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खानपुर महिला विवि में 26 लाख रुपये का घपला, महिला क्लर्क को सस्पेंड कर जांच बैठाई

खानपुर महिला विवि में 26 लाख रुपये का घपला, महिला क्लर्क को सस्पेंड कर जांच बैठाई

गोहाना (सोनीपत): गांव खानपुर कलां स्थित बीपीएस महिला विश्वविद्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों पर 26 लाख रुपये का घपला करने का आरोप लगा है। अधिकारियों व कर्मचारियों में आपसी मतभेद होने पर यह मामला विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया। विवि प्रशासन की सख्ती के बाद अभी तक जिन 26 लाख रुपये का घपला किया गया था, उसकी रिकवरी करके एक लिपिक को निलंबित कर दिया गया। वित्त विभाग के कार्य के लिए इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर को बनाने वाली कंपनी से जवाब तलब किया गया है तो इसके साथ ही कुलपति ने पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है। वीसी के अनुसार पूरे मामले की जांच में पता चलेगा कि इस मामले में कितने लोग शामिल है और यह घपला ज्यादा तो नहीं है।

महिला विश्वविद्यालय की अकाउंट शाखा के इंजीनियर अजय ने 2017 में साफ्टवेयर तैयार किया था। इस शाखा के अकाउंट के मुख्य अधिकारी राकेश कुमार हैं और यहां लिपिक सीमा रानी कार्यरत थी। कबाड़ की बिक्री या अन्य फंड के रुपयों की लिपिक सीमा कुमारी द्वारा पहले रसीद काट दी जाती और बाद में उसे अपने स्तर पर रद्द कर दिया जाता। उसके बाद रुपयों को विश्वविद्यालय के खाते में जमा ही नहीं करवाया जाता था। सीमा कुमारी ने करीब तीन साल में लाखों रुपये का घोटाला कर डाला। अकाउंट अधिकारी राकेश कुमार इस बात को लेकर संदेह के घेरे में हैं कि उन्हें इस मामले से लंबे समय तक अनभिज्ञता कैसे रही। बताया गया है कि लिपिक और अधिकारी में किसी बात को लेकर मतभेद हो गया। अकाउंट अधिकारी राकेश कुमार ने इस मामले को विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुषमा यादव के संज्ञान में लाया। कुलपति को बताया गया कि लिपिक से गबन किए गए लाखों रुपये में से 8.50 लाख रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। कुलपति सुषमा यादव इस बात को सुन कर हैरान रह गईं। फरवरी माह में मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में आने पर लिपिक से 17.50 लाख रुपये की ओर रिकवरी की गई। उससे कुल 26 लाख रुपये की रिकवरी की गई है। घोटाले का खेल करीब तीन साल तक चलता रहा। अधिकारियों का मानना है कि घोटाला रिकवरी से बहुत अधिक रुपये का है। कुलपति ने लिपिक सीमा रानी को निलंबित कर दिया है। मामले की जांच के लिए कमेटी भी गठित कर दी गई है। कमेटी को तीन साल में हुए पूरे लेन-देन के रिकार्ड की जांच करनी होगी।

 

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आउटसोर्स कर्मी भी हटाने के आदेश, कमेटी की जांच में सामने आएगी सच्चाई

कुलपति सुषमा यादव ने बताया कि यह पूरा मामला सामने आने के बाद आउटसोर्स कर्मियों को मुख्य जगहों से हटाने के आदेश दिए गए है, जिससे उनसे अन्य जगहों पर काम कराया जा सके। इसके साथ ही जांच कमेटी बना दी गई है, जिसमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी होंगे। उनको जल्द ही पूरी जांच रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है, जिससे यह साफ हो सके कि घपला केवल 26 लाख रुपये का किया गया है या इससे ज्यादा का घपला हुआ है। इसके अलावा इस घपले में केवल लिपिक शामिल थी या अन्य अधिकारी व कर्मी भी इस खेल में शामिल है। इन सभी की जांच की जाएगी। वहीं सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनी से जवाब तलब किया गया है कि आखिर इस तरह से कैसे किया गया। यह सबकुछ जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

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