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“गब्बर” (anil vij)के विभाग में सारे नियम कायदे तोड़ गया “टाब्बर”

“गब्बर” के विभाग में सारे नियम कायदे तोड़ गया “टाब्बर”

अनिल विज की जानकारी के बगैर कोरोना योद्धा को दे दी गई सजा

====अटल हिन्द ब्यूरो ===

All the rules in the “Gabbar” department broke the rules “Tabbar”

Punishment given to Corona warrior without knowing Anil Vij

हिसार। “गब्बर” के नाम से विख्यात हो चुके प्रदेश के गृहमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के विभाग में एक  “टाब्बर” सारे नियम कायदों को तोड़ते हुए उनके विभाग के एक अधिकारी को बेकसूर होते हुए भी सजा दिलाने का काम कर गया।
हिसार में कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में बड़ी भूमिका निभा रहे डॉ रमेश पूनिया को ड्यूटी निभाने की सजा भुगतनी पड़ी  और उन्हें एक ऐसे शख्स ने ड्यूटी से बेदखल करवा दिया जो खुद नियमों को तोड़ गया है।

हिसार में जिस तरह से डॉ रमेश पूनिया को बिना कसूर की सजा दी गई है उससे यह साबित हो गया है कि “कुछ लोग  कोरोनावायरस के खिलाफ केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के नियमों कायदों को ठेंगा दिखाते हुए किसी को भी हाशिए पर धकेल सकते हैं।
हिसार में डॉक्टर ने दुनिया ने अपने फर्ज को अंजाम देते हुए जेजेपी से जुड़े युवक को रिपोर्ट आने तक आइसोलेशन में रहने को कहा था लेकिन वह सरकारी नियमों को तार-तार करते हुए दबंगी दिखाकर 11 बजे ही रिपोर्ट आने से पहले घर पर पहुंच गया।
उसके बाद जब स्वास्थ्य विभाग की टीम उक्त युवक के घर पर क्वॉरेंटाइन का पोस्टर चिपकाने के लिए गई तो जे जे पी से जुड़े युवक ने रोष दिखाते हुए डाक्टर रमेश पूनिया को 24 घंटे में ही परिणाम भुगतने की सरेआम धमकी दे डाली।

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उक्त युवक ने अपनी धमकी को अमलीजामा पहनाते हुए 24 घंटे के अंदर ही डाक्टर रमेश दुनिया को ड्यूटी से बेदखल कर दिया।
प्रदेश के गृह मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को इस बात का पता भी नहीं है कि उनके विभाग की मान मर्यादा और नियम कायदे को एक  व्यक्ति ने पैरों के तले रौंद दिया है।
आइसोलेशन के नियमों का पालन नहीं करने और क्वॉरेंटाइन के पोस्टर को लगाने वाली टीम के खिलाफ दुर्व्यवहार करने के चलते उक्त युवक के खिलाफ है डिजास्टर नियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए थी लेकिन ऐसा होने की बजाय फर्ज अदा कर रहे डॉक्टर को ही बलि का बकरा बना दिया गया।

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क्या अनिल विज के विभाग में इस तरह से कोई भी अदना सा व्यक्ति फर्ज को अंजाम दे रहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सजा देने का काम कर सकता है।
खास बात यह है कि उक्त युवक ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में सीएम सूट में ठहर कर प्रदेश के मुख्यमंत्री और दूसरे वीआईपी लोगों की सुरक्षा को भी दांव पर लगाने का काम किया। इस तरह नियम कायदे तोड़ने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन इसके बदले वह व्यक्ति अपने सियासी रसूख का दबदबा दिखाने का काम कर गया है।
अब देखने की बात यही है कि प्रदेश के गृहमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री इस अन्याय के खिलाफ कड़ा एक्शन लेते हैं या खुद भी आंखें मूंद कर न्याय अन्याय की दोस्त को सही ठहराते हैं।

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