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चौशाला में ‘रोजगार का संकट व छात्र-नौजवानों के आंदोलन की दिशा’ नामक विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित

चौशाला में ‘रोजगार का संकट व छात्र-नौजवानों के आंदोलन की दिशा’ नामक विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित
जिस दौर से हम गुजर रहे हैं ऐसे दौर में भगतसिंह को याद करना ज्यादा जरूरी : प्रवीण
कैथल, 29 सितम्बर (कृष्ण प्रजापति): नौजवान भारत सभा ने भगतसिंह के 113वें जन्मदिवस के अवसर पर गांव चौशाला में ‘रोजगार का संकट व छात्र-नौजवानों के आंदोलन की दिशा’ नामक विषय पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की। इस विचार गोष्ठी में कलायत व आसपास के गांव के छात्रों व नौजवानों ने भागेदारी की।नौजवान भारत सभा के पदाधिकारी प्रवीण ने बताया कि आज जिस दौर से हम गुजर रहे हैं ऐसे दौर में भगतसिंह को याद करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो जाता है।
भगतसिंह को याद करने का मतलब केवल उसकी मूर्ति पर फूल माला चढ़ा देना नहीं है बल्कि आज जरूरत इस बात की है कि भगतसिंह और उसके साथियों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाए। ताकि मेहनतकश जनता व छात्र-नौजवान सच्चे मायने में भगतसिंह के सपनों को जान सकें। जैसे कि आज देश में बेरोजगारी के हालात दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं जिसके कारण छात्र-नौजवान निराशा व नशे की तरफ़ रुख कर रहे हैं। ऐसे हालातों को देखते हुए छात्र-नौजवानों को एक सही दिशा देना किसी भी संग़ठन का आज जरूरी कार्यभार होना चाहिए। नौजवान भारत सभा पिछले लंबे समय से कलायत व आसपास के गांव के छात्रों-नौजवानों को उनकी रोजगार की मांग को लेकर एकजुट कर रही है ताकि पूरे देश में  छात्रों-नौजवानों का आंदोलन खड़ा करके “भगतसिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून” पास करवाकर के लागू करवाया जा सके। आज भगतसिंह को सच्चे मायने में याद करना यही होगा कि हम उनके जन्मदिवस पर यह संकल्प लें कि एक-दूसरे के बीच से जात-धर्म की दीवारों को गिरा कर हमारे क्रांतिकारीयों के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएंगे। अंत मे सभी नौजवानों ने इन्कलाबी नारों से भगतसिंह को याद करते हुए गांव की चौपाल से लेकर बस अड्डे तक रैली निकालते हुए क्रांतिकारी नारों व गीतों के साथ रैली का समापन किया।

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