गुरु रविदास इंटरनेशनल स्कूल का संतों ने किया शिलान्यास

www.atalhind.com8 November 20212 min read1 viewsशिक्षा
गुरु रविदास इंटरनेशनल स्कूल का संतों ने किया शिलान्यास
अम्बाला, पूर्ण सिंह /ATAL HIND
एनएच 344 स्थित यमुनानगर जिले के गांव मनसापुर में बेगमपुरा शोध संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा बनाए जाने वाले गुरु रविदास इंटरनेशनल स्कूल का शिलान्यास किया गया। इस अवसर पर विशाल संत समागम का आयोजन किया गया, जिसमें बेगमपुरा शोध संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष आचार्य संत कंवरपाल ब्रह्मचारी, संत वीर सिंह हितकारी जी, गुरु रविदास आश्रम शुक्रताल के महंत स्वामी सत्यानंद जी महाराज, संत जैनदास हितकारी जी, संत गुरपाल दास जी, संत मेनपाल जी, संत ज्ञाननाथ निराकारी जी समेत हरियाणा व अन्य प्रदेशों से आए संतों ने अपने प्रचचनों से निहाल किया। संत कंवरपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि जगतगुरु रविदास जी ने अपनी वाणी में शिक्षा के प्रति जागरूक करते कहा है कि पढिय़े गुणिये नाम सब सुनिए, वहीं संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने कहा कि शिक्षा शेरनी का वह दूध है जो इसे पीएगा वही दहाड़ेगा। इसके अलावा भगवान वाल्मीकि सृष्टि के पहले टीचर हुए वहीं ज्योतिबा फुले आदि महापुरुषों ने समाज को शिक्षित होने का मार्ग दिखाया है। इसलिए बेगमपुरा शोध संस्थान चैरिटेबल ट्रस्ट भी लोगोंं को शिक्षित करने के लिए इस स्कूल का निर्माण कर रहा है।
संत वीर सिंह हितकारी ने पत्रकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि कोई भी काम मीडियाकर्मियों के बिना अधूरा है। चाहे वह धार्मिक हो, राजनीतिक हो अथवा सामाजिक हो। उन्होंने कार्यक्रम की कवरेज करने पहुंचे मीडियाकर्मियों का विशेष रूप से धन्यावाद किया। संत वीर सिंह हितकारी ने आचार्य कंवरपाल जी द्वारा किए जा रहे इस कार्य की भरपूर प्रशंसा की। कार्यक्रम में यमुनानगर स्थित निर्मल अस्पताल के डॉ. निर्मल ने बताया कि इस स्कूल में जहां अध्यापक उच्च प्रतिभा वाले होंगे, वहीं स्कूल में अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा मुहैया कराई जाएगी। वहीं इस अवसर पर हजारों की संख्या में पहुंची संगत ने आचार्य कंवरपाल को स्कूल निर्माण में हर प्रकार के योगदान का आश्वासन दिया। इस अवसर पर गुरु का अटूट लंगर भी बरताया गया। अंबेडकर युवा मंच के अध्यक्ष मनदीप टोपरा ने कार्यक्रम में अपने संगठन के साथ सेवा कार्य निभाए। वहीं, रवि धुराला समेत अन्य कीर्तनी जत्थों ने सत्संग के माध्यम से गुरुवाणी का प्रचार किया।
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