डरता तो वो प्रधानमंत्री था…. इस प्रधानमंत्री से तो दुश्मन थर्राता है…

COVID-19: More Hydroxychloroquine

 

डरता तो वो प्रधानमंत्री था….

 

इस प्रधानमंत्री से तो दुश्मन थर्राता है…

 

He was the Prime Minister afraid

The enemy trembles with this Prime Minister ...

Delhi (Atal Hind)

 

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान को लेकर दिल्ली में कुछ सियासी/मीडियाई नट और नटनियां खुशी से बल्लियों उछलने लगे और चिल्लाने लगे कि भारत का प्रधानमंत्री डरता है…
अतः राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर चर्चा से पहले उन सियासी/मीडियाई नटों और नटनियों को केवल 2 उदाहरणों से यह याद दिलाना चाहूंगा कि….

 

 

 

शर्मनाक =  Coronavirus ,इससे भयानक और खतरनाक  क्या हो सकता है.  

1…..भारत के प्रधानमंत्री को डरते हुए हमने तब देखा था जब मुम्बई में घुसकर 10 पाकिस्तानियों ने एक एडिशनल कमिश्नर एक ज्वाइंट कमिश्नर समेत 15 पुलिसकर्मियों, 2 एनएसजी कमांडो सहित 166 निर्दोष नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया था लेकिन पाकिस्तान पर इसके जवाबी हमले की अनुमति लेने गए वायुसेनाध्यक्ष को अनुमति देने का साहस प्रधानमंत्री नहीं दिखा सका था।

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सियासी/मीडियाई नट और नटनियां यह ध्यान रखें कि… उस प्रधानमंत्री को डरा हुआ नहीं कहा जाता जो पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा उरी में 19 और पुलवामा में 40 जवानों की हत्या के ज़वाब में भारतीय सेना और वायुसेना को आदेश देता है कि इसका बदला पाकिस्तान में घुसकर लो और इसके परिणामस्वरुप भारतीय सेना और वायुसेना पाकिस्तान में घुसकर किए गए 2 हमलों से लगभग 600 से अधिक पाकिस्तानी हत्यारों को मौत के घाट उतार देती है।

#यही_नहीं
2…. भारत के #प्रधानमंत्री को लगातार 10 वर्षों तक डरते हुए हमने तब भी देखा था जब जब लगातार 10 वर्षों तक भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और भारतीय नौसेना अपने लिए नए हथियारों की मांग करती रही लेकिन देश के प्रधानमंत्री ने उनके लिए एक भी नया हथियार नहीं खरीदा क्योंकि दबाव था कि रूस से लूं तो अमेरिका नाराज और अमेरिका से लूं तो रूस नाराज होगा और अगर किसी तीसरे से लूं तो दोनों नाराज होंगे। परिणामस्वरुप उन 10 वर्षों तक नए हथियार तो छोड़िए, देश की तीनों सेनाएं बुलेटप्रूफ जैकेट, हेल्मेट… यहां तक की उपयुक्त जूतों तक के लिए तरस गई थी।

 

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लेकिन सियासी/मीडियाई नट और नटनियां यह ध्यान रखें कि उस प्रधानमंत्री को डरा हुआ नहीं कहा जाता जो इसी अमेरीकी राष्ट्रपति की स्पष्ट मनाही नाराजगी धमकी के बावजूद डंके की चोट पर रूस से 40 हज़ार करोड़ का एंटी मिसाइल सिस्टम S- 400 खरीदता है तथा रूस और अमेरिका की नाराजगी के बावजूद फ्रांस से 60 हजार करोड़ के राफेल विमान भी खरीदता है. पिछले 6 वर्षों में तीनों सेनाओं के लिए वो 7-8 लाख करोड़ के अत्याधुनिक हथियार भी खरीद चुका है।

 

सियासी/मीडियाई नटों और नटनियों को यह भी ध्यान रहे कि केवल 8 महीने पहले ही चीन अमेरीका यूएन समेत पूरी दुनिया के अंतरराष्ट्रीय चौधरियो की चौधराहट को धता बताते हुए इसी प्रधानमंत्री ने भारत के माथे के कलंक धारा 370 को एक झटके में हमेश के लिए साफ कर दिया था।

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अब बात ट्रंप की तथाकथित धमकी की…
एक सच को स्वीकार कीजिए कि जिस देश में हर 24 घण्टे में डेढ़ दो हजार लोग मौत के घाट उतर रहे हों और उनकी मौत को रोकने का कोई उपाय कहीं नजर नहीं आ रहा हो। उस देश के राष्ट्रपति की मनःस्थिति क्या होगी.? उस मनःस्थिति में यदि उसे कहीं से उम्मीद की कोई किरन दिखाई दे और उस किरन को रोक दिए जाने की बात कोई उसे बताए तो उसकी प्रतिक्रिया वही होगी जो ट्रंप की थी. हालांकि ट्रंप से एक झूठे सवाल को पूछ कर यह प्रतिक्रिया ली गयी थी।

During the press conference, Trump was asked the question, “Are you worried that there will be a response from your side to ban the export of American product, like Indian PM Modi has taken the decision not to give hydroxychloroquine to America.” Responding, Trump said, “I didn’t like this decision.”

 

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ट्रंप से सवाल पूछा गया कि, ‘‘क्या आपको चिंता है कि आपकी तरफ से अमेरिका के उत्पाद के एक्सपोर्ट में पाबंदी लगाने की प्रतक्रिया आएगी, जैसे कि भारतीय पीएम मोदी ने अमेरिका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन न देने का डिसीजन लिया है। जवाब देते हुए ट्रंप ने कहा,‘‘मुझे यह डिसीजन पसंद नहीं आया।

 

 

मैंने नहीं सुना कि यह उनका डिसीजन है. हां मैनें यह सुना है कि उन्होंने कुछ देशों के लिए पाबंदी लगाई है. मैंने कल उनसे बात की थी। हमारी अच्छी बात हुई. मैं बहुत आश्चर्यचकित होऊंगा अगर वे दवा पर पाबंदी लगाते हैं. मैंने रविवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि अगर वह हमारी (हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की)Hydroxychloroquine सप्लाई को अनुमति देते हैं तो हम उनकी सराहना करेंगे. अगर वह एसा नहीं करते हैं तो इसका जवाब दिया जाएगा,आखिर क्यों नहीं दिया जाए।

 

 

यहां उल्लेखनीय यह है कि रविवार कोअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब भारत से (Hydroxychloroquine)हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन की खेप मांगी थी उससे पहले ही मलेशिया ईरान स्पेन फ्रांस समेत कोरोना पीड़ित कई देश भारत से यह मांग कर चुके थे परिणामस्वरूप हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को हटाने का फैसला भारत शनिवार को ही कर चुका था. यही कारण है कि रविवार को डोनाल्ड ट्रंप की मांग पर प्रधानमंत्री का रुख सकारात्मक रहा था। प्रधानमंत्री मोदी के उस रुख का उल्लेख डोनाल्ड ट्रंप ने ने भी अपने उसी बयान में किया है. किन्तु अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में क्योंकि भावनाओं का कोई स्थान नहीं होता इसलिए भारत ने ट्रंप के बयान के कुछ घण्टों बाद ही जवाब दे दिया कि… मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए हमनें कुछ समय के लिए इस दवाई से एक्सपोर्ट बैन को हटाने का फैसला किया है. भारत ने कहा कि इस दवाई को पहले अपने पड़ोसी देशों तथा उन देशों को दिया जाएगा,जिन्हें इसकी ज्यादा जरूरत है। अतः अब आप स्वयं तय करिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान को लेकर दिल्ली में कुछ सियासी/मीडियाई नटों और नटनियों का खुशी से बल्लियों उछलना और चिल्लाना कितना सही कितना गलत है।

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