्कूल के बच्चों का मारे तो जिनसे पांच रूपये मांगे गये हैं। अब बच्चों की संख्या पचास लाख मान लेते हैं और उन से पांच रूपये मांगे गये हैं। अब हम पचास लाख को पांच से गुणा करते हैं तो 5000000×5 = 25000000 (2.50 करोड़) करोड़ बनते हैं। अब दोनों को मिला लेते हैं तो साढ़े सताइश करोड़ बनते हैं। अब यह राशि तो आपको लाखों लोगों में चुगनी पड़ेगी। यदि सरकार चाहे तो इससे बड़ी राशि कुछ मिनटों में इकठ्ठा कर सकती है वो भी विधानसभा के परिवार में से इकठ्ठा कर सकती है।

 

कर्मचारियों पर दोहरी मार, “चैयरमैनो, विधायकों, अधिकारियों और मंत्रियों पर अब तक सरकार का क्यों नहीं है वार” ?

एक साल का कर्मचारियों का डीए और एक दिन का वेतन लिया गया है तो उसी प्रकार से किसानों की मेहनत से लेने की बात कही जा रही है ऐसे में विधायकों का हाऊस अलाउंस जोकि 80 हजार है उसका कुछ हिस्सा साठ हजार सरकार खजाना में डाल ले तो सरकार के पास एक बड़ी राशि इकठ्ठी हो जाएगी। उसके लिए हम एक हिसाब किताब लगाते है की कितना इकठ्ठा सरकार के खजाने में पैसा भर सकते हैं। इसको गणित करते हैं 60000 ×89=5340000 लाख बनते हैं। अब एक साल से गुणा कर देते हैं 5340000×12= 64080000 करोड़ तक सरकार का खजाना में जाएगा। इसके बाद विधायकों को जो टेलिफोन का पंद्रह हजार रूपये मिलते हैं तो उनका गणित 15000×89= 1335000
(1 लाख 33 हजार) रूपये बनते हैं। 133000×12=16020000 करोड़ इसके इलावा सीएम साहब आप भी अपने भत्तो मे कटौती करें तो सरकार का खजाना में योगदान हो सकता है। सीएम साहब आपको वेतन और मासिक भतो के साथ लगभग दो लाख 70 हजार रूपये मिलते हैं दिखाएं दरियादिली और एक लाख खजाना में डाल दें।

 

इसके इलावा तेल में कटौती के साथ और कटौती कर दें। इसी प्रकार से जो आईएसआई और आईपीएस अधिकारी है उनसे योगदान सरकार ले और जो चैयरमेन बनाकर कैबिनेट रैंक दिया हुआ है। ऐसे में इस महामारी से लड़ा जा सकता है वैसे मनोहर लाल खट्टर जी हरियाणा का बजट भी कम नहीं है। आपने जो 14234378 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है वो कम तो नहीं था। ऐसे में इतना बजट होने के बाद भी सरकार मांग रही है। अबकी बार का बजट तो पिछला बजट से ज्यादा है। पिछला बजट 1.32 लाख करोड़ था। फिर भी मांगने के पिछे कारण सरकार की फिजूलखर्ची हो सकती है जो लैंड क्रुजर गाड़ी है उनकी जगह दस बीस लाख वाली गाड़ी काम आ सकती है। अनिल विज भी गाड़ियों का खर्चा बचाने के साथ और खर्चे बचाता है। यदि सरकार की नुमाइंदे उनका अनुसरण करें तो शायद ही प्रदेश में कमी हो।

 

सरकार ने अपना प्रचार- प्रसार पर 190 करोड़ से भी ज्यादा खर्च करके जनता का टैक्स का पैसा उड़ाया और कहते हैं शराब से राजस्व भरेगा ?

7/1/2016 तक हरियाणा सरकार ने अपनी उपलब्धियों के प्रचार प्रसार पर अब तक 190 करोड़ रुपए की धनराशि खर्च कर दी है। इसमें सरकार द्वारा स्वर्ण जयंती आदि जैसे विभिन्न आयोजनों के प्रचार पर खर्च की गई धनराशि भी शामिल है। सरकार द्वारा प्रचार पर खर्च की गई धनराशि का खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। 20 अक्तूबर 2014 से 4 जनवरी 2017 तक हरियाणा सरकार ने प्रिंट मीडिया में प्रचार के लिए कुल 1,72,77,01,134.81 रुपए खर्च किए हैं। इस अवधि के दौरान इलैक्ट्रोनिक मीडिया में 11,49,56,001 करोड़ रुपए के विज्ञापन दिए गए हैं। अब 2016 के बाद और भी ज्यादा खर्च किया है। अब हरियाणा सरकार विज्ञापनों को रोककर रखें तो इससे सरकार का खजाना पर फर्क पड़ेगा। इस महामारी से निपटना है तो ऐसे निर्णय सरकार को लेने होगें। वैसे फिलहाल तो सरकार इस महामारी में भी सैंकड़ों करोड़ रूपये मिडिया पर लगा रही है। अखबारों और चैनलों पर सिर्फ सरकारों की खबर दिखाई जा रही है विपक्ष की खबर नजर नहीं आ रही है।

पूर्व विधायकों की पेंशन पर 22.93 करोड़ प्रति वर्ष खर्च राशि में कटौती करके मजदूर, किसान और मझौले दुकानदारों पर लगाएं ?

विधायक, अधिकारी और चैयरमैन के साथ पूर्व विधायकों की पेंशन 22.93 करोड़ प्रति वर्ष खर्च होते हैं उनका भी कुछ हिस्सा एक साल के लिए रख लेना चाहिए। पूर्व सांसदों की बात करें तो आरटीआई की सूचना के अनुसार औसतन हर साल 61 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि पूर्व सांसदों के पेंशन पर खर्च की जाती है। वहीं हरियाणा में पूर्व विधायकों का कुल 262 मासिक पेंशन पर प्रति वर्ष के हिसाब से 22.93 करोड़ रूपये खर्च किए जा रहे हैं। अलग अलग विधााकों की पेंशन पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की विधवा जसमा देवी को डबल पैंशन मिल रही है। खुद पूर्व विधायक होने के नाते जसमा देवी को 51,750 रूपये प्रतिमाह तथा पूर्व मुख्यमंत्री की विधवा होने के नाते 99,619 रूपये प्रतिमाह पारिवारिक पैंशन मिल रही है। विश्व के सबसे अधिक धनी उद्योगपतियों की सूची में शामिल व जिन्दल ग्रुप की चेयरमैन सावित्री जिंदल को प्रतिमाह 90,563/- रूपये पैंशन मिल रही है। जबकि वह 642 अरब रूपए(8.8 अरब डॉलर) सम्पति की मालिक भी हैं।
इसके अलावा सर्वाधिक मासिक पेंशन 2.38 लाख रूपए रेवाड़ी के पूर्व विधायक कैप्टन अजय सिंह यादव ले रहे हैं। पेंशन धारकों में पूर्व विधायक चन्द्रावती 2,22525/-, प्रो सम्पत सिंह 2,14, 763/-, ऐलनाबाद के पूर्व विधायक भागीराम 1,91,475/-, अशोक अरोड़ा 1,60,425/-, हरमोहिन्द्र सिंह चट्ठा 1,60,425/-, चन्द्रमोहन बिश्नोई 1,52,663/-, धर्मवीर गाबा 1,52, 663/-, खुर्शीद अहमद 1,52,663/-, फूलचंद मुलाना 1,68,188/-, मांगेराम गुप्ता 1,68,188/-, शकुंतला भगवाडिय़ा 1,68,188/-, बलबीरपाल शाह 2,07,000/-, सतबीर कादियान 1,29,375/-, स्वामी अग्रिवेश 51,750/-, शारदा रानी 1,37,138/-, देवीदास सोनीपत 1,21,613/-, कमला वर्मा 1,13,850/-, कंवल सिंह हिसार 1,21,613/-, निर्मल सिंह अंबाला 1,52,663/-, मोहम्मद इलयास 1,37,138/- रूपये प्रति माह शामिल हैं। कुल 262 पूर्व विधायकों को पेंशन दी जा रही है। इसके इलावा पारिवारिक पेंशन योजना के तहत कुल दिवंगत 129 पूर्व विधायकों की पत्नियों पर कुल 3.15 करोड़ रूपए वार्षिक खर्च किया जा रहा है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष का है अबकी बार तो यह आंकड़ा बड़ा है तो जाहिर सी बात है रूपयों की संख्या बढ़ी है। जिसमें सुभाष बराला, अभिमन्यु, रामबिलास शर्मा, कृष्ण बेदी, ओमप्रकाश धनखड़, पवन सैणी और रणदीप सिंह सुरजेवाला है‌। यह बात इसलिए लिख रहे हैं की मनोहर लाल खट्टर किसान और बच्चों से अपील की थी तो खट्टर साहब ने यह अपील पूर्व विधायकों से नहीं की है।

प्रशासन के पास करोड़ों रूपए जाने के बाद भी संस्थाएं पहुंचा रही है जरूरतमंदों को सहयोग ?

जरूरतमंदों तक सामान अधिकतर संस्थाएं पहुंचा रही हैं। इस महामारी में योद्धा के रूप में संस्थाए भी रही है। इस बीच जनता सवाल कर रही है की सरकार कह रही है की हमने जरूरतमंदों के लिए हर व्यवस्था करवाई है पर सरकार की व्यवस्था नजर नहीं आई है जो जरूरतमंदों से संबंधित थी तो ऐसे में हमने जानकारी जुटाई की सरकार ने जरूरतमंदों के लिए प्रशासन के लेवल पर क्या किया जिसका जवाब सूत्रों ने दिया की प्रत्येक जिला के पास एक करोड़ रूपये आए हैं वो एक करोड़ रूपये तहसील लेवल पर बांटकर पहुंचाए गए तो ऐसे में एक तहसील के पास सौलह से बीस लाख रूपये आए हैं वो अब खर्च हुए या नहीं यह रिसर्च के बाद ही बताएगे। बाकि जानकारी कुछ ऐसी मिली है की इस महामारी में शासन ने प्रशासन ने भ्रष्टाचार तो किया है ? अब सवाल यह भी है बीस पच्चीस करोड़ प्रशासन के माध्यम से पुरे प्रदेश में जाने के बाद भी जरूरतमंदों का पेट नहीं भर पाई तो क्या किसानों और बच्चों की फीस से पेट भर पाएगी। ऐसे में देखना दिलचस्प रहेगा की क्या सरकार फिजूलखर्ची रोककर इस महामारी में जनता को कोई राहत दे पाएगी या फिर नहीं यह तो आने वाला समय बताएगा।

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