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जीत कर भी हार गए दुष्यंत चौटाला सरकार तो बच गई लेकिन जेजेपी में खाई खुद गई

जीत कर भी हार गए दुष्यंत चौटाला
सरकार तो बच गई लेकिन जेजेपी में खाई खुद गई
तीन विधायकों की नाराजगी बड़ी समस्याएं खड़ी करेगी
-राजकुमार अग्रवाल
चंडीगढ़। कल विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला‌ने गठबंधन सरकार के सहयोगी की भूमिका पर खरा उतरते हुए विपक्ष के फूलों का मुंहतोड़ जवाब देने का काम किया। जेजेपी विधायकों के सरकार के पक्ष में खड़े रहने के कारण गठबंधन की सरकार अविश्वास प्रस्ताव के चक्रव्यूह से सुरक्षित बाहर निकलने में भी सफल हो गई लेकिन इस अविश्वास प्रस्ताव की बड़ी कीमत दुष्यंत चौटाला को चुकानी पड़ी है।
जी हां अविश्वास प्रस्ताव के बहस के दौरान दुष्यंत चौटाला की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई है जिसमें वे अकेले बैठे हुए नजर आ रहे हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज निराशात्मक झलक रही है।
यह सही है कि व्हिप के जरिए दुष्यंत चौटाला ने जेजेपी के विधायकों को सरकार के पक्ष में खड़ा रहने के लिए मजबूर कर दिया लेकिन यह भी सच्चाई है कि पार्टी के 10 विधायकों में से तीन विधायक उनसे दूर हो गए हैं।


नारनौंद के विधायक राम कुमार गौतम तो पहले से ही दुष्यंत चौटाला से खासे नाराज चल रहे हैं लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के दौरान पार्टी के दो विधायक टोहाना से देवेंद्र बोली और बरवाला से जोगीराम सिहाग भी दुष्यंत चौटाला से दूर होते हुए नजर आए।
इन दोनों विधायकों ने किसान आंदोलन के समर्थन में अपनी राय जाहिर की और देवेंद्र बबली ने तो सरकार से समर्थन वापस लेने तक की नसीहत भी दे डाली।
देवेंद्र बबली और जोगीराम सिहाग ने जो मुद्दे उठाए उनमें पूरा दम था और यह हकीकत भी है कि किसान आंदोलन की सबसे ज्यादा मार जेजेपी के विधायकों को झेलनी पड़ रही है।
पिछले 2 महीने से दुष्यंत चौटाला खुद अपने विधानसभा हलके उचाना में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं। जेजेपी के दूसरे विधायकों की भी यही हालत है। जनता उन्हें गांवों में घुसने नहीं दे रही है जिसके चलते जेजेपी और दुष्यंत चौटाला दोनों को सियासी नुकसान होता दिख रहा है।
जेजेपी के 10 विधायकों में से 3 विधायकों का पार्टी लाइन से अलग होना और दुष्यंत चौटाला की विचारधारा के खिलाफ जाना यह बता रहा है कि जेजेपी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
जेजेपी विधायकों की नाराजगी के कारण ही अविश्वास प्रस्ताव के दौरान रामकुमार गौतम, देवेंद्र बबली और जोगीराम सिहाग को बोलने का अवसर नहीं दिया गया जिसके चलते तीनों ही विधायक बेहद नाराज हैं।
जेजेपी विधायकों के साथ संबंधों में खटास होना और दूरी बढ़ना दुष्यंत चौटाला और जेजेपी दोनों के लिए ही ठीक नहीं कहा जाएगा।
देवेंद्र बबली मीडिया के सामने एलान कर चुके हैं कि अगर 15 दिन में कृषि कानून वापस नहीं हुए तो जनता के बीच में जाकर बड़ा फैसला लेने का काम करेंगे।
राम कुमार गौतम के बाद अगर देवेंद्र बबली और जोगीराम सिहाग पब्लिक और मीडिया के सामने सरकार के बारे में नैगेटिव बोलेंगे और दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व पर सवालिया निशान खड़ा करेंगे तो वह दुष्यंत चौटाला के लिए बेहद खराब बात होगी।
दुष्यंत चौटाला खुद सियासी चक्रव्यूह में फंस गए हैं क्योंकि जहां एक तरफ उन्हें गठबंधन सरकार के साथ रहकर अपने चुनावी वायदों को पूरा करना है वहीं दूसरी तरफ किसान वोटरों में फैली नाराजगी को दूर करना है।
दुष्यंत चौटाला निजी नौकरियों में 75% आरक्षण के जरिए अपना बड़ा वादा पूरा कर चुके हैं और दूसरे वायदों को भी पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन दिक्कत यह है कि उनकी मजबूरियों को कोई समझ नहीं रहा।
उनके अच्छे कार्यों की गिनती नहीं हो रही लेकिन उनकी गलतियों और नाकामियों को हर जगह दुष्प्रचार के रूप में हाईलाइट किया जा रहा है।
दुष्यंत चौटाला के संघर्ष के कई साथी भी उन्हें छोड़ कर जा चुके हैं जिसके चलते पार्टी का संगठन भी मजबूत होने की बजाय लगातार कमजोर हो रहा है। दूसरी पार्टियों के लोग जेजेपी में शामिल होना तो दूर उसका नाम सुनना भी पसंद नहीं कर रहे हैं।
बात यह है कि दुष्यंत चौटाला के लिए यह समय खराब चल रहा है और उनके लिए चुनौतियां लगातार बढ़ रही है। अपनी मजबूरियों के चलते वे बेबस नजर आ रहे हैं।
उनके विभागों में पाई गई गड़बड़ियों ने उन्हें बदनाम कर दिया है। कृषि कानूनों को लेकर सरकार का समर्थन करना भी उन्हें भारी पड़ रहा है जिसके चलते हुए किसानों में नायक की बजाय खलनायक के रूप में स्थापित कर दिए गए हैं।
घर के बाहर की चुनौतियां से लड़ने के दौरान ही उनके लिए जेजेपी के अंदर के हालात भी मुश्किल होते जा रहे हैं। 10 में से 3 विधायकों का खिलाफ खड़े होना दुष्यंत चौटाला के लिए भारी परेशानी खड़ी करेगा।
दुष्यंत चौटाला के विभागों में परफॉर्मेंस के हिसाब से दूसरे मंत्रियों से बेहतर कार्य हो रहा है लेकिन उपलब्धियों के बजाय नाकामियों और गड़बड़ियों को ही ज्यादा प्रचार मिल रहा है।
दुष्यंत चौटाला के लिए सरकार में शामिल होना चक्रव्यूह साबित हो रहा है अब देखना यही है कि वे इस चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह शहीद होंगे या अर्जुन की तरह चक्रव्यूह तोड़कर विजई होकर बाहर निकलेंगे।

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