जमीन फाड़ चिल्लाया विकास … लो जी , आर ओ बी सर्विस रोड एक बार फिर धंस गया

जमीन फाड़ चिल्लाया विकास

… लो जी , आर ओ बी सर्विस रोड एक बार फिर धंस गया

कुछ माह पहले ही डाली गई थी एसटीपी की पाइप लाइनें

जन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई

बरसात के मौसम में यहां हो सकता है और भी बड़ा हादसा

फतह सिंह उजाला
पटौदी
। वह विकास कार्य भी क्या जो चिल्ला कर ना बोले ! ऐसा ही कुछ देखने को मिला पटौदी हलके के हेलीमंडी क्षेत्र में , यहां कुछ

समय पहले हुए किया गया विकास धरती फाड़ के चिल्ला पड़ा । इसमें चैकने की कोई बात नहीं है । यह हकीकत है की हेलीमंडी

पालिका क्षेत्र में रेलवे ओवरब्रिज के साथ बने सर्विस रोड की हालत ऐसी हो चुकी है कि कब कहा कौन सा वाहन धंस जाए और हादसा हो

? यह किसी को भी मालूम नहीं रहता है । नियमित अंतराल पर इस सर्विस रोड पर कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह से जा चुकी है ।

सोमवार को भी ऐसा ही हुआ , जब रेलवे ओवरब्रिज के साथ सर्विस रोड पर एक ट्राला टुकड़ी पत्थर लेकर आ रहा था तो अचानक धंस

गया। ट्राला धंसा ही नहीं बलिक ट्राले के 2 टायर भी ब्रष्ट हो गए । इस सर्विस रोड पर नियमित अंतराल पर इस प्रकार के हादसे होते आ

रहे हैं । इसका कारण यह है कि यहां पर जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के द्वारा कुछ माह पहले ही एसटीपी के पाइप लाइन डाले

गए थे। पाइप लाइन डालने के साथ ही जगह जगह बड़े हॉल अथवा होदी भी बनाए गए थे। इन्हें बनाए जाने के दौरान सही प्रकार से भरत

नहीं होने से मामूली सी बरसात होते ही अब यह सर्विस रोड कभी भी धंस जाता है । सीधे और साफ शब्दों में कहने में कोई गुरेज नहीं की

जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग की लापरवाही , जमीन फाड़कर चिल्ला रही है , बताती है कि विकास कैसा हुआ है ?

यह तो गनीमत रही कि ट्राला पीछे से धंसा, यदि चालक केबिन के हिस्से की तरफ से यह ट्राला धसता तो इस बात से इंकार नहीं की

चालक केबिन में बैठे चालक और परिचालक के साथ भी कोई अनहोनी हो सकती थी । इस सर्विस रोड पर बरसात होते ही नहर की

तरह पानी भरा रहता है और यही मालूम नहीं होता कि कब कहा यह सड़क वाहनों के बोझ से धड़ाम से जमीन में धस जाए । गनीमत यह

रही कि किसी सरकारी अधिकारी का वाहन या कोई स्कूल की बस नहीं थी । अन्यथा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि भुगत

भोगी ही जानते कि उनके मन पर क्या बीती होगी । ऐसे विकास का भी क्या फायदा जो हादसों का कारण बनता रहे और स्थानीय

प्रशासन वरिष्ठ अधिकारी ऐसी लापरवाही पर अपनी आंखें बंद किए बैठे रहे ।

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