KORONA-घटिया किट पर हुए टेस्ट के परिणामों का क्या होगा,राजस्थान और हरियाणा की सरकारों ने किट का आयात रोका

घटिया किट पर हुए टेस्ट के परिणामों का क्या होगा,राजस्थान और हरियाणा की सरकारों ने किट का आयात रोका

What will happen to the results of tests on substandard kits, Rajasthan and Haryana governments stopped import of kits

 

दिल्ली (अटल हिन्द ब्यूरो ) देश में कोरोना वायरस से मरने वालो की संख्या 640 के पार हो गई, जबकि पॉजिटिव केस 20 हजार तक पहुंच गए हैं। देश में रोजाना पॉजिटिव केसों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन देश के लिए यह दुखद बात है कि चीन से मंगाए गए रेपिड टेस्ट के किट फेल हो गए हैं। सवाल उठता है कि इन किट के परिणाम के आधार पर जिन व्यक्तियों को पॉजिटिव और नेगेटिव माना गया, उनका क्या होगा? भारत सरकार ने एक बार फिर उस चीन पर भरोसा किया जो हमारे दुश्मन देश पाकिस्तान की मदद करता है।

Haryana में  कोरोना मरीजों की संख्या पहुंची  250, सोनीपत में एक स्टाफ नर्स और तीन लोग पॉजिटिव

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीन के शासकों के साथ चाहे जितनी मित्रता प्रदर्शित कर लें, लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा। भारत ने चीन से रेपिड टेस्ट किट तब खरीदे जब कई देश चीन के इन किट को घटिया क्वालिटी का बता रहे थे। भारत ने चीन की दो कंपनियों को रेपिड किट सप्लाई करने के लिए अधिकृत किया। इन अधिकृत कंपनियों से ही राजस्थान सरकार ने भी दो लाख किट खरीदने का ऑर्डर दिया। पहले चरण में आए 10 हजार किट की गुणवत्ता पर सवाल उठ खड़े हुए।

CORONA TEST-Rajsthan-रेपिड टेस्ट के किट घटिया क्वालिटी के पॉजिटिव को भी नेगेटिव बता रहे

 

इसलिए सरकार ने शेष किट की सप्लाई पर रोक लगा दी है। ऐसा ही निर्णय हरियाणा की सरकार को भी करना पड़ा है। इतना ही नहीं (आईसीएमआर) ने भी चीन की सप्लाई पर रोक लगा दी है। सवाल यह भी है कि आईसीएमआर ने कुछ राज्यों को किट की जांच किए बगैर ही भेज दिया। यह कार्यवाही आनन-फानन में की गई। यह माना कि कोरोना के प्रकोप को देखते हुए केन्द्र सरकार भी टेस्ट करने का दबाव है। लेकिन देश की जनता को गुणवत्ता वाले किट उपलब्ध हों, इसकी जिम्मेदारी भी केन्द्र सरकार की ही है। अब यदि चीन ने घटिया किट दिए हैं तो सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि भारत ने सस्ते किट का लालच देखकर चीन की कंपनियों को मान्यता दी। चीन ने एक रेपिट टेस्ट किट के 610 रुपए में बेचा है, जबकि कोरिया जैसा देश ऐसे किट को तीन हजार रुपए में दे रहा है।

 

CORONA TEST KIT की सप्लाई , लोगों की जान जोखिम में , देखे ICMR की रिजेक्ट लिस्टेड कंपनियों की सूची

 

भले ही भारत में चीन का सामान बड़ी मात्रा में बिकता हो, लेकिन दुकानदार अपने ग्राहकों को पहले ही कह देता है कि चीन के सामान की कोई आरंटी नहीं है। देश में ऐसे माहौल के बीच रेपिड किट चीन से मंगाने पर कई सवाल उठते हैं। हो सकता है कि रेपिड किट चीन में ही तैयार हो रहे हों, अन्य देशों के पास इस किट को बनाने की तकनीक नहीं हो। यही वजह है कि अमरीका जैसा समृद्ध देश भी रेपिड किट चीन से ही मंगा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार चीन की कंपनियों ने  जो किट भारत के लिए तैयार किए थे, उन्हें अमरीका को दे दिया।

 

 

यही वजह रही कि भारत में किट विलम्ब से भेजे गए। इस मामले में हरियाणा और राजस्थान सरकार की जल्दबाजी भी देखने को मिली है। इन दोनों ही सरकारों ने सीधे चीन की कंपनियों को किट का ऑर्डर दे दिया। अब जब किट के टेस्ट फेल हो गए हैं तो सारी जिम्मेदारी आईसीएमआर पर डाली जार ही है। यह सही है कि आईसीएमआर ने ही चीन की कंपनियों को अधिकृत किया था। असल में कोरोना वायरस से लडऩे में राज्यों और केन्द्र के बीच तालमेल का अभाव है।

 

सेक्स ढूंढ लेते हैं तो यह हमारी नजर का कसूर है,Sex shows its influence all around.

 

गैर भाजपाई राज्य सरकारों का कहना है कि केन्द्र सरकार चिकित्सा उपकरण उपलब्ध नहीं करवा रही है, जिसकी वजह से परेशानी हो रही है। अच्छा हो कि इस राजनीतिक खींचतान  को जल्द से जल्द रोका जाए। कोरोना वायरस किसी एक राज्य का नहीं है। वह तो वैश्विक महामारी है।  हम सार्क देशों में एकता की बात करते हैं, लेकिन हमारे ही देश में राज्यों के बीच तालमेल नहीं है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का यह कथन सही है कि कोरोना से लडऩे के लिए चिकित्सा उपकरणों के लिए केन्द्रीयकृत व्यवस्था हो। यानि पहले केन्द्र सरकार सामान खरीदें और फिर राज्यों को दे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *